मालदीव के बाद बांग्लादेश, एक और सच्चे दोस्त को भारत ने खोया! हिंदुस्तान के पड़ोस में अब दुश्मन ही दुश्मन?

Bangladesh Protest: बांग्लादेश की 77 साल की प्रधानमंत्री शेख हसीना हिंसक प्रदर्शन के बाद 5 अगस्त को देश छोड़कर भाग गईं और बांग्लादेश की सेना ने अंतरिम सरकार के गठन की घोषणा कर दी है। शेख हसीना का पतन उन देशों की लंबी सूची में एक और दोस्त का नुकसान है, जिनके साथ भारत के रिश्ते अस्थिर रहे हैं।

शेख हसीना भारत के सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक रही हैं, जो भारत विरोधी भावनाओं से भरे पड़ोस में भारत के खिलाफ पनप रहे इस्लामिक विचारधारा को काफी हद तक कंट्रोल करने में कामयाब रही। लेकिन, शेख हसीना की सरकार का पतन, दक्षिण एशिया में "बड़ी शक्ति" के रूप में पहचाने जाने वाले भारत की स्थिति, चीन की घुसपैठ से प्रभावित हुई है।

India Faces Regional Isolation

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शेख हसीना ने साल 2023 में रिकॉर्ड 10 बार मुलाकात की थी, जिससे समझा जा सकता है, कि दोनों देशों के संबंध कितने करीबी हो गये थे।

मालदीव के बाद भारत ने बांग्लादेश को भी खोया!

अफगानिस्तान, मालदीव और म्यांमार पहले ही भारत से बहुत हद तक दूर हो चुके हैं। नेपाल और श्रीलंका के साथ संबंध चीन और भारत के बीच आगे-पीछे होते रहते हैं। इंटरनेशनल रिलेशन के एक्सपर्ट डॉ. इयान हॉल ने निष्कर्ष निकाला, कि शेख हसीना के पतन के बाद, भारत के पास "भूटान, मॉरीशस और सेशेल्स ही बचे रह गए हैं, जो एक स्थिर पड़ोसी हैं।"

शेख हसीना को 50 वर्षों में दूसरी बार भारत में शरण लेनी पड़ी है। बांग्लादेश के सेना प्रमुख से 45 मिनट का अल्टीमेटम मिलने के बाद, शेख हसीना अपनी बहन के साथ एक सैन्य हेलीकॉप्टर में कुर्मीटोला के लिए रवाना हुईं। उन्होंने भारत से तीसरे देश तक सुरक्षित मार्ग की मांग की, जिसे तुरंत स्वीकार कर लिया गया। कुर्मीटोला से उन्हें बांग्लादेश वायु सेना के सी-130जे सामरिक विमान में नई दिल्ली ले जाया गया।

भारत की पूर्व विदेश सचिव निरुपमा मेनन राव ने नई दिल्ली को जल्दबाजी में काम करने के खिलाफ चेतावनी दी है और इतिहास के सही पक्ष पर आने को कहा है।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, कि "पांच दशक पहले, जब हमने बांग्लादेश को आजाद करवाया था, खासकर चीन और अमेरिका के विरोध के बावजूद, उस वक्त हम इतिहास के सही पक्ष पर थे। और आज हम एक बार फिर से बांग्लादेश में महत्वपूर्ण घटनाओं को देख रहे हैं, तो हमें अपनी प्रतिक्रिया में सावधानी बरतनी होगी और दूरदर्शिता के साथ आगे बढ़ना होगा। हम कोई भी गलत कदम उठाने का जोखिम नहीं उठा सकते। इसमें रणनीतिक दुविधाएं शामिल हैं। हम जो भी करें, हमें अपने दीर्घकालिक राष्ट्रीय हितों की रक्षा करनी चाहिए।"

इस साल की शुरुआत में मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने भारतीय सैनिकों को द्वीप देश छोड़ने के लिए कहा था और उन्होंने मालदीव को चीन की तरफ मोड़ लिया।

अफगानिस्तान भी भारत के हाथों से तब खो गया, जब तालिबान ने कब्जा कर लिया। श्रीलंका भारत के साथ अपने संबंधों में ढिलाई बरत रहा है। हालांकि, फिलहाल इसने चीनी जासूसी जहाजों को अपने बंदरगाहों पर डॉक करने से रोक दिया है, लेकिन यह प्रतिबंध 2024 के अंत तक खत्म हो जाएगा। हाल ही में, नेपाल भी चीन की ओर झुका हुआ है।

भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण है बांग्लादेश?

