ASTRA: जिस रूस से दशकों से हथियार खरीद रहा भारत, अब उसके ग्राहकों को विनाशक मिसाइल बेचने की तैयारी
ASTRA Missile: भारतीय डिफेंस सेक्टर ने ASTRA मिसाइल के साथ एक जबरदस्त उपलब्धि हासिल की है, जो देश की पहली स्थानीय रूप से विकसित दृश्य-सीमा से परे हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल है।
इस मिसाइल का व्यापक परीक्षण किया गया है और सुखोई-30 लड़ाकू जेट के साथ एकीकरण किया गया है और अब यह पूरी तरह से एक्टिव हो चुकी है। रिपोर्ट के मुताबिक, अब भारत के स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस फाइटर जेट के साथ इसे लैस करने की योजना बनाई गई है।

अस्त्र मिसाइल आयातित मिसाइलों के लिए एक किफायती विकल्प है, साथ ही यह जबरस्त प्रदर्शन करने में माहिर मानी जाती है। इसकी सटीकता दर 90% से ज्यादा है और इसकी परिचालन सीमा 100 किलोमीटर से ज्यादा है। इसकी एडवांस विशेषताएं, जैसे विस्तारित सीमा और परिचालन छत, इसे हवाई युद्ध में एक दुर्जेय हथियार बनाती हैं।
ASTRA Missile को जानिए
भारत की पहली स्वदेशी रूप से विकसित दृश्य-सीमा से परे हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल (BVRAAM) अस्त्र, देश की रक्षा क्षमताओं में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने इसकी इंजीनियरिंग की है और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) ने इसका निर्माण किया है। अस्त्र मिसाइल को व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली रूसी आर-77 मिसाइल के बेहतर विकल्प के रूप में पेश किया गया है।
अस्त्र मिसाइल ने सुखोई-30 लड़ाकू जेट के साथ कठोर परीक्षण और एकीकरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है और अब पूरी तरह से चालू है। भारत के स्वदेशी लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) तेजस के साथ एकीकरण सहित इसकी तैनाती का विस्तार करने की योजनाएं चल रही हैं।
बीडीएल में नई परियोजनाओं के जनरल मैनेजर विनोद कुमार ने हाल ही में कहा, कि "अस्त्र मिसाइल, वर्तमान में प्रोडक्शन में है, और हमें अतिरिक्त ऑर्डर मिलने की उम्मीद है। हम अस्त्र मिसाइल के निर्यात की संभावना भी तलाश रहे हैं।" उनका ये बयान भारत के स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकी में बढ़ते आत्मविश्वास और वैश्विक हथियार बाजार में भारत की महत्वाकांक्षाओं को दर्शाता है।

अस्त्र मिसाइल के लिए निर्यात के अवसर
एस्ट्रा मिसाइल का निर्माता बीडीएल निर्यात के अवसरों की तलाश कर रहा है और उसने संभावित ग्राहकों के साथ बातचीत शुरू कर दी है। सुखोई-30 लड़ाकू विमान ऑपरेट करने वाले देश, विशेष रूप से दक्षिण पूर्व एशिया, दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका में अस्त्र मिसाइल सिस्टम खरीदने वाले ग्राहक मिल सकते हैं।
वियतनाम, म्यांमार, मलेशिया, वेनेजुएला, युगांडा, इंडोनेशिया, अंगोला और अल्जीरिया जैसे देश इस मिसाइल के लिए संभावित बाजार हैं।
मिसाइल का आकर्षक डिज़ाइन और उच्च विस्फोटक प्री-फ्रैगमेंटेड वारहेड इसकी प्रभावशीलता को काफी ज्यादा बढ़ा देते हैं। रूसी निर्मित विमानों में इसे फिट करने की इसकी क्षमता की वजह और व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाने वाली आर-77 मिसाइल पर इसकी बढ़त से इसे उन देशों के लिए एक आकर्षक विकल्प बनाती है, जो अपनी हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइल क्षमताओं को एडवांस करना चाहते हैं।
भारत का लड़ाकू विमान उत्पादन
मिसाइल प्रणालियों के अलावा, भारत का रक्षा क्षेत्र निर्यात के लिए उन्नत लड़ाकू विमान बनाने की योजना बना रहा है। भारत की सरकारी स्वामित्व वाली एयरोस्पेस कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए सुखोई Su-30 लड़ाकू विमानों के निर्माण के लिए रूस के साथ बातचीत कर रही है। रूस इसमें भारत की मदद कर रहा है, जो भारत को Su-30 वेरिएंट संचालित करने वाले देशों के लिए आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित कर सकता है।
इस पहल के तहत न सिर्फ विमान, बल्कि व्यापक रखरखाव और अपग्रेडेशन पैकेज भी दिए जा रहे हैं। मिसाइल टेक्नोलॉजी में भारत की प्रगति और लड़ाकू विमान उत्पादन में प्रगति, संभावित निर्यात के लिए एक शक्तिशाली कॉकटेल बनाती है।
ये घटनाक्रम डिफेंस टेक्नोलॉजी में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता और अंतरराष्ट्रीय हथियार व्यापार में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में इसके उभरने को दर्शाते हैं। यह भारत के घरेलू एयरोस्पेस उद्योग की तेजी से बढ़ती क्षमताओं और मुख्य रूप से आयातक से उन्नत सैन्य प्रणालियों के डेवलपर और निर्यातक बनने के उसके परिवर्तन को भी दर्शाता है।












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