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Iran Army vs IRGC: ईरान में हैं दोहरी सैन्य ताकत! आर्टेश और IRGC क्यों अलग हैं? किसके हाथ में है असली शक्ति

Iran Army vs IRGC: ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने दुनिया का ध्यान ईरान की अनूठी सैन्य व्यवस्था की ओर खींचा है। बहुत कम लोग जानते हैं कि ईरान के पास एक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग सेनाएं हैं, जो अक्सर एक-दूसरे के समानांतर काम करती हैं।

मध्य पूर्व (Middle East) में जब भी युद्ध की बात होती है, तो ईरान की 'रिवोल्यूशनरी गार्ड्स' (IRGC) का नाम सबसे पहले आता है।

Iran Army vs IRGC

लेकिन ईरान के पास एक पारंपरिक फौज भी है जिसे 'आर्टेश' कहा जाता है। आखिर एक ही देश को दो सेनाओं की जरूरत क्यों पड़ी? इसका जवाब ईरान के इतिहास और वहां की राजनीतिक व्यवस्था में छिपा है।

Iran military Structure Explained: क्यों बनी ईरान में दो सेनाएं?

ईरान में पहले से ही एक पारंपरिक सेना मौजूद थी, लेकिन 1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद नए नेतृत्व को क्रांति-पूर्व सेना की वफादारी पर भरोसा नहीं था। उन्हें डर था कि पुरानी सेना नई इस्लामिक सरकार के खिलाफ जा सकती है। इसी वजह से एक नई, समानांतर फोर्स बनाई गई IRGC जो पूरी तरह इस्लामिक शासन और सुप्रीम लीडर के प्रति वफादार हो।

Artesh Iran Army: ईरान की रेगुलर मिलिट्री आर्टेश क्या है?

आर्टेश ईरान की नियमित सेना है, जिसे दुनिया के अन्य देशों की सेनाओं की तरह ही संगठित किया गया है। इसका काम ईरान की सीमाओं की रक्षा करना और विदेशी हमलों को रोकना है। इसमें थल सेना (Army), नौसेना (Navy) और वायु सेना (Air Force) शामिल हैं। यह ईरान के रक्षा मंत्रालय के अधीन काम करती है और आमतौर पर राजनीति से दूरी बनाए रखती है।

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Islamic Revolutionary Guard Corps Role: इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) क्या है?

'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) की स्थापना 1979 की क्रांति के बाद की गई थी। उस समय नए नेतृत्व को पुरानी सेना (आर्टेश) की वफादारी पर शक था, इसलिए एक ऐसी पैरेलल फोर्स बनाई गई जो सीधे सुप्रीम लीडर (रहबर) के प्रति वफादार हो।

IRGC रक्षा मंत्रालय को नहीं, बल्कि सीधे ईरान के सर्वोच्च नेता को रिपोर्ट करती है। इसका कमांड स्ट्रक्चर रक्षा मंत्रालय से अलग है। यही वजह है कि इसे ईरान की सबसे प्रभावशाली सैन्य संस्था माना जाता है। IRGC की दो प्रमुख यूनिट्स हैं- कुद्स फोर्स यह विदेशों में सीक्रेट ऑपरेशंस और मित्र समूहों (जैसे हिजबुल्ला/हूती) को सपोर्ट करती है। वहीं बासीज एक वॉलंटियर मिलिशिया है, जिसका काम आंतरिक विद्रोहों को कुचलना और देश के भीतर सुरक्षा बनाए रखना है।

शक्ति का संतुलन या संघर्ष? युद्ध में किसकी क्या भूमिका?

ईरान में ये दोनों सेनाएं अक्सर संसाधनों और प्रभाव के लिए एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करती हैं। IRGC न केवल एक सैन्य बल है, बल्कि ईरान की अर्थव्यवस्था (कंस्ट्रक्शन, इंजीनियरिंग और बैंकिंग) के एक बड़े हिस्से पर भी इसका कब्जा है। वहीं, आर्टेश को अक्सर कम बजट और कम प्रचार मिलता है, लेकिन बड़े पैमाने पर पारंपरिक युद्ध होने की स्थिति में इसकी भूमिका अपरिहार्य हो जाती है।

मौजूदा तनाव के बीच, जहां आर्टेश सीमा पर टैंकों और लड़ाकू विमानों के साथ तैनात है, वहीं IRGC अपनी कुद्स फोर्स के जरिए पूरे मिडिल ईस्ट में फैले अपने नेटवर्क को सक्रिय कर रही है। ईरान की यह 'दोहरी सेना' नीति उसे बाहरी हमलों से बचाने के साथ-साथ आंतरिक शासन को मजबूती देने का एक अनूठा 'सुरक्षा चक्र' प्रदान करती है।

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