Defence News: USA को सबसे ज्यादा हथियार बेचता है भारत, फिर इजराइल, जानिए भारतीय आर्म्स खरीदने वाले TOP-10 देश

India's Defense Export: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' कार्यक्रमों का अब असर दिखने लगा है और भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट (India Defence Export) वित्त वर्ष 2023-24 में 21,083 करोड़ रुपये (2.5 अरब डॉलर) तक पहुंच गया है।

वहीं, भारत सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2028-29 के अंत तक 50,000 करोड़ रुपये (6 अरब टडॉलर) का रक्षा निर्यात हासिल करना है। 14 जून 2024 को रक्षा मंत्री के रूप में लगातार दूसरे कार्यकाल के लिए कार्यभार संभालने वाले राजनाथ सिंह ने भारतीय रक्षा निर्यात के लिए एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।

India s Defense Export

भारतीय रक्षा मंत्री (Indian Defence Minister) ने कहा, कि "वित्त वर्ष 2023-24 में डिफेंस एक्सपोर्ट ने रिकॉर्ड 21,083 करोड़ रुपये को छू लिया है। यह ऐतिहासिक था। हमारा लक्ष्य 2028-2029 तक 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा मूल्य के रक्षा उपकरण निर्यात करना होगा।"

साल 2014 में सत्ता में आने के बाद से, नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने मित्र देशों को भारतीय रक्षा निर्यात (India Defence Export) को बढ़ावा देने को प्राथमिकता दी है और भारतीय डिफेंस एक्सपोर्ट प्रधानमंत्री मोदी की प्रमुख पहलों, "मेक इन इंडिया" और "आत्मनिर्भर भारत" के मुताबिक ही है।

भारतीय डिफेंस एक्सपोर्ट का रिकॉर्ड कारोबार

भारत सरकार ने पूरी प्लानिंग के साथ अपने डिफेंस एक्सपोर्ट को बढ़ावा दिया है, खासकर अपनी क्षमताओं का पता लगाया गया है। रक्षा मंत्रालय ने जो आंकड़े जारी किए हैं, उसके मुताबिक वित्त वर्ष 2013-14 में भारतीय रक्षा निर्यात का मूल्य 686 करोड़ रुपये (80 मिलियन डॉलर) था। वहीं, मोदी सरकार के 10 वर्षों के कार्यकाल के बाद, रक्षा निर्यात का मूल्य 21,083 करोड़ रुपये (2.5 अरब डॉलर) तक पहुच गया, जो 30 गुना से ज्यादा है।

हालांकि, भारत डिफेंस एक्सपोर्ट ने तेज छलांग लगाई है, लेकिन अगले पांच सालों में भारत सरकार ने अपने डिफेंस एक्सपोर्ट के लिए नई सीमा तय की हैं।

फिलहाल भारत दुनिया भर के 84 देशों को सैन्य उपकरणों का निर्यात करता है, जिनमें ऑस्ट्रेलिया, बेल्जियम, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इजराइल, इटली, जापान, दक्षिण कोरिया, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड, सऊदी अरब, स्विट्जरलैंड, ताइवान, यूएई, यूके, यूएसए आदि जैसे हाई इनकम वाले देश शामिल हैं।

अमेरिका को सबसे ज्यादा हथियार बेचता है भारत

जनवरी 2023 में भारतीय रक्षा मंत्रालय मे जो आंकड़े जारी किए, उसके मुताबिक अमेरिका, भारतीय सैन्य उपकरणों के लिए सबसे बड़ा बाजार बन गया है। अमेरिका, भारत से बुलेट-प्रूफ जैकेट, हेलमेट, फायरआर्म्स के पूर्जे, कवच-ढाल उपकरण, इलेक्ट्रॉनिक्स, उप-प्रणालियां और एयरो घटक खरीदता है।

जिन भारतीय कंपनियों से अमेरिका हथियार खरीदता है, वे हैं एवेंटेल, बोइंग इंडिया, कमिंस टेक्नोलॉजीज इंडिया, फोकर एल्मो सैस्मोस इंटरकनेक्शन सिस्टम्स, जीकेएन एयरोस्पेस इंजन सिस्टम्स इंडिया, गुडरिच एयरोस्पेस सर्विसेज, इंडो एमआईएम, इनमेट टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस, एमकेयू, रॉकवेल कॉलिन्स इंडिया एंटरप्राइजेज, रॉसेलटेकसिस, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स, टाटा बोइंग एयरोस्पेस और वेमटेक्नोलॉजीज।

