Indian Passport: पिछले 10 साल में गिरी या बढ़ी भारतीय पासपोर्ट की साख? कितने देश देते हैं वीजा फ्री एंट्री!
Indian Passport: भारत के नागरिकों के लिए अंतरराष्ट्रीय यात्रा की सुविधा में पिछले एक दशक के दौरान बड़ा सुधार देखने को मिला है। भारतीय पासपोर्ट अब पहले की तुलना में थोड़ी और बेहतर स्थिति में आया है। International Air Transport Association (IATA) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2013 में भारतीय पासपोर्ट धारकों को 52 देशों की यात्रा पर वीज़ा-फ्री या वीज़ा-ऑन-अराइवल सुविधा प्राप्त थी।
2014 से पहले जहां लगभग 38 देशों में वीज़ा ऑन अराइवल (Visa on Arrival) की सुविधा मिलती थी, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 45 देशों तक पहुंच चुकी है। इस सुधार का मुख्य कारण भारत की मजबूत वैश्विक कूटनीति, आर्थिक संबंधों और बढ़ते अंतरराष्ट्रीय प्रभाव को माना जा रहा है। आइए जानते हैं कि भारत ने कैसे और कितना सुधार किया है।

2014 से पहले की स्थिति
2014 से पहले भारतीय पासपोर्ट धारकों को केवल 38 से 40 देशों में वीज़ा ऑन अराइवल की सुविधा मिलती थी। इस अवधि में वीज़ा ऑन अराइवल सुविधा में लगभग 5-15 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यह भारतीय यात्रियों के लिए यात्रा की स्वतंत्रता की दिशा में एक अहम कदम था।
Henley Passport Index और अंतरराष्ट्रीय यात्रा रिपोर्टों के अनुसार, एशिया के कुछ देश जैसे नेपाल, भूटान, मालदीव, श्रीलंका, थाईलैंड और इंडोनेशिया भारतीय यात्रियों को वीज़ा ऑन अराइवल की अनुमति देते थे। वहीं अफ्रीका में केन्या, तंज़ानिया और मॉरीशस, और मध्य-पूर्व में जॉर्डन और ईरान जैसे देशों ने भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए सीधे प्रवेश की सुविधा दी हुई थी।
भारतीय पासपोर्ट की बढ़ती साख
साल 2025 में Henley Passport Index और भारत सरकार के गृह मंत्रालय के आंकड़ों को देखें तो, भारतीयों को अब 26 देशों में वीज़ा-फ्री और 40-45 देशों में वीज़ा-ऑन-अराइवल की सुविधा उपलब्ध है। इसका मतलब है कि कुल लगभग 85 देशों में भारतीय नागरिक बिना पूर्व वीज़ा के यात्रा कर सकते हैं। यह भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में निरंतर सुधार को दर्शाता है।

(स्रोत: Forbes India Travel Data)
भारत की विदेश नीति और कूटनीति
भारतीय पासपोर्ट की ताकत बढ़ने का सबसे बड़ा कारण भारत की विदेश नीति, आर्थिक व्यापार समझौते और मित्रतापूर्ण संबंध हैं। पिछले दशक में भारत ने कई देशों के साथ द्विपक्षीय यात्रा और पर्यटन समझौते किए हैं। भारत का बढ़ता टूरिज्म और व्यापार भी कई देशों के लिए लाभदायक साबित हुआ है।
एशिया और अफ्रीका के कई देश अब भारतीय यात्रियों को आकर्षित करने के लिए ऑन-अराइवल सुविधा दे रहे हैं, जिससे पर्यटन और व्यापार दोनों को बढ़ावा मिला है।
वैश्विक पासपोर्ट रैंकिंग में भारत की स्थिति
Henley Passport Index के अनुसार, साल 2024 तक भारत की वैश्विक पासपोर्ट रैंकिंग 83वीं रही, जबकि 2014 में यह 77वीं थी। हालांकि रैंकिंग में भी गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन यात्रा विकल्पों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।
कई देशों ने अब ई-वीज़ा और वीज़ा ऑन अराइवल दोनों सुविधाएं शुरू की हैं, जिससे भारतीय नागरिकों के लिए विदेश यात्रा पहले से कहीं आसान हो गई है।
साख बढ़ी या घटी
पिछले दस सालों में भारतीय पासपोर्ट की ताकत और पहचान में सुधार हुआ है। भारत की मजबूत विदेश नीति और कूटनीतिक संबंधों ने न केवल भारतीय यात्रियों के लिए नई राहें खोली हैं, बल्कि भारत को वैश्विक मंच पर एक भरोसेमंद यात्रा साझेदार के रूप में स्थापित किया है। लेकिन पासपोर्ट की रैंकिंग में गिरावट भी एक चिंता का कदम है।
इस एनालिसिस पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।












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