सही निकली चीन की भविष्यवाणी: भारत-कनाडा तनाव शांत करवाने में जुटा अमेरिका, जयशंकर ने कहा- डबल स्टैंडर्ड

India-Canada standoff: कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने जब 18 सितंबर को भारत के ऊपर खालिस्तानी आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में लिंक होने की संभावना जताई थी, उसके बाद पूरी दुनिया में तहलका मच गया और दोनों देशों के बीच के संबंध खराब हो गये।

उस वक्त चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को भोंपू ग्लोबल टाइम्स ने एक लेख में इस पूरी घटना को "अमेरिका का पाखंडी चेहरा उजागर हो गया है" कहा और उसने भविष्यवाणी की, कि इस घटना का कुछ और नतीजा नहीं निकलेगा, बल्कि बाद में अमेरिका, भारत और कनाडा के बीच मध्यस्थता करवा देगा और विवाद के हफ्ते भर से ज्यादा बीतने के बाद ऐसा लग रहा है, कि शायद ग्लोबल टाइम्स की भविष्यवाणी सही थी।

India-Canada standoff

मध्यस्थता करवाने में जुटा अमेरिका

कनाडा स्थित खालिस्तान अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या को लेकर भारत और कनाडा के बीच गतिरोध के बीच, अमेरिका ने धीरे-धीरे और सार्वजनिक रूप से खुद को, ओटावा और दिल्ली के बीच वार्ताकार के रूप में शामिल किया है।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है, कि वाशिंगटन डीसी के माध्यम से दिल्ली और ओटावा के बीच बैकचैनल वार्ता की संभावना तलाशी जा रही है।

यह डेवलपमेंट तब हुआ है, जब भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर, जो इस वक्त न्यूयॉर्क में हैं, उन्होंने एक कार्यक्रम में ग्लोबल नॉर्थ पर निशाना साधते हुए कहा, कि यह अभी भी "डबल स्टैंडर्ड" की दुनिया है।

उन्होंने कहा, कि "और देश प्रभवशाली स्थिति पर कब्जा कर बैठे हुए हैं और उस परिवर्तन का विरोध कर रहे हैं, जिनका ऐतिहासिक प्रभाव ह सकता है, और उन्होंने अपने प्रभाव वाली स्थिति को इन परिवर्तनों के खिलाफ एक हथियार बना लिया है।"

भारतीय विदेश मंत्री का ये बयान उन विकसित देशों की तरफ था, जिन्होंने दुनिया के तंत्र पर संस्थानों पर कब्जा कर रखा है और अपने पॉजीशन का फायदा, ग्लोबल स्थिति पर प्रभाव डालने के लिए करते हैं।

जस्टिन ट्रूडो पर निशाना

भारतीय विदेश मंत्री ने कनाडा के प्रधान मंत्री जस्टिन ट्रूडो के अपने देश में खालिस्तान समर्थक गतिविधियों का बचाव करने वाले बयानों की ओर इशारा करते हुए कहा, कि "बाजार के नाम पर बहुत सारी चीजें की जाती हैं, जैसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए, आजादी के नाम पर बहुत सारी चीजें की जाती हैं।"

वहीं, जब से दिल्ली ने निज्जर की हत्या के लिए भारतीय एजेंटों के "संभावित लिंक" के ट्रूडो के आरोपों को खारिज कर दिया, तब से कम से कम पांच वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी और राजनयिक की तरफ से इस मुद्दे पर बयान आए हैं।

बयान देने वाले अमेरिकी अधिकारियों और राजनयिकों में एनएसए जेक सुलिवन, नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर जैक सुलिवन, नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल कॉर्डिनेटर फॉर स्ट्रैटजिक कम्युनिकेशन जॉन किर्बी, भारत में अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी और कनाडा में अमेरिका के राजदूत डेनिक कोहेन हैं।

इन सभी लोगों के बयान का संक्षेप ये है, कि इन सभी ने भारत से इस जांच में सहयोग करने और कनाडा से बंदूक नहीं उछालने के लिए कहा है।

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तनाव को कैसे कम कर रहा अमेरिका?