अमेरिका के बाद इजराइल का स्थान

रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, इजरायल बड़ी संख्या में भारतीय हथियार खरीदता है। जिसमें बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट, आग्नेयास्त्रों के पुर्जे और घटक, बैटरी, सब-सिस्टम शामिल हैं।

इजरायल को हथियार निर्यात करने वाली कंपनियां हैं पीएलआर सिस्टम्स, कल्याणी राफेल एडवांस्ड सिस्टम, इंडो एमआईएम, अल्फा-एलसेक डिफेंस एंड एयरोस्पेस सिस्टम्स, लोटस एविएशन टेक्नोलॉजी, डेफसिस सॉल्यूशंस, अदानी-एलबिट, एडवांस्ड सिस्टम्स, डीसीएक्स केबल टेक्नोलॉजीज, एसिनोटेक मैन्युफैक्चरिंग, अल्फा डिजाइन टेक्नोलॉजीज, लार्सन एंड टुब्रो, विप्रो एंटरप्राइजेज, एचबीएल पावर सिस्टम्स, गोदरेज एंड बॉयस, एस्ट्रा माइक्रोवेव प्रोडक्ट्स, एस्ट्रा राफेल कॉमसिस और बीएफ एल्बिट एडवांस्ड सिस्टम्स।

तीसरे नंबर पर UK का स्थान

भारतीय सैन्य उपकरण निर्माताओं के लिए ब्रिटेन एक महत्वपूर्ण निर्यात गंतव्य है। भारत जिन हथियार उपकरणों को यूके को बेचता है, वो बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट, इलेक्ट्रॉनिक्स, सब-सिस्टम, एयरो कंपोनेंट और इंजीनियरिंग सेवाएं शामिल हैं। भारतीय हथियार निर्माताओं में कमिंस टेक्नोलॉजीज इंडिया, गुडरिक एयरोस्पेस सर्विसेज, लार्सन एंड टुब्रो, महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स, माइक्रोन इंस्ट्रूमेंट्स और टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स शामिल हैं।

फ्रांस भी खरीदता है भारतीय हथियार

भारत का एक प्रमुख सैन्य और कूटनीतिक सहयोगी फ्रांस, भारतीय हथियारों के शीर्ष खरीदारों में से एक रहा है। फ्रांस ने भारत से आग्नेयास्त्र घटक, बैटरी और एयरोस्पेस कंपोनेंट्स खरीदे हैं। फ्रांस को सैन्य उपकरण निर्यात करने वाली भारतीय कंपनियों में डसॉल्ट रिलायंस एयरोस्पेस, गोदरेज एंड बॉयस, गुडरिच एयरोस्पेस सर्विसेज, हैदराबाद प्रिसिजन मैन्युफैक्चरिंग, महिंद्रा एयरोस्ट्रक्चर, माइक्रोन इंस्ट्रूमेंट्स, एमकेयू, सफ्रान इलेक्ट्रिकल एंड पावर इंडिया, सैस्मोस एचईटी टेक्नोलॉजीज और टाइटन इंजीनियरिंग एंड ऑटोमेशन शामिल हैं।

पांचवे नंबर पर जर्मनी

यूरोपीय संघ (EU) की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था जर्मनी भी भारतीय हथियार निर्माताओं के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य है। यह भारत से बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट, कवच-ढाल उपकरण और आग्नेयास्त्र घटक खरीदता है। इन निर्यातों में शामिल कंपनियां हैं एमकेयू, इंडो एमआईएम, ग्रिंडवेल नॉर्टन, माइक्रोन इंस्ट्रूमेंट्स और मर्सिडीज-बेंज रिसर्च एंड डेवलपमेंट इंडिया।

छठवें नंबर पर दोस्त UAE

यूएई ने भारत से बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट, गोला-बारूद, आग्नेयास्त्र घटक और बैटरियां खरीदी हैं। यूएई को सैन्य उपकरण निर्यात करने वाली कंपनियों में ऑर्डनेंस फैक्ट्री बोर्ड, इंडो एमआईएम, एसिनोटेक मैन्युफैक्चरिंग, एमकेयू, एचबीएल पावर सिस्टम्स और इंडियन आर्मर सिस्टम्स शामिल हैं।

