रूस से सस्ता तेल खरीद कर भारत ने बचाए इतने हजार करोड़ रुपये, फिर भी दाम क्यों नहीं कम?

रूस ने भारत को प्रति बैरल 30 डॉलर का डिस्काउंट भी दिया। इसके चलते पहली तिमाही में एक टन कच्चे तेल के आयात की लागत करीब 790 डॉलर थी। इसके बाद दूसरी तिमाही में यह घटकर 740 डॉलर रह गई।

नई दिल्ली, 19 सितंबरः यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद उपजे राजनीतिक हालात का भारत को भरपूर फायदा पहुंचा है। यूक्रेन पर जंग थोपे जाने के बाद जहां अमेरिका सहित कई पश्चिमी देशों ने रूस पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए लेकिन भारत रूस के साथ व्यापार का विस्तार करता गया। इसकी भारत की आलोचना भी हुई लेकिन भारत ने इसकी परवाह नहीं की। इस फैसले का देश को भरपूर फायदा भी पहुंचा है। भारत ने रूस से तेल खरीद के जरिए 35 हजार रुपये की भारी बचत की है।

भारत को कुल 35 हजार करोड़ रुपए का फायदा

भारत को कुल 35 हजार करोड़ रुपए का फायदा

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत ने इस साल की पहली तिमाही में रूस से 6.6 लाख टन कच्चा तेल आयात किया। वहीं, दूसरी तिमाही में यह आकड़ा बढ़कर 84.2 लाख टन पहुंच गया। इस दौरान रूस ने भारत को प्रति बैरल 30 डॉलर का डिस्काउंट भी दिया। इसके चलते पहली तिमाही में एक टन कच्चे तेल के आयात की लागत करीब 790 डॉलर थी। इसके बाद दूसरी तिमाही में यह घटकर 740 डॉलर रह गई। इस तरह भारत को कुल 35 हजार करोड़ रुपए का फायदा हुआ।

अन्य स्रोतों से भी बढ़ी आय

अन्य स्रोतों से भी बढ़ी आय

इसी अवधि में अन्य स्रोतों से आयात की लागत बढ़ी। बतादें कि रूस से 2022 में सस्ते तेल का आयात 10 गुना बढ़ गया है। जुलाई में रूस भारत को तेल आयात करने के मामले में अब सउदी अरब को पीछे छोड़कर दूसरे नंबर पर पहुंच गया। हालांकि सऊदी ने स्थिति में सुधार करते हुए एक बार फिर से अपनी पोजिशन बरकरार कर ली। फिलहाल रूस भारत को तेल आयात करने के मामले में तीसरे नंबर पर है। भारत से रूस का तेल कारोबार फिलवक्त 11.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं, साल के आखिर तक रिकॉर्ड 13.6 अरब डॉलर तक पहुंचने की संभावना है।

खनिज तेल का भी आयात 10 गुना बढ़ा

खनिज तेल का भी आयात 10 गुना बढ़ा

आंकड़ों से पता चलता है कि अप्रैल से जुलाई के दौरान रूस से भारत का खनिज तेल आयात आठ गुना बढ़कर 11.2 अरब डॉलर हो गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में मात्र 1.3 अरब डॉलर था। मार्च के बाद से जब भारत ने रूस से आयात बढ़ाया है तो यह आयात 12 अरब डॉलर से ऊपर हो गया है, जो पिछले साल 1.5 अरब डॉलर से थोड़ा अधिक था। इनमें से करीब 7 अरब डॉलर का आयात जून और जुलाई में हुआ है।

भारत के लिए तेल की कीमत के मायने

भारत के लिए तेल की कीमत के मायने

भारत के लिए तेल की कीमतें महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यह आयात 83 प्रतिशत मांग को पूरा करता है। इसमें भारत सरकार काफी पैसे खर्च करती है। स्पष्ट कर दें कि रूस से तेल भारत सरकार द्वारा नहीं बल्कि भारतीय तेल रिफाइनरों द्वारा खरीदा जाता है। सस्ते तेल का अर्थव्यवस्था के व्यापक आर्थिक मापदंडों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। कम कीमत पर खरीदा गया तेल लागत को कम रखने में मदद करता है। चालू घाटा नियंत्रण में होने से आयात बिल कम होता है जिससे डॉलर की मांग कम हो जाती है।

कोरोना काम में भी हुआ फायदा

कोरोना काम में भी हुआ फायदा

बता दें कि यह दूसरा मौका है जब वैश्विक तेल बाजार में रियायती दरों की तलाश में भारत को पैसे की बचत हुई है। इससे पहले भारत कोरोना काल में 25,000 करोड़ रुपये बचाने में कामयाब हुआ था। उस दौरान कोविड वायरस ने अर्थव्यवस्था को ठप कर दिया था। भारत सरकार ने इस अवसर का भी खूब फायदा उठाया। टाइम्स ऑफ इंडिया ने अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि एक तथ्य यह भी है कि देश का तेल आयात बिल 2021-22 में दोगुना होकर 119 बिलियन डॉलर हो गया। इससे सरकारी वित्त में काफी दबाव आया और महामारी के बाद आर्थिक सुधार पर असर भी पड़ा।

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