पिछले साल किया था सीक्रेट टेस्ट, अब सीना ठोककर समुद्र में भारत दागेगा वो मिसाइल.. क्यों रोए विदेशी अखबार?
India to Test sub-fired missile: ऐसी रिपोर्ट है, कि भारत अगले महीने पनडुब्बी से लॉंच होने वाली क्रूज मिसाइल का submarine-launched cruise missile (SLCM) का परीक्षण करने वाला है और परीक्षण से पहले ही विदेशी मीडिया रिपोर्ट्स में लिखा जा रहा है, कि भारत का ये प्रेक्षपण क्षेत्रीय हथियार रेस को और तेज कर सकता है।
भारत ने पिछले साल फरवरी महीने में भी इस मिसाइल की सीक्रेट टेस्ट किया था, जिसका खुलासा 10 महीने बाद नवंबर में एक प्रदर्शनी के दौरान हुआ था, लेकिन अब भारत ने सार्वजनिक तौर पर SLCM मिसाइल का टेस्ट करने का फैसला किया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, भारत SLCM मिसाइल का टेस्ट अगले महीने मार्च में करने वाला है और इसकी जानकारी पहले ही पाकिस्तान को दी जा चुकी है।
एशिया टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, कि SLCM मिसाइल का टेस्ट भारतीय नौसैनिकों की क्षमता को कई गुना बढ़ा देगा और ये काफी अत्याधुनिक क्रूज मिसाइल है, जिसे पनडुब्बी से फायर करने के लिए बनाया गया है और पाकिस्तान के मुकाबले रणनीतिक डेटरेंट और हिंद महासागर में चीन के साथ बढ़ती प्रतिस्पर्धा की दिशा में, भारत का एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि, एशिया टाइम्स ने लिखा है, कि पाकिस्तान को चूंकी पहले ही इसकी जानकारी दी जा चुकी है, जिससे तनाव को कम करने में मदद मिलेगी।
अगले महीने भारत टेस्ट करेगा नई मिसाइल
कई मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है, कि भारत मार्च महीने में अपने पूर्वी तट से 500 किलोमीटर की रेंज वाले SLCM मिसाइल का परीक्षण करने वाला है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने इस मिसाइल का निर्माण किया है और प्रोजेक्ट 75 इंडिया के तहत भारतीय नौसेना के स्वदेशी रूप से निर्मित पारंपरिक पनडुब्बियों (SSK) को इस मिसाइस से लैस किया जाएगा।
प्रोजेक्ट 75 इंडिया, जिसे कलवरी-क्लास SSK के नाम से भी जाना जाता है, वो एक फ्रांसीसी-डिजाइन वाला स्कॉर्पीन SSK है। भारतीय बेड़े में ऐसी 5 पनडुब्बियां हैं, जिसे बढ़ाकर 9 करने की तैयारी चल रही है।
भारत की नई SLCM के दो वेरिएंट हैं: लैंड अटैक क्रूज़ मिसाइल (LACM)) और एंटी-शिप क्रूज़ मिसाइल (ASCM)। दोनों में थ्रस्ट वेक्टर कंट्रोल, इन-फ़्लाइट विंग डिप्लॉयमेंट और इन-फ्लाइट इंजन स्टार्ट जैसी टेक्नोलॉजी शामिल हैं।
पूरी तरह से परीक्षण और भारतीय सेना में शामिल होने के बाद SLCM को मित्र देशों को बेचे जाने की भी उम्मीद है।
मिसाइल थ्रेट की रिपोर्ट के मुताबिक, इसकी क्षमताएं निर्भय ग्राउंड-लॉन्च क्रूज़ मिसाइल (GLCM) के समान हैं, जिसमें 450 किलोग्राम पेलोड और 800 से 1,000 किलोमीटर की रेंज है।
निर्भय मिसाइल उच्च विस्फोटक हथियार या 12-किलोटन परमाणु हथियार ले जा सकता है। यह एक ठोस ईंधन बूस्टर मोटर से लैस है, जिसे लॉन्च के तुरंत बाद बंद कर दिया जाता है और फिर मैक 0.65 की रफ्तार के साथ टर्बोजेट इंजन में बदल जाता है।
मार्च 2013 में, ब्रह्मोस एयरोस्पेस ने बताया था, कि ब्रह्मोस एसएलसीएम को विशाखापत्तनम के बंगाल की खाड़ी में एक जलमग्न मंच से सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया था। ब्रह्मोस एयरोस्पेस का कहना है कि मिसाइल ने अपने जलमग्न प्लेटफॉर्म से पहले डायरेक्ट ऊपर उड़ान भरी और 290 किलोमीटर की अपनी पूरी रेंज के लिए अपने लक्ष्य को फॉलो किया।
दो तरह के ले जा सकते हैं वारहेड्स
Submarine-launched cruise missile (SLCM) में दो तरह की मुख्य क्षमताएं हैं, एक क्षमता है सी-स्किमिंग और दूसरी क्षमता है टेरेन हंगिग कैपेबिलिटी। जिसका मतलब ये हुआ, कि लॉांच करने के बाद ये मिसाइस समुद्र में पानी से काफी ऊंचाई पर उड़ान भरती है, जिसकी वजह से रडार इसे डिटेक्ट नहीं कर पाते हैं।
इसके अलावा, दो तरह के वारहेड इसमें लगाए जा सकते हैं। एक वारहेड प्रेसिशन-कम ब्लास्ट, जो बंकरों और दुश्मनों के रणनीतिक ठिकानों को उड़ाने के लिए काम में लाए जा सकते हैं और दूसरा वारहेड है एयरबर्स्ट, जो कमजोर परत वाले दुश्मनों के टारगेट को उड़ाने के लिए डिजाइन किया गया है।

SRBM और MRBM के साथ SLCM का इस्तेमाल भारत युद्ध शुरू होने के साथ ही कर सकता है, ताकि दुश्मन के रणनीतिक ठिकानों, जैसे लॉजिस्टिक हब, कमांड सेंटर्स, एयरफील्ड्स और कम्युनिकेशन सेंटर्स को तबाह किया जा सके।
दूसरे सैल्वो का लक्ष्य हवाई सुरक्षा, तोपखाने के टुकड़ों, मिसाइल अड्डों और टैंक संरचनाओं को नष्ट करना होगा, जिसमें रॉकेट और बंदूक तोपखाने के हमलों से आगे तैनात पदों पर सैनिकों को खत्म करना होगा।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत सरकार का लक्ष्य तीनों सेनाओं को निर्भय मिसाइलों की अलग अलग कैटोगिरी से लैस करना है, जिसकी क्षमता 1 हजार किलोमीटर से ज्यादा है। (सभी तस्वीरें- फाइल)












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