Iran Ceasefire Conditions: 'होर्मुज पर कंट्रोल और मुआवजा’, सीजफायर के लिए ईरान ने रखी 10 शर्तें, फंस गए Trump!
Iran Ceasefire Conditions: 26 दिनों से चल रही अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग में अब पहली बार बातचीत होती दिख रही है। जिसमें दोनों पक्षों ने अपनी-अपनी शर्तें और मांग रख दी हैं। जिसमें ईरान की शर्तों की चर्चा ज्यादा हो रही है। क्योंकि उसने कुछ ऐसी शर्तें रखी हैं जो अमेरिका को चुभ सकती हैं। आइए जानते हैं क्या हैं दोनों पक्षों की शर्तें और मांग।
अमेरिका खाड़ी से समेटे अपना बोरिया-बिस्तर
The Wall Street Journal की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने साफ कर दिया है कि अगर अमेरिका बातचीत चाहता है, तो उसे खाड़ी देशों (जैसे- सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत और जोर्डन आदि) में से अपने सभी सैन्य ठिकाने हटाने होंगे। रिपोर्ट में बताया गया है कि ईरान की रणनीति को Islamic Revolutionary Guard Corps यानी IRGC तय कर रहा है। कई हफ्तों के युद्ध के बाद इस संगठन का प्रभाव सरकार पर और मजबूत हो गया है। ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों से हुए नुकसान के लिए मुआवजा भी मांगा है, जिसे अमेरिकी अधिकारियों ने अभी तो अव्यवहारिक बताया है।

'जितनी तोड़-फोड़ की उसका हर्जाना भरो'
ईरान की शर्तें सिर्फ सैन्य अड्डों तक सीमित नहीं हैं। उसने क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक मामलों से जुड़ी मांगें भी रखी हैं। ईरान Strait of Hormuz के लिए एक नया सिस्टम चाहता है, जिससे वह मिस्र की स्वेज नहर की तरह जहाजों से टोल वसूल सके। दरअसल, स्वेज नहर से गुजरने वाले जहाजों को मिस्र की सरकार को टोल देना होता है। ईरान भी कुछ ऐसा ही चाहता है। इसके अलावा, उसने यह भी शर्त रखी है कि भविष्य में उस पर कोई हमला न हो। साथ ही, हिजबुल्लाह पर हमले बंद करने और सभी प्रतिबंध हटाने की बात भी ईरान की तरफ से कही गई।
न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम पर क्या बोला ईरान?
ईरान की तरफ से कहा गया कि अगर अमेरिका सैन्य अड्डों, दोबारा हमले न हों और होर्मुज पर टोल वाली बात मान लेता है तो हम पांच साल के लिए अपने मिसाइल प्रोग्राम की स्पीड धीमी कर सकते हैं। इसके अलावा IAEA (International Atomic Energy Agency) को भी न्यूक्लियर प्रोग्राम की जांच करने की अनुमति दी जाएगी। साथ ही, न्यूक्लियर प्रोग्राम में यूरेनियम को 60 प्रतिशत तक ही संवर्धित (Enriched) करेगा, जबकि बम बनाने के लिए लगभग 80% यूरेनियम संवर्धन की आवश्यकता होती है। यानी, वेपन ऑफ मास डिस्ट्रक्शन की जिद को भी ईरान कुछ हद तक छोड़ने के लिए तैयार है।

अमेरिका पर भरोसा नहीं: ईरान
ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi समेत कई नेताओं ने अमेरिका के साथ बातचीत से इनकार किया था। उनका कहना है कि न्यूक्लियर प्रोग्राम पर बातचीत के दौरान हुआ हमला विश्वासघात था। इसी वजह से ईरान अब किसी भी समझौते से पहले ठोस गारंटी चाहता है।
पाकिस्तान में होगी समझौते पर बातचीत?
समझौते पर बात करने के लिए अमेरिका ने इस्लामाबाद को चुनने का हिंट दिया है। लेकिन उसे शायद ईरान और इजरायल पसंद न करें। दरअसल पहले पाकिस्तान ने युद्ध में मध्यस्थता की बात की थी लेकिन अमेरिका ने इस पर कुछ खास दिलचस्पी नहीं दिखाई लेकिन अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शहबाज शरीफ के उस पोस्ट को शेयर किया है जिसमें इस्लामाबाद में मध्यस्थता की बात की गई थी। जिसे अब लोग इस्लामाबाद में बातचीत होने का हिंट मान रहे हैं। साथ ही, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के भी इस्लामाबाद दौरे की खबर आई है। जो बताता है कि इस्लामाबाद को एक बड़े विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।
शर्तों के चक्कर में मुश्किल हुआ समझौता
रिपोर्ट के मुताबिक, अरब और अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान की सख्त शर्तों के कारण अब समझौता पहले से ज्यादा मुश्किल हो गया है। फिलहाल वाशिंगटन और तेहरान के बीच सीधी बातचीत नहीं हो रही, बल्कि क्षेत्रीय मध्यस्थों के जरिए संदेश भेजे जा रहे हैं। अगर दोनों पक्षों में सहमति बनती है तो जल्द ही ये युद्ध थम सकता है।
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