G20 को गेमचेंजर बनाने की तैयारी में मोदी सरकार, US के साथ मिलकर अरब देशों में ऐतिहासिक प्रोजेक्ट होगा लॉन्च!

India US Saudi Arabia Railroads Project: जी20 शिखर सम्मेलन को ऐतिहासिक बनाने की तैयारी पूरी तरह से मोदी सरकार ने कर ली है और समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने सूत्रों के हवाले से बताया है, कि भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, सऊदी अरब और कुछ अन्य देशों के नेता रेलमार्गों और बंदरगाहों से जुड़े संभावित बुनियादी ढांचे के सौदे पर बातचीत कर रहे हैं।

इस डेवलपमेंट से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, यह सौदा खाड़ी और दक्षिण एशिया के बीच व्यापार को फिर से व्यवस्थित कर सकता है, मध्य पूर्वी देशों को रेलवे से जोड़ सकता है और बंदरगाह द्वारा भारत से जोड़ सकता है। माना जा रहा है, चीन के बीआरआई प्रोजेक्ट को काउंटर करने के लिए मध्य-पूर्वी देशों में लांच किया गया ये एक विशालकाय प्रोजेक्ट हो सकता है।

India US Saudi Arabia Railroads Project

भारत- US-सऊदी का विशालकाय प्रोजेक्ट

सूत्रों ने कहा है, कि इस सप्ताह के ग्रुप ऑफ 20 (जी20) नेताओं की बैठक के मौके पर घोषणा के समय, चर्चाओं से कोई ठोस नतीजा निकल भी सकता है और नहीं भी, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात और यूरोप भी शामिल हैं। उन्होंने आगे कहा कि बातचीत महीनों से चल रही है लेकिन अभी भी इस मुद्दे पर तेजी से बातचीत जारी है।

I2U2 मीट के दौरान सबसे पहले इस विचार पर चर्चा हुई

रिपोर्टों के अनुसार, इस नए प्रोजेक्ट का कॉन्सेप्ट पिछले 18 महीनों में I2U2 नामक एक अन्य मंच पर हुई बैठकों के दौरान चर्चा की गई थी, जिसमें अमेरिका, इज़राइल, यूएई और भारत शामिल हैं।

I2U2 समूह की स्थापना 2021 के अंत में महत्वपूर्ण मध्य पूर्वी बुनियादी ढांचे की पहल के बारे में बात करने और चीन के बढ़ते क्षेत्रीय प्रभाव पर रोक लगाने के लिए की गई थी। इज़राइल ने पिछले वर्ष I2U2 बैठकों के दौरान, इस क्षेत्र को रेलवे के माध्यम से जोड़ने का विचार उठाया था।

सूत्रों ने कहा है, कि रेल नेटवर्क के विस्तार के विचार का एक हिस्सा, ऐसी बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर भारत की विशेषज्ञता का उपयोग करना था।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन नई दिल्ली में जी20 सम्मेलन के लिए आज पहुंच रहे हैं, जहां वह प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने वाले हैं और सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान के साथ भी बातचीत कर सकते हैं, जिसमें रेल नेटवर्क पर अहम बातचीत होने की संभावना है।

चीन के बेल्ट एंड रोड वैश्विक बुनियादी ढांचे के दबाव का मुकाबला करने के लिए, बाइडेन, वाशिंगटन को जी20 में विकासशील देशों, खासकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक निवेशक के लिए एक वैकल्पिक भागीदार के रूप में पेश कर रहे हैं।

यह प्रोजेक्ट उस वक्त पेश किया गया है, जब बाइडेन प्रशासन मध्य पूर्व में एक व्यापक राजनयिक समझौते की तलाश में है, जिसके तहत सऊदी अरब इज़राइल को मान्यता देगा। बहु-देशीय बुनियादी ढांचे सौदे पर बातचीत की रिपोर्ट सबसे पहले एक्सियोस द्वारा दी गई थी।

मई में की गई थी अहम बातचीत

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने इसी साल मई महीने में सऊदी अरब में अमेरिका, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात के अपने समकक्षों से मुलाकात की थी। इस बातचीत में सऊदी अरब और यूएई को रेल नेटवर्क के जरिए बंदरगाहों से जोड़ना, जिससे ये बंदरगाहों से शिपिंग लेन के जरिए भारत से भी जुड़ेगा, इसको लेकर अहम बातचीत की गई थी।

वहीं, व्हाइट हाउस की तरफ से भी उस वक्त जारी बयान में कहा गया था, कि अमेरिका के एनएसए जैक सुलिवन, भारत के एनएसए अजीत डोभाल और यूएई के एनएसए शेख तहनून बिन जायद अल नाहयान ने रियाद में सऊदी अरब के प्रधानमंत्री प्रिंस सलमान के साथ बैठक की थी, जिसमें मिडिल ईस्ट को भारत और दुनिया से जोड़ने को लेकर बातचीत की गई थी।

इस प्रोजेक्ट में भारत का काम रेल निर्माण में अपनी विशेषज्ञ का इस्तेमाल करना है, क्योंकि भारत के पास विशालकाय रेल नेटवर्क बनाने में अपार एक्सप्रिएंस है।

क्या है सऊदी-UAE में रेल प्रोजेक्ट?

