भारत ने खुलकर अमेरिका पर की सख्त टिप्पणी, एस. जयशंकर के US Election पर बयान से क्यों लगेगी मिर्ची?

India on US Election: अमेरिका में 5 नवंबर को होने वाले चुनाव से पहले भारत ने सख्त संदेश भेजा है, जो कतई सुपरपावर का रूतबा रखने वाले अमेरिका को पसंद नहीं आएगा।

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को कहा है, कि भारत को "पूरा भरोसा" है कि वह अमेरिका के अगले राष्ट्रपति के साथ काम करने में सक्षम होगा, चाहे वह ओवल ऑफिस में कोई भी हो।

India on US Election

अमेरिकी चुनाव पर भारत ने क्या कहा?

अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव इस साल के अंत में होने हैं। नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में पैनल चर्चा के दौरान एक सवाल का जवाब देते हुए जयशंकर ने अमेरिकी चुनाव के संदर्भ में सख्त संदेश देते हुए कहा, "हम आम तौर पर दूसरे लोगों के चुनावों पर टिप्पणी नहीं करते हैं, क्योंकि हम यह भी उम्मीद करते हैं, कि दूसरे हमारे चुनावों पर टिप्पणी नहीं करेंगे।"

जयशंकर ने कहा, "लेकिन, अमेरिकी प्रणाली अपना फैसला सुनाएगी और मैं यह सिर्फ औपचारिकता के तौर पर नहीं कह रहा हूं, बल्कि यदि आप पिछले 20 वर्षों को देखें, या शायद उससे भी ज्यादा, तो हमें पूरा विश्वास है, कि हम अमेरिका के राष्ट्रपति के साथ काम करने में सक्षम होंगे, चाहे वह कोई भी हों।"

पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने डेमोक्रेटिक प्रतिद्वंद्वी और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस के खिलाफ रिपब्लिकन उम्मीदवार हैं। जयशंकर ने अपने जवाब में यह भी कहा, "हमें इस (भारत) देश में चुनाव पसंद हैं, हम उन्हें स्थायी रूप से आयोजित करते हैं, इसलिए हम अभी चुनाव से गुजरे हैं। और, कुल मिलाकर, हमारे चुनाव वास्तविक हैं, कई मायनों में, उम्मीदवारों, जनता, व्यवस्था की परीक्षा है, और हम लगातार उन परीक्षाओं को पास करते हैं, इसलिए यह एक ऐसा देश हैं, जहां आप हमेशा दुनिया भर में लोकतांत्रिक प्रक्रिया का समर्थन करने वाले लोगों को देखेंगे।"

यह कार्यक्रम नई दिल्ली में 'इंडियास्पोरा बीसीजी इम्पैक्ट रिपोर्ट' के लॉन्च का था।

विदेश मंत्री से जब वर्तमान में दुनिया के बारे में उनके विचार के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, कि "अगले पांच वर्षों के लिए यह बहुत ही गंभीर पूर्वानुमान होगा।"

उन्होंने कहा, कि "अगर आप मुझसे दुनिया के बारे में मेरा नजरिया पूछें, तो मैं एक आशावादी व्यक्ति हूं, और आम तौर पर समस्याओं के समाधान के बारे में सोचता हूं, न कि उन समस्याओं के बारे में, जो समाधान से निकलती हैं। लेकिन, मैं बहुत ही गंभीरता से कहूंगा कि हम एक असाधारण कठिन दौर से गुजर रहे हैं।

भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, कि "अगर मैं पांच साल का पूर्वानुमान बताऊं, तो यह अगले पांच वर्षों के लिए बहुत ही गंभीर पूर्वानुमान होगा। और, मुझे लगता है इसका जवाब मौजूद हैं, आप देख सकते हैं, कि मध्य पूर्व, यूक्रेन में क्या हो रहा है, आप दक्षिण पूर्व एशिया, पूर्वी एशिया में क्या हो रहा है, कोविड का निरंतर प्रभाव पड़ा है।"

वहीं, अमेरिका के साथ संबंधों को लेकर भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, कि "हम 90 के दशक के उत्तरार्ध को लेते हैं, जब भारत-अमेरिका संबंधों ने दिशा बदलनी शुरू की, (अमेरिकी राष्ट्रपति बिल) क्लिंटन की भारत यात्रा को एक आसान संदर्भ बिंदु के रूप में लेते हैं, और फिर इसे वहीं से आगे बढ़ाते हैं... एच1बी (वीजा) ने भारत-अमेरिका संबंधों को आकार देने में उतना ही योगदान दिया, जितना शीत युद्ध के अंत ने किया था।"

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