इंडोनेशिया में ज्वालामुखी पर भगवान गणेश की पूजा करने उमड़े श्रद्धालु, जानिए कौन हैं वो हिंदू आदिवासी?

रिपोर्ट के मुताबिक माउंट ब्रोमो के आसपास के करीब 30 गांवों में इस जनजाति के करीब एक लाख लोग रहते हैं। ये लोग खुद को हिंदू मानते हैं और टेंगर जनजाति के लोग खुद को मजापहित राजकुमारों के वंशज होने का दावा करते हैं।

जकार्ता, जून 27: दुनिया के दूसरे सबसे बड़े मुस्लिम देश इंडोनेशिया में शनिवार को सदियों पुराने धार्मिक समारोह यज्ञ, जिसे कसदा कहा जाता है, उसका आयोजन किया गया। इस उत्सव में भाग लेने के लिए इंडोनेशिया में रहने वाली हिंदू आदिवासी तेंगर जनजाति के लोग उमड़ पड़े। इस दौरान इन आदिवासियों ने देवताओं को मनाने के लिए पूर्वी जावा के प्रोबोलिंगगो में स्थित माउंट ब्रोमो ज्वालामुखी के गड्ढे में अनाज, सब्जियां, जानवर और अन्य खाद्य सामग्री डाल कर दी और फिर पूजा की। इस उत्सव में भाग लेने के लिए हर साल बड़ी संख्या में टेंगर आदिवासी माउंट ब्रोमो पर इकट्ठा होते हैं।

हिंदू हैं इंडोनेशिया के आदिवासी

हिंदू हैं इंडोनेशिया के आदिवासी

ये आदिवासी खुद को हिंदू मानते हैं और भगवान गणेश की पूजा करते हैं। इतना ही नहीं ये लोग बड़े-बड़े जालों के जरिए ज्वालामुखी के गड्ढे में डाले गए प्रसाद को भी पकड़ने की कोशिश करते हैं। ऐसा माना जाता है कि यहां स्थित गणेश जी की पूजा करने और ज्वालामुखी में फल और सब्जियां चढ़ाने से यह विस्फोट नहीं होता है और वे सुरक्षित रहते हैं। ब्रोमो ज्वालामुखी को सबसे पवित्र स्थानों में से एक माना जाता है। अगर यह फूटता है तो लोग मानते हैं कि भगवान उनसे काफी क्रोधित हैं।

एक लाख है आबादी

एक लाख है आबादी

रिपोर्ट के मुताबिक माउंट ब्रोमो के आसपास के करीब 30 गांवों में इस जनजाति के करीब एक लाख लोग रहते हैं। ये लोग खुद को हिंदू मानते हैं और टेंगर जनजाति के लोग खुद को मजापहित राजकुमारों के वंशज होने का दावा करते हैं। मजापहित साम्राज्य इंडोनेशिया में शासन करने वाला अंतिम भारतीय राजवंश था। 13वीं से 16वीं शताब्दी तक इस राजवंश ने पूर्वी जावा, जो इंडोनेशिया में है, वहां शासन किया था। इंडोनेशिया में उन्हें पारंपरिक रूप से पौराणिक रोरो एंटेंग और जोको सेगर के वंशज के तौर पर माना जाता है। ये लोग जावा की सबसे पुरानी मजापहित बोली बोलते हैं और इस बोली को टैंजर जावानीस के नाम से भी जाना जाता है। आज भी ये लोग अपन जिंदगी जंगल में जानवरों और पक्षियों के बीच बितात हैं और उन्हीं पर भोजने के लिए आश्रित रहते हैं।

ब्रह्मा, विष्णु, महेश की पूजा

ब्रह्मा, विष्णु, महेश की पूजा

इंडोनेशिया में रहने वाले टेंगर जनजाति में बड़ी संख्या में लोग हिंदू धर्म को मानते हैं। इसके अलावा वे बौद्ध धर्म और अन्य दूसरे स्थानीय धर्मों को भी मानते हैं। बाली के लोगों की तरह ही वे भी हिंदू और बौद्ध देवताओं के अलावा इडा सांग हयांग विडी वासा जिन्हें सर्वशक्तिमान भगवान कहा जाता है, उनकी पूजा करते हैं। इनमें त्रिमूर्ति ब्रह्मा, विष्णु, महेश और बुद्ध शामिल हैं। इस जनजाति के प्रमुख धार्मिक स्थलों में पुंडेन, पोटेन और डेनयांग शामिल हैं। पोटेन माउंट ब्रोमो के पास स्थित एक पवित्र क्षेत्र है और यहीं पर हर साल वार्षिक कसाडा महोत्सव का आयोजन किया जाता है। लोग पोडेन में अलग अस्थायी घर भी बनाते हैं, जिसमें वे कुछ दिन रुककर पूजा-अर्चना करते हैं।

आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना

आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना

इंडोनेशिया में रहने वाले ये आदिवासी लोग हिंदू परंपरा से काफी ज्यादा जुड़े हुए हैं। वे ब्रोमो पर्वत के जरिए अपने पूर्वजों की पूजा करते हैं। इसमें गांवों की स्थापना करने वाली आत्माएं, गांवों की रक्षा करने वाली आत्माएं और उनके पूर्वजों की आत्माएं शामिल होती हैं। इन आत्माओं को प्रसन्न और संतुष्ट करने के लिए विशेष पुजारियों द्वारा अनुष्ठान किए जाते हैं। इन संस्कारों के दौरान आत्माओं का प्रतिनिधित्व करने वाली छोटी गुड़िया जैसी आकृतियों को कपड़े पहनाए जाते हैं और खाने-पीने को कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि आत्माएं इन प्रसादों के सार का हिस्सा होती हैं। बुरी आत्माओं को भगाने के लिए ये लोग मांस चढ़ाते हैं। केले, आमतौर पर मांस और चावल, पत्तियों में लपेटे जाते हैं और कब्रिस्तानों, पुलों, सड़कों या सड़कों पर रख दिए जाते हैं।

इस्लाम में हो रहा है धर्म परिवर्तन

पाकिस्तान की तरह अब इंडोनेशिया में भी कट्टरपंथी ताकतें उभरने लगी हैं और उनकी नजर टेंगर जाति पर है। पिछले कुछ दशकों में टेंगर जनजाति के लोगों का शोषण काफी किया जाने लगा है। अपने क्षेत्र में अन्य धर्मों के लोगों की बढ़ती घुसपैठ के कारण जनसांख्या के अनुपात में तेजी से बदलाव आ रहा है। बाहरी लोग इस जनजाति के प्राकृतिक भंडार जैसे जंगल और पानी का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं। वहीं, करीब दस हजार टेंगर जनजाति के लोगों का इस्लाम में धर्मांतरण भी हो चुका है। इस्लामिक मिशनरी गतिविधि के कारण यहां के टेंगर जनजाति के लोगों ने भी अपनी संस्कृति और धर्म को बचाने के लिए बाली हिंदुओं से मदद ली है। इंडोनेशियाई सरकार ने टेंगर पर्वत को ब्रोमो-टेंगर-सेमेरु राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया और अब बाहरी लोगों के इन क्षेत्रों में बसने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

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