नई दिल्ली के सूत्रों ने कहा था, कि अजीत डोभाल की बैठक सऊदी अरब, यूएई और अमेरिका के एनएसए से हुई थी। इस बैठक में इस विशालकाय रेल प्रोजेक्ट को लेकर बातचीत की गई। इस रेल नेटवर्क को दोनों देशों के सड़कों और समुद्रों से जोड़ा जाएगा।

अमेरिका की इस परियोजना के जरिए रेलवे, समुद्री और सड़क नेटवर्कों का इस्तेमाल करते हुए पश्चिम एशियाई देशों को, जिसे अमेरिका मध्य-पूर्व कहता है, जोड़ा जाएगा।

इसके साथ ही समुद्री रास्ते के जरिए इसे दक्षिण एशिया से जोड़ा जाएगा। चीन इस क्षेत्र में बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के जरिए मध्य-पूर्व के देशों में तेजी से अपना कदम बढ़ा रहा है, जिसमें भी सड़क, रेलवे और बंदरगाहों का निर्माण करना है, लेकिन अमेरिका चाहता है, कि वो अपनी परियोजना को जल्दी लागू करे, ताकि उसे कम्युनिकेशन चैनल स्थापित करने में मदद मिले।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि दिल्ली के सूत्रों ने बताया है, कि भारतीय पक्ष इस परियोजना में भाग लेने का इच्छुक है, क्योंकि यह भारत की तीन रणनीतिक उद्देश्यों को पूरा करता है।

क्या हैं भारत के तीन रणनीतिक उद्येश्य

सबसे पहले, बीजिंग ने पश्चिम एशियाई क्षेत्र में अपने राजनीतिक प्रभाव के क्षेत्र का विस्तार किया है, जिसे दिल्ली "मिशन रेंगना" के रूप में देखता है।

इसी साल सऊदी अरब और ईरान के बीच राजनीतिक संबंधों की अचानक बहाली ने भारत को चौंका दिया है। इस क्षेत्र में भारत से भारत के काफी हित जुड़े हुए हैं, लिहाजा चीन का प्रभाव बढ़ने से भारतीय हितों पर खतरा पैदा हुआ है। यह पूरा क्षेत्र, भारत की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर भी काफी महत्वपूर्ण है।

लिहाजा, अगर भारत इस रेल योजना का हिस्सा बनता है, तो भारत के लिए कनेक्टिविटी बढ़ जाएगी और भारत तक काफी जल्दी सामान आ पाएगा। वहीं, इस नेटवर्क के स्थापना होने के बाद कच्चे तेल की तेज आवाजाही शुरू हो जाएगी और लंबी अवधि में भारत की लागत को कम करेगी। कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने से भारत के उन 80 लाख नागरिकों को भी मदद मिलेगी, जो खाड़ी क्षेत्र में रहते हैं और काम करते हैं।

दूसरा, यह परियोजना भारत को रेलवे क्षेत्र में एक बुनियादी ढांचा निर्माता के रूप में अपना अलग ब्रांड बनाने में मदद करेगी। अपने देश में एक मजबूत रेल नेटवर्क की शेखी बघारने और श्रीलंका में इस तरह के बुनियादी ढांचे के निर्माण में सफलता हासिल करने के बाद उत्साहित भारत को विदेशों में भी ऐसा करने का विश्वास है।

भारत चाहता है, कि निजी कंपनियों के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां भी, मध्य-पूर्व में संभावित आर्थिक और बुनियादी ढांचे के अवसरों का पता लगाएं। इसका चीनी बेल्ट एंड रोड परियोजना का मुकाबला करने पर भी प्रभाव पड़ेगा।

तीसरा, भारत सरकार को लगता है, कि पाकिस्तान बार बार जमीनी ट्रांजिट रूट को बंद करके भारत को परेशान करने की कोशिश करता है, जिससे भारत का अपने पश्चिमी पड़ोसियों से संपर्क लंबे समय तक सीमित रहा है। इसलिए, दिल्ली पश्चिम एशियाई बंदरगाहों तक पहुंचने के लिए शिपिंग मार्गों का उपयोग करना चाहती है।

इनमें ईरान में भारत के बनाए चाबहार बंदरगाह और बंदर-ए-अब्बास (ईरान), डुक्म (ओमान), दुबई (यूएई), जेद्दा (सऊदी अरब) और कुवैत सिटी शामिल हैं। ये रेल नेटवर्क गल्फ और अरब देशों के बीच से गुजरेगी, लिहाजा ये भारत के लिए गल्फ और अरब देशों तक आसानी से पहुंचने के अवसरों को खोलती है।

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