Republic Day Guest: इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतों होंगे गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि, कौन हैं?
Republic Day: इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो इस बार गणतंत्र दिवस के मौके पर मुख्य अतिथि होंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निमंत्रण पर 25 जनवरी 2025 को वो भारत की राजकीय यात्रा पर आएंगे। राष्ट्रपति के रूप में अपनी पहली भारत यात्रा के दौरान, प्रबोवो भारत के 76वें गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि भी होंगे।
उन्होंने अक्टूबर 2024 में पदभार ग्रहण किया था। भारतीय विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा है, कि "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर इंडोनेशिया गणराज्य के राष्ट्रपति महामहिम प्रबोवो सुबियांतो 25-26 जनवरी 2025 के दौरान भारत की राजकीय यात्रा पर आएंगे। राष्ट्रपति प्रबोवो भारत के 76वें गणतंत्र दिवस समारोह के मुख्य अतिथि भी होंगे।"

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति होंगे गणतंत्र दिवस के मुख्य अतिथि (President of Indonesia will be the chief guest of Republic Day)
पहले ऐसी रिपोर्ट आई थी, कि भारत की यात्रा के दौरान प्रबोवो सुबियांतो, पाकिस्तान दौरे पर भी जाएंगे, लेकिन भारत की तरफ से चिंता जताए जाने के बाद उन्होंने पाकिस्तान का दौरा रद्द कर दिया है। इससे पहले, जकार्ता ने इंडोनेशियाई राष्ट्रपति की नई दिल्ली यात्रा के बाद पाकिस्तान यात्रा की योजना बनाई थी, जिसकी जानकारी पाकिस्तानी मीडिया की तरफ से दी जा रही थी।
भारत में हर साल अपने गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में विश्व नेताओं को आमंत्रित करने की परंपरा है। पिछले साल फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मुख्य अतिथि बने थे, जबकि मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फत्ताह अल-सिसी 2023 में मुख्य अतिथि थे। COVID-19 महामारी के कारण 2021 और 2022 में कोई गणतंत्र दिवस मुख्य अतिथि नहीं था।
प्रबोवो सुबियांतो कौन हैं? (Who is Prabowo Subianto?)
प्रबोवो सुबियांतो, इंडोनेशिया की सेना के जनरल रह चुके हैं और उन्होंने पिछले साल देश में हुए राष्ट्रपति चुनाव में जीत हासिल की थी। उनका परिवार राष्ट्रीय नायक डिपोनेगोरो के वंशज होने का दावा करता है, जो मातरम सल्तनत के राजकुमार थे, जिन्होंने 19वीं शताब्दी में डच औपनिवेशिक ताकतों के खिलाफ जावा युद्ध विद्रोह का नेतृत्व किया था।
प्रबोवो के दादा इंडोनेशिया के पहले स्टेट बैंक के संस्थापक और इंडोनेशिया के स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख सदस्य थे। उनके पिता एक प्रमुख अर्थशास्त्री थे, जिन्होंने सरकार में वित्त मंत्री, व्यापार मंत्री और अनुसंधान मंत्री के रूप में कार्य किया। उनके भाई एक अमीर टाइकून है।
प्रबोवो भी लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीति में प्रखर रहे हैं और उन्हें एक ऐसे महत्वाकांक्षी सैन्य अधिकारी के तौर पर याद किया जाता है, जो ज्यादातर विशेष बलों (कोपासस) में कार्यरत था। प्रबोवो ने इंडोनेशिया के तानाशाहों की तरह शासन करने वाले पूर्व राष्ट्रपति सोहार्टो की बेटी से शादी की, जिसने उनकी राजनीति को तेजी से आगे बढ़ाया। प्रबोवो लेफ्टिनेंट जनरल के पद तक पहुंचे और अंत में, राजधानी जकार्ता में शक्तिशाली आर्मी स्ट्रैटेजिक रिजर्व (कोस्ट्राड) के कमांडर के प्रमुख पद पर पहुंचे।
हालांकि, उनके ऊपर मानवाधिकार उल्लंघन के भी आरोप लगते रहे हैं।
जब 1997 के वित्तीय संकट के बीच जैसे ही सोहार्टो का शासन लड़खड़ाने लगा, प्रबोवो अपने आलोचकों के खिलाफ सोहार्टो की सेना समर्थित और दमनकारी न्यू ऑर्डर शासन की रक्षा के लिए गुप्त अभियानों में शामिल हो गए। प्रबोवो की ब्रिगेड पर 20 से ज्यादा छात्र प्रदर्शनकारियों को अगवा करने और उन्हें बुरी तरह से टॉर्चर करने का आरोप लगा, जिनमें से 13 अभी भी लापता हैं, जिन्हें अब मृत मान लिया गया है। प्रबोवो ने अपहरण की बात स्वीकार कर ली थी, लेकिन किसी भी हत्या में शामिल होने से इनकार कर दिया था।












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