1971 में बांग्लादेश के निर्माण में भारत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जब शेख हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान ने पूर्वी पाकिस्तान में विद्रोह का नेतृत्व किया था। समय के साथ, भारत-बांग्लादेश संबंधों की चमक फीकी पड़ गई, क्योंकि लगातार राजनीतिक शासन ने भारत विरोधी ताकतों को पनाह दी। शेख हसीना ने ऐसे तत्वों को देश से बाहर निकाल दिया और नई दिल्ली के साथ संबंधों को स्थिर किया।

भारत के लिए बांग्लादेश, अपने भौगोलिक रूप से चीन के निशाने पर रहे पूर्वोत्तर राज्यों को बंगाल की खाड़ी से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण है।

ओपी जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी में जिंदल स्कूल ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स की प्रोफेसर श्रीराधा दत्ता ने माना, कि दोनों देशों के बीच "अस्थिरता और हिचकिचाहट" का दौर रहेगा। हालांकि, उन्होंने यूरेशियन टाइम्स से कहा, कि "बांग्लादेश, चीन और भारत के बीच संतुलन बनाए रखना जारी रखेगा। बांग्लादेश में एक बड़ा वर्ग है जो चीन के साथ मिलकर काम करना चाहता है, लेकिन इसकी एक सीमा है।"

उन्होंने कहा, कि "बांग्लादेशी राजनेता चतुर हैं। वे चीन और भारत के बीच संतुलन बनाए रखेंगे। अगर देश की नई सरकार अपने लोगों को कुछ देना चाहती है, तो उसे भारत के साथ विकास परियोजनाएं जारी रखनी होंगी।"

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शेख हसीना की राजनीति कैसे डूब गई?

शेख हसीना सरकार अमेरिका के साथ टकराव में थी, जिसने दक्षिण एशियाई देश को अपने लोकतंत्र को बढ़ावा देने के एजेंडे का केंद्र बिंदु बना दिया था। दिसंबर 2021 में, वाशिंगटन ने कथित न्यायेतर हत्याओं और अन्य मानवाधिकार उल्लंघनों को लेकर बांग्लादेश के सुरक्षा बल, रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) पर प्रतिबंध लगा दिया।

बाइडेन प्रशासन ने बांग्लादेश को अपने 2021 और 2023 के ग्लोबल डेमोक्रेसी समिट में भी नहीं बुलाया।

मई 2023 में संयुक्त राज्य अमेरिका ने घोषणा की, कि वह "बांग्लादेश में लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया को कमजोर करने" में शामिल किसी भी बांग्लादेशी को वीजा देने से मना कर देगा। सितंबर में, अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने एक नीति की घोषणा की, जो बांग्लादेश में उन व्यक्तियों को वीजा देने से मना करने का अधिकार सुरक्षित रखती है, जो जनवरी 2024 में देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावों में बाधा डालेंगे।

लेकिन अमेरिका और बांग्लादेश के बीच भारत आ गया और भारत की वजह से अमेरिका ने बांग्लादेश में हुए चुनाव को भी मान्यता दी, लेकिन किसी भी सरकार के चलने के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है, जनता के बीच समर्थन होना। शेख हसीना भले ही चुनाव जीत गईं, लेकिन चुनाव प्रक्रिया में जनता शामिल नहीं थी। बांग्लादेश पत्रकारों के मुताबिक, देश में 22 प्रतिशत से भी कम मतदान हुए थे और शेख हसीना का जनता से कनेक्शन लगभग खत्म हो गया था।

