Special Report: भारतीय बाजार ने पकड़ी रफ्तार लेकिन पेट्रोल दे रहा है झटका, कैसे संभाले अर्थव्यवस्था?
भारतीय बाजार में पेट्रोल का डिमांड रिकार्ड स्तर पर है लेकिन खाड़ी देशों से सप्लाई कम हो गई है तो क्या पेट्रोल अभी और महंगा होने वाला है?
नई दिल्ली: कोरोना वायरस की वजह से पिछले साल देश में लॉकडाउन लगा रहा और मार्केट पूरी तरह से पटरी से उतर गया था। तमाम उद्योग बंद थे, MSME पर ताले लगे थे मगर नये साल में भारतीय बाजार का चक्का पूरी रफ्तार से चल पड़ा है लेकिन सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि अर्थव्यवस्था के ईंजन का ईंधन बार बार खत्म हो रहा है और पेट्रोल की कीमतें आसमान को छू रही हैं तो फिर आगे क्या होने वाला है? भारत के पास विकल्प क्या हैं और भारत अपनी डिमांड को पूरा करने के लिए क्या करें, इस बात पर तमाम दिग्गजों का मंथन जारी है।

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पेट्रोल की कीमत में अभी और इजाफा
पिछले साल लॉकडाउन और कोरोना गाइडलाइंस की वजह से मार्केट काफी सुस्त रहा। ज्यादातर उद्योग बंद थे और MSME सेक्टर भी लगातार नीचे जा रहा था। लेकिन अब जब भारत ने बहुत हद तक कोरोना संक्रमण पर काबू पा लिया है तब भारतीय उद्योग और भारतीय इंडस्ट्री फिर से तेज गति से आगे बढ़ने लगे है। भारत में इस साल पिछले साल के मुकाबले तेल की डिमांड में करीब 15% का उछाल आ चुका है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पेट्रोलियम पदार्थों का खरीददार देश भारत है और भारत अपनी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा कच्चा तेल मिडिल ईस्ट देशों जैसे सऊदी अरब, इराक और अमेरिका से खरीदता है। लेकिन, सऊदी अरब और इराक ने कच्चे तेल का उत्पादन कोरोना संक्रमण की वजह से काफी कम कर दिया है, जिसका सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ रहा है।
अब बात ये है कि भारत में पेट्रोलियम पदार्थों की बढ़ती डिमांड और गल्फ देशों में कच्चे तेल के उत्पादन में आई कमी का अफ्रीकन और नॉर्थ अमेरिकन देश कैसे फायदा उठाते हैं क्योंकि, नॉर्थ अमेरिका और नाइजीरिया उन कच्चे तेल का उत्पादन काफी ज्यादा करते हैं जिनमें गैसोलीन की मात्रा ज्यादा होती है, जिसकी बाजार में काफी ज्यादा डिमांड रहती है। खासकर पेट्रोल की मांग और भी ज्यादा इसलिए बढ़ गई है क्योंकि कोरोना संक्रमण के दौरान लोगों ने प्राइवेट गाड़ियों की तूलना में निजी ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल ज्यादा करना शुरू कर दिया है। लिहाजा भारत जैसे देशों में पेट्रोल और गैस की मांग काफी ज्यादा बढ़ गई है जिसका नतीजा महंगाई है।

FGE के साउथ एशिया हेड सेंथिल कुमारम कहते हैं कि गल्फ देशों ने पेट्रोलिमयम पदार्थों की सप्लाई उस वक्त काफी कम कर दी है, जब भारत जैसे देशों में पेट्रोलियम पदार्थों की डिमांड काफी ज्यादा बढ़ गई है। जिसकी वजह से कच्चे तेल की खरीददारी में काफी जद्दोजहद हो रही है।
भारत में दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक सरकारी कंपनी भारत पेट्रोलियम के फाइनेंस डायरेक्टर एन विजयगोपाल का कहना है कि 'भारत पेट्रोलियम ने इस साल 30% की तुलना में 45% ज्यादा तेल का उत्पादन कर दिया है और कंपन चाहती है कि पूरे साल 40% तेल का उत्पादन जारी रहे'। विजयगोपाल कहते हैं कि भारत पेट्रोलियम डिमांड को पूरा करने के लिए और उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
भारतीय तेल कंपनियों का रिकॉर्ड उत्पादन
भारतीय तेल कंपनियों ने बाजार की डिमांड को पूरा करने के लिए तेल का प्रोडक्शन काफी ज्यादा बढ़ा दिया है। BPCL ने जनवरी महीने में उत्पादन करीब 113% तक बढ़ा दिया है तो इंडियन ऑयल और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कोर्पोरेशन भी अपनी क्षमता से ज्यादा तेल उत्पादन कर रहे हैं। लेकिन, भारत में पेट्रोल और घरेलू गैस की डिमांड इतनी ज्यादा हो गई है, कि सप्लाई को पूरा करने के लिए तेल कंपनियों को संघर्ष करना पड़ रहा है। जबकि, डीजल और हवाई जहाजों के पेट्रोल की डिमांड अभी भी आधे से कम है।

