India Pakistan Tension: भारतीय सिखों की पाकिस्तान में एंट्री! अब क्या होने वाला है कुछ बड़ा? जानें Plan
India Pakistan News: भारत-पाकिस्तान के बीच मई(ऑपरेशन सिंदूर- 7 से 10 के दरमियान) में हुए घातक संघर्ष के बाद पहली बार बड़ी संख्या में सिख तीर्थयात्री वाघा-अटारी सीमा पार कर पाकिस्तान पहुंचे।
मंगलवार (4 नवंबर 2025) को दर्जनों तीर्थयात्रियों ने सीमा क्रॉस की, जहां पाकिस्तानी अधिकारियों ने उनका फूलमालाओं से स्वागत किया और गुलाब की पंखुड़ियां बरसाईं। यह यात्रा गुरु नानक देव जी की 556वीं जयंती के 10 दिवसीय उत्सव के लिए है, जो अंतर-धार्मिक सद्भाव का प्रतीक बनी हुई है।

मई के बाद पहली Wagah-Attari Border पार: तनाव के बीच धार्मिक यात्रा
7 से 10 मई 2025 में Kargil War-(1999) के बाद सबसे खराब झड़पों के दौरान मिसाइल, ड्रोन और तोपखाने के हमलों में 70 से अधिक लोग मारे गए थे। इसके बाद दोनों परमाणु हथियार संपन्न देशों के बीच वाघा-अटारी सीमा- जो एकमात्र सक्रिय स्थलीय मार्ग है- सामान्य यातायात के लिए बंद कर दी गई। नई दिल्ली ने इस्लामाबाद पर पहलगाम हमले (22 अप्रैल 2025) का समर्थन करने का आरोप लगाया था, जिसका पाकिस्तान ने खंडन किया।
फिर भी, पाकिस्तान उच्चायोग ने नई दिल्ली में पिछले सप्ताह घोषणा की कि गुरु नानक जयंती के लिए 2,100 से अधिक भारतीय सिख तीर्थयात्रियों को वीजा जारी किए गए हैं। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) की ओर से आयोजित यह यात्रा 4-13 नवंबर तक चलेगी। मंगलवार सुबह भारतीय पक्ष पर तीर्थयात्री कतार में खड़े दिखे- कुछ सामान सिर पर लादे, जबकि सीमा सुरक्षा बल (BSF) निगरानी कर रहा था। एएफपी के पत्रकारों ने पाकिस्तानी पक्ष पर दर्जनों तीर्थयात्रियों को प्रवेश करते देखा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, करीब 1,700 तीर्थयात्री सीमा पार कर रहे हैं, हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
Guru Nanak Jayanti 2025: ननकाना साहिब से करतारपुर तक
तीर्थयात्री बुधवार (5 नवंबर 2025) को लाहौर से करीब 80 किमी पश्चिम स्थित ननकाना साहिब (Nankana Sahib to Kartarpur) गुरु नानक देव जी के जन्मस्थान- में एकत्र होंगे। यहां मुख्य समारोह होगा, जिसमें पाकिस्तान के संघीय और प्रांतीय मंत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। इसके बाद वे गुरुद्वारा पंजा साहिब (हसन अब्दाल), करतारपुर (जहां गुरु जी का अंतिम संस्कार हुआ) समेत पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के अन्य पवित्र गुरुद्वारों का दर्शन करेंगे। यात्रा 13 नवंबर को समाप्त होकर भारत लौटेंगे।
पाकिस्तान के धार्मिक मामलों एवं अंतरधार्मिक सद्भाव मंत्रालय और एवाक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) के तहत आयोजित यह उत्सव सिखों की आध्यात्मिक विरासत को जोड़ता है। उच्चायोग ने इसे 'अंतर-धार्मिक और अंतर-सांस्कृतिक सद्भाव' बढ़ाने का प्रयास बताया। 1 नवंबर को पाकिस्तानी अखबारों ने रिपोर्ट किया कि सरकार ने 'चुनिंदा' समूहों को यात्रा की अनुमति दी है।
Kartarpur Corridor: अभी बंद, लेकिन उम्मीद बरकरार
2019 में खोले गए वीजा-मुक्त करतारपुर कॉरिडोर- जो सिखों को मुख्य सीमा पार किए बिना गुरुद्वारा दरबार साहिब जाने की सुविधा देता है- मई संघर्ष के बाद बंद है। दिल्ली मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने केंद्र सरकार की अनुमति पर आभार जताया, कहा कि यह गुरु नानक जी के प्रति सम्मान दर्शाता है। SGPC ने तीर्थयात्रियों को वैध दस्तावेज, स्वास्थ्य और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन करने की सलाह दी।
यह यात्रा भारत-पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण संबंधों के बीच एक सकारात्मक कदम है, जो सिख समुदाय की सीमाओं से परे आस्था को रेखांकित करता है। SGPC अध्यक्ष हरप्रीत सिंह ने कहा, 'यह यात्रा गुरु नानक जी की शिक्षाओं- सद्भाव और शांति- का प्रतीक है।' तीर्थयात्रियों की सुरक्षित यात्रा की कामना!
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