हिंद महासागर की पहरेदारी में भारत ने झोंकी ताकत, मालदीव और श्रीलंका के साथ प्रोजेक्ट SAGAR पर काम तेज
हिंद महासागर को लेकर पिछले हफ्ते इंडियन नेवी चीफ ने कहा था, कि चीन के लगातार कई जहाज इंडियन ओसियन में रहते हैं और चीनी रिसर्च जहाज भारत के लिए चिंता पैदा करता है।

India-Maldives Ties: हिंद महासागर को चीन से बचाने के लिए अब भारत ने पहरेदारी काफी तेज कर दी है और इस कड़ी में हिंद महासागर के अपनो दोनों पड़ोसी देशों, श्रीलंका और मालदीव की मदद के लिए भारत नये नये क्षेत्रों को खोल रहा है।
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को माले में एक कार्यक्रम कौ दौरान मालदीव को एक तेज गश्ती जहाज और एक लैंडिंग क्राफ्ट सौंपा है। इसके साथ ही भारतीय रक्षा मंत्री ने मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह से मुलाकात की और पहले से ही करीबी द्विपक्षीय रणनीतिक संबंधों का विस्तार देने के लिए बातचीत की।
भारत ने मालदीव को दो जहाज उस वक्त सौंपे हैं, जब इंडियन एयरफोर्स के प्रमुख एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने कोलंबो में श्रीलंका के शीर्ष सैन्य नेतृत्व के साथ बातचीत की है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने हिंद महासागर की पहरेदारी के लिए प्रोजेक्ट SAGAR के तहत ऑपरेशन को काफी तेज कर दिया है।
एयर चीफ मार्शल वीआर चौधरी ने द्वीप राष्ट्र श्रीलंका को मध्यम-लिफ्ट विमान की क्षमता में विस्तार के लिए श्रीलंकाई वायु सेना को AN-32 प्रोपेलर भी भेंट किए हैं, जिससे श्रीलंकन वायुसेना के ऑपरेशनल पॉवर में विस्तार होगा।

प्रोजेक्ट SAGAR कैसे है महत्वपूर्ण
हिंद महासागर के लिए पीएम मोदी की रणनीतिक दृष्टि को पूरा करने के लिए प्रोजेक्ट SAGAR काफी अहम है। पीएम मोदी ने हिंद महासागर में रणनीतिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए Security and Growth for All in the Region (SAGAR) और और 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति को काफी बढ़ावा दिया है।
इसी कड़ी के तहत पिछले साल से अभी तक भारत, आर्थिक संकट में फंसे श्रीलंका को 4 अरब डॉलर से ज्यादा की आर्थिक मदद दे चुका है।
हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में मालदीव और श्रीलंका भारत के दो प्रमुख समुद्री पड़ोसी देश हैं। चीन लंबे समय से उन्हें भारत को घेरने के लिए "धागे के मोती (पर्ल्स ऑफ स्ट्रिंग)" के रूप में देखता रहा है।
वहीं, पिछले 11 सालों के बाद पहली बार किसी भारतीय रक्षा मंत्री ने मालदीव का दौरा किया है। वहीं, एयरचीफ मार्शल वीआर चौधरी की श्रीलंका यात्रा तब हुई है, जब देश एक अभूतपूर्व आर्थिक संकट से उभरने के लिए कड़ी मेहनत कर रहा है।
आईओआर देशों में चीन की लगातार बढ़ती घुसपैठ के बीच, उनके सशस्त्र बलों की क्षमता निर्माण में मदद करने के लिए भारत के रक्षा मंत्री और एयरचीफ मार्शल की दो उच्च-स्तरीय यात्राएं हुई हैं।
हिंद महासागर से चीन को संदेश
माले में अपने संबोधन में, राजनाथ सिंह ने कहा, कि "भारत-मालदीव संबंध वास्तव में विशेष है। यह समय की कसौटी पर खरा उतरा है और हमने हमेशा जरूरत के समय में एक-दूसरे का समर्थन किया है।"
Recommended Video

उन्होंने आगे कहा, कि "इसलिए, हमें यह सुनिश्चित करने के लिए एक सहयोगात्मक प्रयास सुनिश्चित करना चाहिए कि हिंद महासागर का समुद्री विस्तार शांतिपूर्ण रहे और क्षेत्रीय समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए समुद्री संसाधनों का दोहन नहीं हो पाए।"
भारत ने पिछले कुछ सालों में मालदीव की काफी तेजी के साथ मदद की है। भारत की मदद से मालदीव अपने कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को विकसित कर रहा है, जिसके लिए भारत अनुदान और कर्ज, दोनों दे रहा है।
इसके अलावा, भारत ने मालदीव के रक्षा बलों की ताकत बढ़ाने के लिए मालदीव में कोस्ट गार्ड हार्बर और डॉकयार्ड को विकसित किया है। 2006 में, भारत ने अपने फास्ट अटैक क्राफ्ट INS तिलानचांग को मालदीव कोस्ट गार्ड में ट्रांसफर कर दिया था, जिसका नाम बदलकर एमसीजीएस हुरावी कर दिया गया।












Click it and Unblock the Notifications