-- 19 सितंबर को जॉन किर्बी ने सीबीएस न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में कहा, कि "ये आरोप गंभीर हैं और हम जानते हैं, कि कनाडाई इसकी जांच कर रहे हैं। हम निश्चित रूप से उस जांच से आगे नहीं बढ़ना चाहते।"

उन्होंने आगे कहा, कि "हम भारत से भी उस जांच में सहयोग करने का आग्रह करते हैं और जाहिर तौर पर हम सभी जानना चाहते हैं कि इसे पारदर्शी और संपूर्ण तरीके से निपटाया जाए।

-- 20 सितंबर को भारत में अमेरिका के राजदूत एरिक गार्सेटी ने ट्रूडो के आरोपों को "परेशान करने वाला" बताया और अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभुता और गैर-हस्तक्षेप के सिद्धांतों का पालन करने के महत्व को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा, कि "जाहिर है, इस तरह के किसी भी आरोप से किसी को भी परेशानी होनी चाहिए। लेकिन एक सक्रिय आपराधिक जांच के साथ, मुझे उम्मीद है कि हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि अपराधियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए, लेकिन हम सभी, किसी फैसले पर पहुंचने से पहले, उस जांच के नतीजे तक पहुंचना चाहते हैं।"

-- 21 सितंबर को एनएसए जैक सुलिवन ने कहा, कि अमेरिका निज्जर की हत्या में भारत की संलिप्तता के आरोपों की जांच के लिए कनाडा के प्रयासों का समर्थन करता है, यह देखते हुए कि किसी भी देश को इस प्रकार की गतिविधियों के लिए कोई "विशेष छूट" नहीं मिल सकती है। इस मुद्दे पर यह अमेरिकी प्रशासन, व्हाइट हाउस के सर्वोच्च स्तर का बयान है।

उन्होंने आगे कहा, कि "हम जांच का समर्थन करते हैं और हम भारत सरकार से भी नजदीकी और लगातर संपर्क में हैं।"

-- 22 सितंबर को, कोहेन ने कहा, कि यह "फाइव आइज़ भागीदारों के बीच साझा की गई खुफिया जानकारी" थी जिसने कनाडा को दावा करने में "नेतृत्व" करने में मदद की।

फाइव आइज़ में अमेरिका, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और न्यूजीलैंड हैं, जो आपस में खुफिया जानकारियां शेयर करते हैं और बाद में अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स ने खुलासा किया है, कि कनाडा को जानकारियां देने वाला कोई और नहीं, बल्कि अमेरिका ही है।

कनाडाई सीटीवी समाचार को दिए एक साक्षात्कार में, कोहेन ने कहा, कि "फाइव आईज़ भागीदारों के बीच साझा खुफिया जानकारी थी, जिसने कनाडा को प्रधान मंत्री द्वारा दिए गए बयान देने में मदद की।"

-- 22 सितंबर को, न्यूयॉर्क में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए, एंटनी ब्लिंकन ने कहा, कि "हम इस मुद्दे पर अपने कनाडाई सहयोगियों के साथ बहुत करीब से परामर्श कर रहे हैं, और न केवल परामर्श कर रहे हैं, बल्कि उनके साथ कॉर्डिनेशन भी कर रहे हैं। और हमारे दृष्टिकोण से, यह महत्वपूर्ण है कि कनाडाई जांच आगे बढ़े, और यह महत्वपूर्ण होगा, कि भारत इस जांच पर कनाडाई लोगों के साथ काम करे। हम जवाबदेही देखना चाहते हैं, और यह महत्वपूर्ण है कि जांच अपने नतीजे पर पहुंचे।"

हालांकि, मित्रों और शत्रुओं के बारे में ख़ुफ़िया जानकारी एकत्र करना सामान्य बात है, और दिल्ली में कोई भी अमेरिका और कनाडा के बीच ख़ुफ़िया जानकारी साझा करने की रिपोर्टों से हैरान नहीं है, लेकिन भारतीय प्रतिष्ठान खालिस्तान समर्थक समूहों को ट्रूडो के समर्थन पर सख्त रुख अपनाना चाहता है।

न्यूयॉर्क में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर अमेरिकी प्रशासन के अधिकारियों और मंत्रियों से मुलाकात करने वले हैं और ऐसी उम्मीद है, कि नई दिल्ली और वाशिंगटन के बीच अगले एक हफ्ते में कुछ खुलकर बातचीत होगी। बताया जाता है कि एनएसए अजीत डोभाल भी अपने अमेरिकी समकक्ष के संपर्क में हैं।

नई दिल्ली के दृष्टिकोण का एक संकेत न्यूयॉर्क में जयशंकर के बयान से लगाया जा सकता है, जब उन्होंने ग्लोबल नॉर्थ को डबल स्टैंडर्ड बताया है और कहा है, कि उनके कब्जे में प्रभावशाली संस्थाने हैं, जहां से वो अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रहे हैं।

लिहाजा, कनाडा के आरोप और भारत की जवाबी कार्रवाई के बीच अब अमेरिका बीच का रास्ता निकालने की कोशिश में है, ताकि इस तनाव को शांत करवाया जा सके।

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