भारत ने दिए पाकिस्तान से व्यापारिक रिश्ते बहाल करने के संकेत, इंडियन डिप्लोमेट का लाहौर में बड़ा बयान
कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म करने के मोदी सरकार के फैसले के बाद तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत के साथ व्यापार बंद कर दिया था। जबकि, पाकिस्तान में भारत से व्यापार फिर शुरू करने की मांग होती रही है।

India-Pakistan Tie: भारत सरकार ने पाकिस्तान के साथ व्यापारिक रिश्ते फिर से बहाल करने के संकेत दिए हैं। लाहौर में भारतीय डिप्लोमेट ने शुक्रवार को कहा है, कि "भारत ने कभी भी पाकिस्तान के साथ व्यापार संबंधों को नहीं रोका है और व्यापार संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में आगे बढ़ना चाहता है"। पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान में भारत के उप उच्चायुक्त सुरेश कुमार ने लाहौर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (एलसीसीआई) में बोलते हुए कहा, कि "भारत हमेशा पाकिस्तान के साथ बेहतर संबंध चाहता है, क्योंकि हम अपना भूगोल नहीं बदल सकते हैं।"
डिल्पोमेट के बयान के मायने
भारतीय डिप्लोमेट ने व्यापारिक संबंधों को लेकर ये अहम बात उस वक्त कही है, जब पिछले कुछ सालों से भारत-पाकिस्तान के बीच व्यापारिक रिश्ते न्यूनतम हो चुके हैं और कश्मीर से अनुच्छेद 370 को खत्म करने के मोदी सरकार के फैसले के बाद, तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने भारत के साथ व्यापार रोक दिया था। हालांकि, बाद में पाकिस्तान के खराब आर्थिक हालातों के चलते, पाकिस्तान का व्यापारिक वर्ग लगातार भारत के साथ व्यापरिक रिश्ते को बहाल करने की मांग कर रहा है, लेकिन पब्लिक प्रेशर के चलते पाकिस्तान की सरकार ऐसा नहीं कर पाई। वहीं, अब जब भारतीय डिप्लोमट ने ट्रेड को लेकर ये बयान दिया है, तो सवाल उठ रहे हैं, कि क्या भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर से व्यापार बहाल होने वाला है? डॉन के मुताबिक, भारतीय डिप्लोमेट सुरेश कुमार ने कहा, कि "हम पाकिस्तान के साथ सामान्य संबंधों की ओर बढ़ना चाहते हैं। हमने पाकिस्तान के साथ व्यापार भी नहीं रोका, क्योंकि पाकिस्तान ने ही ऐसा किया था"। उन्होंने आगे कहा, कि "यह देखना बेहतर होगा, कि हम अपनी समस्याओं और स्थितियों को कैसे बदल सकते हैं।"
'पाकिस्तानियों को वीजा देता है भारत'
डॉन के मुताबिक, भारतीय डिप्लोमेट ने इस बात पर सहमति जताई, कि कोविड-19 महामारी के दौरान भारतीय दूतावास द्वारा पाकिस्तानियों को जारी किए जाने वाले वीजा की संख्या में कमी आई है। लेकिन, उन्होंने जोर देकर कहा, कि यह संख्या अब बढ़ गई है, क्योंकि हर साल 30,000 वीजा जारी किए जा रहे हैं, जो कि "एक बड़ी संख्या" है। सुरेश कुमार ने कहा, कि "भारत सरकार भी पाकिस्तानियों को मेडिकल और स्पोर्ट्स वीजा जारी कर रही है"। उन्होंने कहा, कि "वे दिन गए, जब कूटनीति राजनीतिक रिपोर्टों को संकलित करने पर ध्यान केंद्रित करती थी। आज की कूटनीति पर्यटन, व्यापार और टेक्नोलॉजी के इर्द-गिर्द घूमती है "और पैसा अपनी भाषा बोलता है"। उन्होंने कहा, कि "भारत वर्तमान में चीन के साथ 120 अरब डॉलर का व्यापार कर रहा है, जिसमें बैलेंस ऑफ ट्रेड चीन की तरफ है।" उन्होंने जोर देकर कहा, कि "आयात हमेशा गलत नहीं होते हैं और इसके फायदे भी होते हैं"।
"अर्थव्यवस्था की तरफ है भारत का ध्यान"
सुरेश कुमार ने कहा, कि भौतिक संपत्ति की तुलना में बौद्धिक संपदा अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। "दूर देशों में बैठकर और अन्य देशों में विनिर्माण करके, यूरोप बौद्धिक संपदा अधिकारों के कारण पैसा कमा रहा है।" उन्होंने कहा, कि "यूरोप में विश्वविद्यालय टेक्नोलॉजी पर ध्यान केंद्रित करते हैं।" उन्होंने कहा, कि "ट्रांजिट ट्रेड अत्यंत महत्वपूर्ण था, क्योंकि मध्य एशिया एक बड़ा बाजार था और भारत को इसकी पहुंच की आवश्यकता थी। इसी तरह मध्य एशिया को भी भारत तक पहुंच की जरूरत थी"। उन्होंने कहा, कि "भारत सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनने की राह पर है और हमारा सर्विस सेक्टर काफी बढ़ गया है। अब हम ऑटोमोबाइल और इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।" वहीं, एलसीसीआई के अध्यक्ष काशिफ अनवर ने कहा, कि आम तौर पर यह सोचा जाता था कि भारत और पाकिस्तान के बीच आर्थिक संबंधों में सुधार एक जटिल मुद्दा है, जिसके लिए कई राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक कारकों को संबोधित करने की आवश्यकता है। "लेकिन हमारा विचार है, कि भारत और पाकिस्तान के बीच आर्थिक संबंधों को सुधारने के लिए जो सबसे महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकता है, वह व्यापार संबंधों को सामान्य बनाना है। इससे दोनों देशों को समान रूप से पर्याप्त आर्थिक लाभ होगा।"












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