उन्होंने खुफिया एजेंसियों की बात माननी भी बंद कर थी, जिसकी वजह से खुफिया एजेंसियों ने भी प्रधानमंत्री के साथ वही जानकारियां शेयर की, जो उन्हें अच्छा लगता। और प्रधानमंत्री की जनता से दूरी ने उनके विरोधी इस्लामी कट्टरपंथी संगठनों को मजबूत किया। शेख हसीना सरकार शायद भारत के सबसे करीबी और एकमात्र विश्वसनीय साझेदार थी, जिनसे भारत सीमा साझा करता है।

हालांकि बांग्लादेश, अमेरिका की इंडो-पैसिफिक रणनीति में उसका रणनीतिक साझेदार नहीं है, लेकिन उसकी भू-रणनीतिक स्थिति भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। बांग्लादेश बंगाल की खाड़ी के शिखर पर स्थित है, जो हिंद महासागर का हिस्सा है और ये एक महत्वपूर्ण पारगमन क्षेत्र है, जिसके माध्यम से वैश्विक समुद्री व्यापार का अनुमानित 80 प्रतिशत भाग गुजरता है।

बंगाल की खाड़ी, हिंद महासागर क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो अफ्रीका से लेकर इंडोनेशिया तक फैला हुआ है। भारत, म्यांमार और बांग्लादेश के बीच बसी बंगाल की खाड़ी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक चोकपॉइंट में से एक, मलक्का जलडमरूमध्य पर स्थित है, जो हिंद महासागर को दक्षिण चीन सागर से जोड़ती है।

लोकतंत्र पर अमेरिका का लेक्चर शेख हसीना को नागवार गुजर रहा था और वो लगातार रूस-चीन के करीब जा रही थीं।

बांग्लादेश को चीन के कितना करीब ले गईं शेख हसीना?

इसी साल मार्च में, शेख हसीना ने बंगाल की खाड़ी में कुतुबदिया चैनल के पास बांग्लादेश के पहले पनडुब्बी बेस, पेकुआ का उद्घाटन किया था। 1.21 बिलियन अमेरिकी डॉलर की लागत से निर्मित इस बेस में दो चीनी पनडुब्बियां रखी जाएंगी, जिन्हें बांग्लादेश ने 2016 में खरीदा था।

2010 से ढाका ने चीन से 2.37 बिलियन डॉलर के हथियार खरीदे हैं, जबकि अमेरिका से उसने सिर्फ 123 मिलियन अमेरिकी डॉलर के हथियार खरीदे हैं।

बांग्लादेश के साथ चीन के द्विपक्षीय संबंधों का मुख्य आधार रक्षा साझेदारी है। इसकी शुरुआत 1980 के दशक में हुई थी और बाद के वर्षों में इसमें काफी वृद्धि हुई है। वर्तमान में, बांग्लादेश की रक्षा आपूर्ति में चीन का हिस्सा 72 प्रतिशत के करीब है। ढाका, पाकिस्तान के बाद चीनी हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा खरीददार है। वहीं, बांग्लादेश में काफी समय से "इंडिया आउट" कैम्पेन भी चलाया जा रहा है।

हालांकि, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने इस बारे में चिंतित होने से इनकार कर दिया है। 30 जनवरी को मुंबई में एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा था, कि "हमें दो वास्तविकताओं को पहचानना होगा। चीन भी एक पड़ोसी देश है और कई मायनों में, प्रतिस्पर्धी राजनीति के हिस्से के रूप में, इन देशों (मालदीव, श्रीलंका और बांग्लादेश) को प्रभावित करेगा।"

लेकिन, बांग्लादेश को लेकर भारत को सबसे ज्यादा सतर्कता शरणार्थी संकट और चरमपंथियों को लेकर रहना होगा। भारत सरकार को बांग्लादेश में रहने वाले हिंदुओं की सुरक्षा को लेकर भी सतर्क रहना होगा।

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