हंबनटोटा में घाटे में चल रहे इस इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भारत को कब्‍जा देगा श्रीलंका

श्रीलंका सरकार भारत के साथ एक ज्‍वॉइन्‍ट वेंचर के तहत मत्‍ताला राजपक्षे इंटरनेशनल एयरपोर्ट भारत को सौंपेगी। यह दुनिया का सबसे खाली एयरपोर्ट है। श्रीलंका के सिविल एविएशन मिनिस्‍टर की ओर से संसद में गुरुवार को यह जानकारी दी गई है। श्रीलंका ने हाल ही में हंबनटोटा पोर्ट, चीन को देने का ऐलान किया है।

कोलंबो। श्रीलंका सरकार भारत के साथ एक ज्‍वॉइन्‍ट वेंचर के तहत मत्‍ताला राजपक्षे इंटरनेशनल एयरपोर्ट भारत को सौंपेगी। यह दुनिया का सबसे खाली एयरपोर्ट है। श्रीलंका के सिविल एविएशन मिनिस्‍टर की ओर से संसद में गुरुवार को यह जानकारी दी गई है। श्रीलंका ने हाल ही में हंबनटोटा पोर्ट, चीन को देने का ऐलान किया है। इस ऐलान के बाद ही श्रीलंका की ओर से इस एयरपोर्ट को भारत को देने का ऐलान किया गया है। जो एयरपोर्ट भारत को श्रीलंका की ओर से सौंपा जाने वाला है, वह घाटे में चल रहा है और ऐसे में इस फैसले पर पहले से ही काफी आशंकाएं पैदा हो गई हैं।

210 मिलियन डॉलर का एयरपोर्ट, 20 करोड़ का नुकसान

210 मिलियन डॉलर का एयरपोर्ट, 20 करोड़ का नुकसान

मत्‍ताला राजपक्षे इंटरनेशनल एयरपोर्ट, राजधानी कोलंबो से 241 दूर दक्षिण-पूर्व में है और यह करीब 210 मिलियन डॉलर से तैयार हुआ है। यहां पर बहुत ही कम फ्लाइट्स लैंड करती हैं और इसलिए इसे दुनिया का सबसे खाली एयरपोर्ट कहते हैं। भारत इस एयरपोर्ट को श्रीलंका-भारत के ज्‍वॉइन्‍ट वेंचर के तौर पर ऑपरेट करेगा। श्रीलंका भारत को एयरपोर्ट में बड़ा हिस्‍सेदार मान रहा है। श्रीलंका के सिविल एविएशन मिनिस्‍टर निमल श्रीपला डि सिल्‍वा ने संसद में इस बात की जानकारी दी। उन्‍होंने कहा कि यह एयरपोर्ट जो पूरी तरह से खत्‍म होने की कगार पर है और जिसकी वजह से 200 करोड़ रुपए नुकसान हो चुका है, हमें उसे नया रूप देने की जरूरत है। डि सिल्‍वा ने बताया कि एग्रीमेंट की शर्तों पर काम हो रहा है और यह अंतिम दौर में है।

विपक्ष ने घेरा सरकार को

विपक्ष ने घेरा सरकार को

श्रीलंका में विपक्ष के नेता कनका हेराथ ने सरकार से सवाल किया कि क्‍या यह कदम इसलिए उठाया गया है क्‍योंकि यह हंबनटोटा पोर्ट से सटा है और हंबनटोटा को चीन को दिया जा चुका है। क्‍या सरकार ने भारत सरकार को खुश करने के लिए यह फैसला किया है ताकि वह चीन और भारत दोनों ही देशों को खुश रख सके? इस पर डि सिल्‍वा ने कहा कि यह आरोप पूरी तरह से गलत है। उन्‍होंने कहा कि साल 2016 में सरकार की ओर से अंतरराष्‍ट्रीय निवेशकों से इस एयरपोर्ट को चलाने के लिए प्रस्‍ताव मांगे गए थे और सिर्फ भारत की ओर से मदद की पेशकश की गई थी। ऐसे में अब श्रीलंका, भारत के साथ चर्चा कर रहा है।

हंबनटोटा के करीब ही है एयरपोर्ट

हंबनटोटा के करीब ही है एयरपोर्ट

मत्‍ताला एयरपोर्ट का नाम श्रीलंका के पूर्व राष्‍ट्रपति महिंदा राजपक्षे के नाम पर रखा गया है। यह श्रीलंका का सबसे बड़ा इंफ्रस्‍ट्रक्‍चर प्रोजेक्‍ट था। राजपक्षे ने करीब 10 वर्षों तक श्रीलंका पर शासन किया था। प्रोजेक्‍ट को चीन से ऊंची ब्‍याज दरों पर कर्ज लेकर पूरा किया गया था। यह एयरपोर्ट एक वर्ष में एक मिलियन यात्रियों को झेल सकता है। आधिकारिक तौर पर यह एयरपोर्ट मार्च 2013 में खोला गया था। यहां से सिर्फ एक ही इंटरनेशनल फ्लाइट ऑपरेट हो रही थी और उसे भी मई में सेफ्टी इश्‍यू और नुकसान की वजह से मई में बंद कर दिया गया। हंबनटोटा में तैयार पोर्ट, राजपक्षे का एक और प्रोजेक्‍ट था। इसे चीन का उधार चुकाने के लिए लीज पर दिया गया है।

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