वैलेंटाइन डे के दिन इंडोनेशिया में होंगे चुनाव, ‘कातिल’ कहा जाने वाला कुख्यात शख्स बन सकता है राष्ट्रपति

14 फरवरी को जहां बाकी दुनिया में युवक-युवतियां वैलेंटाइन डे मना रहे होंगे वहीं मुस्लिम बहुल देश इंडोनेशिया में आधे से अधिक मतदाता जो कि युवा हैं इस दिन नई सरकार बनाने के लिए मतदान कर रहे होंगे।

इस दिन वे दुनिया के सबसे बड़े एक दिवसीय चुनाव में वे न केवल नए राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति को बल्कि संसदीय और स्थानीय प्रतिनिधियों को भी चुनेंगे। इंडोनेशिया में फिलहाल जोको विडोडो इंडोनेशिया के राष्ट्रपति हैं। 'जोकोवी' के नाम से लोकप्रिय विडोडो अपने दो कार्यकाल की अधिकतम सीमा पूरी कर चुके हैं।

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इंडोनेशिया में इस साल का चुनाव 10 वर्षों में नेतृत्व में पहला बदलाव होगा। दुनिया के तीसरे सबसे बड़े लोकतंत्रिक देश इंडोनेशिया में 575 संसदीय सीटें हैं। 20.5 करोड़ मतदाता हैं। आपको बता दें कि इस चुनाव में तीन उम्मीदवार राष्ट्रपति बनने की रेस में हैं। लेकिन सबकी नजरें राष्ट्रपति पद के दावेदार प्रोबोवो सुबिआंतो पर टिकी हुई हैं। वे पूर्व सैन्य जनरल रह चुके हैं और इस सरकार में रक्षा मंत्री रह चुके हैं।

72 वर्षीय सुबिआंतो तीसरी बार शीर्ष पद के लिए दौड़ रहे हैं। इससे पहले 2014 और 2019 में वे जोकोवी से हार चुके हैं। हालांकि इस चुनाव में वे लीड कर रहे हैं। सर्वेक्षणों में उन्हें बाकी दो प्रत्याशियों गांजर प्रणोवो और अनीस वसदेवन से आगे रखा गया है और राष्ट्रपति पद का प्रबल दावेदार बताया जा रहा है।

स्वतंत्र पोलस्टर इंडिकेटर पोलिटिक के सर्वेक्षण में सुबिआंतो को 51.8 प्रतिशत वोट मिलते हुए दिखाया गया है। दूसरे नंबर पर अनीस बासवेदन को 24.1 प्रतिशत वोट मिले हैं, जबकि मध्य जावा के पूर्व गवर्नर गंजर प्रणोवो को 19.6 प्रतिशत मत के साथ तीसरे स्थान पर दिखाया गया है।

सुबिआंतो एक राष्ट्रवादी, दक्षिणपंथी लोकलुभावन राजनीतिक दल गेरिंदरा के प्रमुख हैं। उन्हें गोल्कर और नेशनल मैंडेट पार्टी (पीएएन) सहित अन्य दलों के गठबंधन का समर्थन हासिल है।

Presidential candidate Prabowo Subianto

एक समय था जब सुबिआंतो का नाम अधिकांश इंडोनेशियाई लोगों को डरा देता था। उन पर 90 के दशक के अंत में 20 से अधिक लोकतंत्र समर्थक कार्यकर्ताओं के अपहरण का आरोप लगाया गया था। इसके अलावा उन पर पापुआ और पूर्वी तिमोर में भी मानवाधिकारों के हनन के आरोप लगे। वे इतने बदनाम हो गए कि अमेरिका ने भी उन्हें अपने देश में प्रवेश को लेकर प्रतिबंध लगा दिया।

हालांकि अब तक प्रबोवो सुबिआंतो ने किसी भी गलत काम से इनकार किया है। इंडोनेशिया की आपराधिक अदालत में भी उन पर आरोप नहीं लगाया जा सका। हालांकि कार्यकर्ताओं के लापता होने में उनकी कथित भूमिका के लिए उन्हें सेना से बर्खास्त कर दिया गया था। कुछ साल पहले सुबिआंतो ने अपहरण के आरोपों की बात स्वीकारी थी और कहा था कि वे सिर्फ सीनियरों के आदेशों का पालन कर रहे थे।

