जिन्हें हथौड़ा पकड़ना नहीं आता, उन्हें बिल्डिंग बनाने कैसे भेज दिया इजराइल? जानिए किस आधार पर होता है सलेक्शन?
Indian Workers in Israel: पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास के हमले के बाद एक लाख से ज्यादा फिलीस्तीनी कामगारों पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद इजराइल ने 'द्विपक्षीय रोजगार योजना' के तहत भारतीय मजदूरों को कंसट्रक्शन फील्ड में काम करने के लिए बुलाया था, लेकिन ये समझौता अब टूटने के कगार पर है।
इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट में कहा गया है, कि इसकी मुख्य वजह जिन मजदूरों को सलेक्ट किया गया था, उनमें वो काम करने की क्षमता ही नहीं है, जिन कामों के लिए उन्हें इजराइल बुलाया गया था। कामगारों को लेकर जरूरत से ज्यादा वादे किए गये, लेकिन उन मजदूरों ने काफी कम प्रदर्शन किया है।

जिसके बाद इजराइल ने भारत के साथ अपने मजदूत द्विपक्षीय संबंधों का लिहाज करते हुए उन्हें कंसट्रक्शन फील्ड से निकालकर उन्हें इंडस्ट्रियल सेक्टर में तैनात किया है, ताकि दोनों देशों के बीच "महत्वपूर्ण संबंधों" को "नुकसान" से बचाया जा सके।
इंडियन एक्सप्रेस ने जब इजराइली दूतावास से बात की, तो एक अधिकरी ने कहा, कि "वे इजरायली ठेकेदारों की शिकायतों और भारतीय मजदूरों की दूसरे जगहों पर तैनाती संबंधी नीति में बदलाव से वाकिफ हैं और उन्होंने कहा, कि दूतावास श्रमिकों की भर्ती में शामिल नहीं है।"
इजराइल में कैसे बेकार साबित हुए भारतीय मजदूर?
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, उसने इजराइल और भारत में श्रम-प्रदान करने वाले राज्यों के अधिकारियों, निर्माण अधिकारियों और वापस लौटे श्रमिकों से बात की है, जिसमें पाया गया, कि मजदूरों को जैसा काम बताकर भेजा गया, और जो काम करवाया गया, उसमें अंतर था, जिससे इस योजना पर सवालिया निशान उठ खड़े हुए हैं। वहीं, इससे भारतीय श्रमिकों को लेकर जो अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा थी, उसे भी गहरा धक्का लगा है।
आपको बता दें, कि जिन भारतीय मजदूरों को इजराइल भेजा गया है, तय कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक उन्हें हर महीने एक लाख 90 हजार रुपये वेतन देना तय किया गया था।
रिपोर्ट में कहा गया है, कि इस गड़बड़ी के बाद अब इजराइली अधिकारी 'इस प्रोसेस में सुधार' की जरूरत की तरफ इशारा कर रहे हैं, जबकि भारत में अधिकारी स्वीकार करते हैं, कि "सुधार की गुंजाइश है।"
जनशक्ति एजेंसियों का अनुमान है कि 500-600 श्रमिक, जिनमें से ज्यादातर सरकारी चैनलों के माध्यम से भर्ती किए गए थे, पहले ही घर लौट चुके होंगे।
किस आधार पर किया गया मजदूरों का चयन?
इजरायइली दूतावास के आंकड़ों के मुताबिक, दो "मार्गों" के जरिए 5000 कर्मचारियों की भर्ती की गई है। राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) द्वारा संचालित सरकार-से-सरकार (G2G) और विदेश मंत्रालय की देखरेख में की जाने वाली निजी एजेंसियों के माध्यम से व्यवसाय-से-व्यवसाय (B2B) तरीके द्वारा।
इंडियन एक्सप्रेस के मुताबक, NSDC ने भर्ती के पहले दौर में फ्रेमवर्क निर्माण और आयरन बेंडिंग के लिए 3,000-3,000 स्लॉट और प्लास्टरिंग और सिरेमिक टाइलिंग के लिए 2,000-2,000 पदों को सूचीबद्ध किया। इनके लिए हरियाणा, यूपी और तेलंगाना में "पेशेवर परीक्षण" के तीन दौर आयोजित किए गए। और इस आधार पर 4825 श्रमिकों का चयन किया गया।
लिहाजा, सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या इन भर्तियों में लापरवाही बरती गई है या फिर सिफारिश के आधार पर श्रमिकों का चयन किया गया है?
भारत की प्रतिष्ठा पर क्यों लगाया बट्टा?
इजराइली निर्माण अधिकारियों का कहना है, कि भारतीय श्रमिकों में अनुभव की कमी बहुत ज्यादा थी, खास तौर पर जी2जी मार्ग से जिन श्रमिकों का चुनाव किया गया उनमें। इजराइल में निर्माण उद्योग में विदेशी रोजगार एजेंसियों के संघ के अध्यक्ष एल्दाद नित्ज़ेन ने कहा, "जी2जी द्विपक्षीय मार्ग से बहुत कम उम्र के भारतीय श्रमिक आए, जिनमें से कई 20 साल के थे जिन्होंने कभी निर्माण क्षेत्र में काम नहीं किया था...वे खेती और बाल काटने जैसे कामों से आए थे, कुछ को तो हथौड़ा पकड़ना भी नहीं आता था।"
नित्ज़ेन ने कहा, कि जब बी2बी कामगारों का पहला जत्था आया तो नतीजे सकारात्मक थे। लेकिन मई तक, श्रमिकों की अकुशलता ने "भयानक" स्थिति पैदा कर दी थी।
उन्होंने कहा, कि "इजराइली बिल्डरों ने उन्हें निर्माण स्थलों पर काम करने से मना कर दिया... (इजराइली) सरकार ने आखिरकार हमें जी2जी कामगारों को अकुशल नौकरियों- कारखानों, सफाई, लोडिंग-अनलोडिंग आदि में रखने की अनुमति दे दी। भारतीय कामगारों की प्रतिष्ठा खराब हो गई, क्योंकि इजराइली बिल्डरों को नहीं पता कि कौन बी2बी है और कौन जी2जी। इस अनुभव के बाद, बिल्डर अकुशल भारतीय कामगारों को लाने से डर गए हैं और उन्होंने हमसे चीनी, मोल्दोवन और उज़्बेक और अन्य देशों के कामगारों को लाने के लिए कहा है। मैंने सुना है कि 500 से ज्यादा जी2जी कामगार भारत वापस चले गए हैं।"
इस स्थिति का असर ये हुआ है, कि मुंबई स्थित भर्ती कंपनी प्रोटेक इंजीनियरिंग के कार्यकारी निदेशक विशाल मेहरा ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा है, कि जी2जी श्रमिकों की "पराजय" के बाद, ठेकेदारों और ग्राहकों ने इस साल मई के बाद से 2000 से ज्यादा भारतीय श्रमिकों के वीजा और कॉन्ट्रैक्ट रद्द कर दिए हैं।












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