‘पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण...’, भारत ने कथित मानवाधिकार हनन पर अमेरिकी रिपोर्ट को किया खारिज
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बीते हाल ही में अलग-अलग देशों में मानवाधिकारों से जुड़े कानूनों के पालन की स्थिति को लेकर एक रिपोर्ट जारी की थी। इस रिपोर्ट में चीन, ब्राजील , बेलारूस, म्यांमार के साथ-साथ भारत का भी जिक्र है।
रिपोर्ट में भारत को लेकर दावा किया है कि मणिपुर में जातीय हिंसा फैलने के बाद राज्य में बड़े पैमाने पर मानवाधिकारों का हनन हुआ है। साथ ही ये भी कहा गया है कि भारत में तानाशाही बढ़ गई है।

भारत ने इस रिपोर्ट पर अब जाकर आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी विदेश विभाग की रिपोर्ट पर भारत ने कहा है कि ये रिपोर्ट पूरी तरह से पक्षपातपूर्ण है और भारत को लेकर खराब समझ को दर्शाती है।
गुरुवार को विदेश मंत्रालय की साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान रिपोर्ट पर एक सवाल का जवाब देते हुए, मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने कहा, "यह रिपोर्ट बेहद पक्षपातपूर्ण है और भारत की बहुत खराब समझ को दर्शाती है। हम इसे कोई महत्व नहीं देते हैं और आपसे भी ऐसा करने का आग्रह करता हूं।"
अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा सोमवार को जारी हुई इस रिपोर्ट में लिखा है, "भारत में मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने चीन की सरकार के कई ऐसे दमनकारी तौर-तरीकों को अपनाया है। इनमें धार्मिक अल्पसंख्यकों के साथ सुनियोजित तरीके से भेदभाव करना, शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों का गला घोंटना और अभिव्यक्ति की आजादी को खत्म करने और सत्ता पर अपनी पकड़ बढ़ाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल शामिल है।"
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बीजेपी के नेतृत्व वाली सरकार ने मुसलमानों के विरूद्ध सुनियोजित तरीके से भेदभाव कर रही है। बीजेपी का समर्थन करने वालों ने अल्पसंख्यकों पर हमले किए हैं।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि सिविल सोसायटी से जुड़े लोगों, स्वतंत्र पत्रकारों को चुप कराने से लेकर जेल भेजने तक की कोशिशें हुई हैं। इसके अलावा जम्मू और कश्मीर में अभिव्यक्ति की आजादी के हनन और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगाई गई है।












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