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हालांकि कुछ युवा प्रबोवे सुबिआंतो के राष्ट्रपति बनने को लेकर आशंकित भी हैं। एक युवा मतदाता ने नाम न छापने की शर्त पर बीबीसी से कहा, "मैं भयभीत हूं कि सुबिआंतो जीत जाएंगे। देश भर में उनकी छवि बदल दी गई है। हालांकि मुझे ऐसा लगता है कि 'क्यूटनेस'' शायद ही किसी योग्य नेता बनाती है। अगर आप ऐसा सोचते हैं कि एक नेता को ऐसा ही होना चाहिए, तो आपको बिल्ली के बच्चे का चुनाव करना चाहिए।"

गौरतलब है कि सुबिआंतो अपनी बिल्ली को लेकर भी काफी चर्चा में रहते हैं। बिल्लियाँ प्रबोवो के सोशल मीडिया अभियान का भी हिस्सा हैं। सुबिआंतो की भूरे और सफेद आवारा बॉबी का अपना खुद का सुव्यवस्थित इंस्टाग्राम अकाउंट है।

इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो साफ-सुथरे नेता माने जाते थे, लेकिन हाल में उनकी छवि पर बट्टा लगा है। उन पर अपने बेटे जिब्रान राकाबुमिंग राका के राजनीतिक करियर को सेट करने का आरोप है। 36 वर्षीय जिब्रान राकाबुमिंग इंडोनेशिया में उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार हैं। हालांकि जिब्रान का उपराष्ट्रपति पद तक का रास्ता भी विवादास्पद रहा है।

चुनावी नियमों के तहत, उन्हें अयोग्य होना चाहिए था क्योंकि राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति पद के लिए सभी उम्मीदवारों की आयु कम से कम 40 वर्ष होनी चाहिए। हालांकि अदालत के एक फैसले के कारण वे अयोग्य होने से बच गए हैं। यह अदालती निर्णय भी खूब चर्चित हुआ क्योंकि उस समय अदालत के प्रमुख राष्ट्रपति के बहनोई अनवर उस्मान थे।

गंजर प्रणोवो

राष्ट्रपति पद के दूसरे उम्मीदवार गंजर प्रणोवो मध्य जावा के 55 वर्षीय पूर्व गवर्नर हैं और इंडोनेशियाई डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ स्ट्रगल (पीडीआई-पी) के सदस्य हैं। पीडीआई-पी एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्रवादी राजनीतिक दल है, जिसने 2014 और 2019 में राष्ट्रपति पद के लिए जोकोवी का समर्थन किया था। इस दल का नेतृत्व मेगावती सुकर्णोपुत्री कर रही हैं जो कि इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति सुकर्णो की बेटी हैं।

अनीस बसदेवन

अनीस वसदेवन जकार्ता के पूर्व गवर्नर हैं और चुनाव में एक स्वतंत्र और "विपक्षी" उम्मीदवार के रूप में भाग ले रहे हैं। 54 वर्षीय ने अमेरिका में शिक्षा प्राप्त की, शिक्षा जगत में प्रवेश किया और बाद में शिक्षा मंत्री के रूप में राजनीति में चले गए। अनीस ने पूरे इंडोनेशिया में अधिक नौकरियाँ पैदा करने के लिए छोटे व्यवसाय मालिकों के लिए समान अवसरों को बढ़ावा देने का भी वादा किया है।

विजेता का निर्णय कैसे होता है?

राष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों को जीतने के लिए 50% से अधिक वोट हासिल करने होंगे। यदि कोई भी इसे हासिल नहीं कर पाता है, तो जून में शीर्ष दो उम्मीदवारों के बीच एक रन-ऑफ चुनाव आयोजित किया जाएगा।

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