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भारत-उज्बेकिस्तान ने द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की, चाबहार बंदरगाह पर बनी ये सहमति

भारत-उज्बेकिस्तान विदेश कार्यालय परामर्श का 15वां दौर आज दिल्ली में आयोजित किया गया। यह वार्ता भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संपर्क बढ़ाने के कदमों और विशेष रूप से अधिक से अधिक आर्थिक सहयोग पर केंद्रित थी।

नई दिल्ली, 11 मईः भारत-उज्बेकिस्तान विदेश कार्यालय परामर्श का 15वां दौर आज दिल्ली में आयोजित किया गया। यह वार्ता भारत और उज्बेकिस्तान के बीच संपर्क बढ़ाने के कदमों और विशेष रूप से अधिक से अधिक आर्थिक सहयोग पर केंद्रित थी।

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परामर्श के दौरान, दोनों पक्षों ने राजनीतिक, आर्थिक, रक्षा, विकास साझेदारी, क्षमता निर्माण, ट्रेड इकोनॉमिक, विकास साझेदारी, और सांस्कृतिक सहयोग सहित विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की समीक्षा की। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान दोनों देशों के बीच व्यापार के लिए चाबहार बंदरगाह की पूरी क्षमता का दोहन करने पर सहमत हुए हैं। दोनों पक्षों ने अफगानिस्तान समेत पारस्परिक हित के क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।

मंत्रालय के अनुसार, दोनों पक्षों के बीच बातचीत मुख्य रूप से वृहद आर्थिक सहयोग और भारत एवं उज्बेकिस्तान के बीच सम्पर्क बढ़ाने के कदमों पर केंद्रित रही। दोनों देशों ने जनवरी 2022 में हुई प्रथम भारत-मध्य एशिया शिखर बैठक की समीक्षा की और इसके परिणामों को तेजी से लागू करने पर सहमति व्यक्त की। परामर्श की सह-अध्यक्षता संजय वर्मा, सचिव और उज्बेकिस्तान गणराज्य के विदेश मामलों के उप मंत्री फुरकत सिदिकोव ने की।

नहीं पड़ेगी पाकिस्तान जाने की जरूरत

ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित इस बंदरगाह को मध्य एशिया के लिए संपर्क के आधार के रूप में देखा जा रहा है। भारत, ईरान, उजबेकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए इस बंदरगाह को विकसित किया जा रहा है, क्योंकि पाकिस्तान ने अपनी सीमा से भारत से ईरान और अफगानिस्तान जाने की अनुमति देने से मना कर दिया है।

7200 किलोमीटर लंबा कोरिडॉर

चाबहार बंदरगाह ईरान के दक्षिणी तट पर सिस्तान-बलूचिस्तान प्रांत में स्थित है। भारत के पश्चिमी तट से यहां तक आसानी से पहुंचा जा सकता है और इसके लिए पाकिस्तान की सीमा में जाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। यह कोरिडोर 7,200 किलोमीटर लंबा है। इससे भारत, ईरान, अफगानिस्तान, अर्मेनिया, अजरबैजान, रूस, मध्य एशिया और यूरोप के बीच माल की ढुलाई में तेजी आएगी।

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