पाकिस्तान का डबल गेम! PM शरीफ बोले- पाक सीजफायर का सम्मान करेगा, पर 3 Point में बेनकाब जमीनी हकीकत
India Pakistan Tension: दिन के उजाले में 'शांति' की बातें... और रात के अंधेरे में आतंक की गोद में बैठा मुल्क! ये हकीकत है उस पाकिस्तान की - जो कैमरों के सामने शांति संदेश देता है, लेकिन पीछे से 'हाफिज सईद', 'मसूद अजहर' जैसे खूंखार आतंकियों की थाली में 14 करोड़ का मुआवजा परोसता है।
14 मई को, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा जनरल एंटोनियो गुटेरेस से फोन पर 'भारत से शांतिपूर्ण रिश्ते' की बात की। लेकिन दूसरे ही पल, आतंकियों की रैली में शामिल हुए और भारत को धमकी भी दी। मतलब साफ है- शब्दों में अमन, लेकिन सिस्टम में जहर! प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ एक ओर संयुक्त राष्ट्र और यूएई से कह रहे हैं कि पाकिस्तान युद्धविराम चाहता है, वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान की जमीनी हकीकत कुछ और ही दिखा रही है। आइए जानते हैं क्या है...

क्या है PM शरीफ का 'शांति' वाला बयान?
शहबाज शरीफ ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस और यूएई के राष्ट्रपति से बात कर कहा कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत आत्मरक्षा का अधिकार रखता है। पाकिस्तान युद्धविराम समझौते का सम्मान करेगा। पाकिस्तान शांति और स्थिरता में विश्वास रखता है।
पर असल में क्या हो रहा है?
पहली हकीकत- आतंकियों के घरों की मरम्मत पर खर्च होंगे करोड़ों
भाजपा नेता अमित मालवीय ने उजागर किया, पाकिस्तान सरकार ने जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े घरों की मरम्मत के लिए 14 करोड़ रुपये का ऐलान किया है। इन घरों को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में नष्ट किया था। इन आतंकियों के परिवारों को 1-1 करोड़ रुपये मुआवजा मिलेगा। यानि, IMF से लिए गए कर्ज का पैसा आतंकियों पर खर्च किया जा रहा है।
दूसरी हकीकत- कराची में आतंकी रैली, भारत को दी धमकी
कराची में लश्कर-ए-तैयबा, अहल-ए-सुन्नत वल जमात जैसे प्रतिबंधित संगठनों ने रैली की। इसमें पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई का महिमामंडन किया गया। भड़काऊ भाषणों में भारत को धमकी दी गई। कट्टरपंथी मौलवी तारिक मसूद ने कहा - हमारी सेना धर्मनिरपेक्ष नहीं, 'शहीदों की सेना' है।
तीसरी हकीकत- सिंधु जल संधि पर भी पाक का पलटा रुख
भारत ने आतंकवाद का साथ छोड़ने तक सिंधु जल संधि स्थगित कर दी है। अब पाकिस्तान के जल मंत्रालय ने भारत को पत्र लिखकर पुनर्विचार की मांग की है। यानी, पाकिस्तान एक तरफ पानी चाहता है, दूसरी ओर आतंकियों को पाल रहा है।
क्या कहता है ये दोहरा रवैया?
पाकिस्तान एक ओर दुनिया को 'शांति का चेहरा' दिखा रहा है। वहीं दूसरी ओर जमीन पर आतंक को सह और सहयोग दे रहा है। आतंकियों को मुआवज़ा देना और रैलियों में सेना के नाम पर भारत को धमकी देना पाकिस्तान की 'डबल गेम' को पूरी तरह उजागर करता है।
भारत की प्रतिक्रिया बिल्कुल स्पष्ट है-
- आतंकवाद और बातचीत साथ नहीं चल सकते
- सिंधु जल संधि पर कोई राहत नहीं, जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को नहीं छोड़ता
- ऑपरेशन सिंदूर जैसे सख्त कदम उठाए जाएंगे जब भी भारत की संप्रभुता को चुनौती दी जाएगी












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