सातवें नंबर पर नीदरलैंड

नीदरलैंड भी भारतीय सैन्य उपकरणों की एक बड़ी मात्रा खरीदता है। यूरोपीय संघ का यह देश भारत से बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट, सबसिस्टम, एयरो कंपोनेंट, फ्यूजलेज स्ट्रक्चर, आर्मरिंग और इंजीनियरिंग सेवाएं आयात करता है। नीदरलैंड को उपकरण निर्यात करने वाली कंपनियों में महिंद्रा एयरोस्ट्रक्चर, एयरोस्ट्रक्चर मैन्युफैक्चरिंग इंडिया, जीकेएन एयरोस्पेस इंजन सिस्टम इंडिया, एसएम कैरापेस आर्मर और लक्ष्मी मशीन वर्क्स शामिल हैं।

फिलीपींस ने खरीदे हैं ब्रह्मोस

चीन के विरोधी देशों को हथियार मुहैया कराने के लिए भारत ने पिछले कुछ सालों में फिलीपींस को हथियारों की बिक्री बढ़ा दी है। दक्षिण-पूर्व एशियाई देश ने भारत से बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट, आग्नेयास्त्रों के पुर्जे और ब्रह्मोस मिसाइल का आयात किया है। एमकेयू, इनमेट टेक्नोलॉजी सॉल्यूशंस, इंडो एमआईएमआई, एनएनएफ टेक्नोलॉजीज और ब्रह्मोस एयरोस्पेस ऐसी कंपनियां हैं जिन्होंने फिलीपींस को सैन्य हार्डवेयर निर्यात किया है।

नौवें नंबर पर श्रीलंका

भारत ने अपनी "पड़ोसी पहले" नीति के तहत श्रीलंका को महत्वपूर्ण सैन्य उपकरण प्रदान किए हैं। भारतीय निर्यात में बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी और ऑफ-शोर गश्ती जहाज शामिल हैं। इन निर्यातों में शामिल भारतीय कंपनियां एचबीएल पावर सिस्टम्स, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, एमकेयू और गोवा शिपयार्ड हैं।

दसवें नंबर पर सऊदी अरब

दोनों देशों के बीच घनिष्ठ संबंधों के परिणामस्वरूप, भारत ने सऊदी अरब को हथियार और अन्य सैन्य उपकरण भी निर्यात किए हैं। निर्यात में नाइट-विजन दूरबीन, बुलेट-प्रूफ जैकेट और हेलमेट, कवच ढाल और बम शामिल हैं। निर्यात में शामिल भारतीय कंपनियां एमकेयू, माइक्रोन इंस्ट्रूमेंट्स, इंडियन आर्मर सिस्टम्स और ग्रिंडवेल नॉर्टन हैं।

किन हथियारों को बेचने में है भारत का वर्चस्व

भारतीय रक्षा निर्यात में गैर-प्रमुख प्रौद्योगिकी-आधारित उत्पादों का वर्चस्व है। विमान, मिसाइल और युद्धपोत जैसे प्रमुख तकनीकी उत्पादों की तुलना में ये उपकरण कम लागत वाले हैं। 50,000 करोड़ (6 अरब डॉलर) के लक्ष्य को पूरा करने के लिए, भारत को उच्च-स्तरीय उत्पादों का निर्यात करना होगा।

भारत लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस, एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टर (ALH) ध्रुव, लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर (LCH), प्रचंड, लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर (LUH), ब्रह्मोस, आकाश, पिनाका जैसी मिसाइल/रॉकेट आदि जैसे प्रमुख स्वदेशी हथियारों को बेचने की कोशिश कर रहा है और इन हथियारों की बिक्री शुरू होने के बाद भारतीय निर्यात तेजी से बढ़ेगा।

ब्रह्मोस और पिनाका ने फिलीपींस और आर्मेनिया से ऑर्डर हासिल करने में कामयाबी हासिल की है, लेकिन नई दिल्ली अर्जेंटीना और नाइजीरिया सहित अन्य देशों को तेजा और उसके हेलिकॉप्टर जैसे अन्य प्लेटफार्मों को बढ़ावा देना जारी रखे हुए है। लिहाजा, कहा जा सकता है, कि भारत तेजी से अपने लक्ष्य की तरफ बढ़ रहा है और आने वाले वर्षों में भारत हथियार बेचने की दिशा में भी अपना रूतबा कायम करेगा।

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