भारत में जहां पेट्रोल और गैस की मांग रिकॉर्ड स्तर पर है, वहीं मिडिल इस्ट देशों में डीजल का उत्पादन ज्यादा हो रहा है। जबकि उत्तरी समुद्र्, नॉर्थ अमेरिका, वेस्ट अफ्रीका और अमेरिका से आने वाले कच्चे तेल में पेट्रोल और LPG की मात्रा ज्यादा होती है, लिहाजा भारत इन्हीं देशों से कच्चे तेल की खरीददारी को और बढ़ा रहा है। सराकीर रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले साल दिसंबर महीने में नाइजीरिया से कच्चे तेल का इम्पोर्ट 68% बढ़ चुका है तो अमेरिका से भारत ने 77% कच्चे तेल की खरीददारी और बढ़ा दी है।
हिंदुस्तान पेट्रोलियम के चेयरमैन मुकेश कुमारा सुराणा कहते हैं कि पेट्रोल की डिमांड अभी बाजार में लंबे वक्त तक ऐसे ही बनी रहेगी क्योंकि जो लोग अभी पब्लिक ट्रांसपोर्ट की जगह प्राइवेट कार का इस्तेमाल कर रहे हैं, वो अभी लंबे वक्त तक पब्लिक ट्रांसपोर्ट में वापस नहीं जाएंगे। जिसकी वजह से भारतीय तेल कंपनियों को तेल खरीदने के लिए या तेल उत्पादन बढ़ाने के लिए नये नये रास्ते और विकल्पों पर विचार करना होगा।
मई से पहले पेट्रोल सस्ता होने की उम्मीद नहीं!
रूस ने पिछले साल के मुकाबले कच्चे तेल के उत्पादन में करीब 9.7 मिलियन बैरल की कमी कर दी है क्योंकि, कोरोना वायरस की वजह से दूसरे देशों में डिमांड में कमी आ चुकी है। वहीं, सऊदी अरब ने फरवरी में कच्चे तेल का उत्पादन तो कम किया ही है साथ ही मार्च में भी सऊदी अरब कच्चे तेल का उत्पादन कम करने वाला है। लिहाजा, भारत को इससे सबसे बड़ा झटका लग रहा है। पिछले महीने पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने भी आशंका जताई थी कि सऊदी अरब की वजह से भारत में पेट्रोल की कीमतें काफी ज्यादा बढ़ने वाली हैं। माना जा रहा है कि अप्रैल से सऊदी अरब फिर से कच्चे तेल की सप्लाई बढ़ाएगा और तब मई के बाद भारत में पेट्रोल की कीमतों में राहत मिल सकती है।

इस बात की उम्मीद बेहद कम है कि OPEC+ देश इस वक्त डिमांड के मुताबिक सप्लाई करने के लिए कच्चे तेल के उत्पादन में बढ़ोतरी करने वाले हैं। इराक के पेट्रोलियम मंत्री इशान अब्दुल जब्बार ने कहा है कि '4 मार्च को OPEC+ देशों की मीटिंग होने वाली है, जिसमें कच्चे तेल का उत्पादन अभी कम ही रखने पर फैसला लिए जाने की उम्मीद है'। जिसके बाद अब तेल विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक भारतीय लोग अपनी निजी कार पर चढ़ेंगे और कुकिंग गैसा का ज्यादा इस्तेमाल होगा तबतक तो पेट्रोल की कीमत में कमी नहीं आने वाली है।
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