इमरान खान को अगर फांसी की सजा मिलती है, तो हैरान मत होइये, जानिए आर्मी एक्ट कितना खतरनाक है?
पाकिस्तानी सेना जिन धाराओं को लेकर इमरान के खिलाफ कदम बढ़ा रही है, वो पूर्व प्रधानमंत्री के लिए किसी खतरे की घंटी से कम नहीं है, इस एक्ट में काफी जल्दी फैसला सुनाया जाता है और खान को उम्र कैद या फांसी भी हो सकती है।

Imran Khan News Army Act: इमरान खान और पाकिस्तानी सेना के बीच की लड़ाई पर चरम पर पहुंचती दिखाई दे रही है और पाकिस्तानी सेना, इमरान खान के खिलाफ आर्मी एक्ट और ऑफिसियल सीक्रेट ऐक्ट के तहत मुकदमा चलाने की तैयारी कर रही है।
पाकिस्तानी सेना के ये दोनों एक्ट कितने खतरनाक हैं, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं, कि इन दोनों धाराओं में उम्र कैद या फांसी की सजा का प्रावधान तक है।
इमरान खान भले ही मौजूदा वक्त में पाकिस्तान के सबसे लोकप्रिय नेता हों, लेकिन पाकिस्तान का इतिहास ऐसा रहा है, जहां सेना जो तय कर लेती है, वो करके दम लेती है। लिहाजा, अगर आने वाले वक्त में इमरान खान को उम्र कैद या फांसी की सजा सुनाई जाती है, तो ये हैरानी की बात नहीं होगी।
सबसे दिलचस्प ये है, कि ये वही आर्मी एक्ट है, जिसे खुद इमरान खान ने भी प्रधानमंत्री रहने के दौरान इस्तेमाल किया था, जबकि पाकिस्तानी सिविल सोसाइटी की तरफ से उन्हें चेतावनी दी गई थी, कि इस कानून का आम नागरिकों पर इस्तेमाल ना हो, क्योंकि ये कानून सैनिकों के लिए है।
पाकिस्तान के प्रसिद्ध पत्रकार हामिद मीर ने ट्वीट कर यही बात कही है। उन्होंने पाकिस्तानी मीडिया के एक आर्टिकिल को शेयर किया है, जिसमें एक खबर है, कि पाकिस्तानी सेना के एक रिटायर्ड जनरल के बेटे के खिलाफ आर्मी एक्ट के तहत सजा सुनाई गई थी।
हामिद मीर ने लिखा है, कि "जब 2021 में पाकिस्तान सेना अधिनियम के तहत एक युवा लड़के को दोषी ठहराया गया था", उन्होंने आगे लिखा है, कि "इमरान खान उस वक्त प्रधानमंत्री थे और हमने उस समय चेतावनी दी थी, कि नागरिक सरकार को सेना अधिनियम के तहत एक नागरिक की सजा का विरोध करना चाहिए। लेकिन, किसी ने हमारी नहीं सुनी। पीटीआई, अब आर्मी एक्ट के तहत मामलों का विरोध कैसे करेगी?
हामिद मीर का इशारा साफ तौर पर इमरान खान को लेकर है, कि इमरान खान ने अपने शासनकाल के दौरान इस एक्ट का विरोध नहीं किया था, क्योंकि उस वक्त उन्होंने नहीं सोचा होगा, कि ये खतरनाक एक्ट उनके खिलाफ भी इस्तेमाल हो सकता है।
रिटायर्ड जनरल के बेटे को मिली थी सजा
आर्मी एक्ट के तहत सुनवाई आर्मी कोर्ट में होती है और सबसे खतरनाक बात ये है, कि इस कोर्ट के फैसले को किसी सिविलियन अदालत में चैलेंज नहीं किया जा सकता है। यानि, आर्मी कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील नहीं की जा सकती है और आर्मी कोर्ट, काफी कम वक्त में फैसला सुना देती है।
साल 2021 में सेना में अराजकता फैलाने की कोशिश करने के आरोप में सैन्य अदालत ने पाकिस्तानी सेना के एक सेवानिवृत्त मेजर जनरल के बेटे को पांच साल की कैद की सजा सुनाई थी। सेवानिवृत्त मेजर जनरल के बेटे पर आरो ये था, कि उन्होंने तत्कालीन सेनाध्यक्ष जनरल क़मर जावेद बाजवा को दिए गए एक्सटेंशन पर सवाल उठाया था और उनके इस्तीफे की मांग की थी।
When a young boy was convicted under Pakistan Army Act in 2021 @ImranKhanPTI was PM and we warned at that time civilian government must oppose the conviction of a civilian under Army act. Nobody listened to us. How will PTI now oppose cases under Army act? https://t.co/6IzHJp2BcY
— Hamid Mir حامد میر (@HamidMirPAK) May 15, 2023
बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, पेशे से कंप्यूटर इंजीनियर मेजर जनरल (आर) जफर मेहदी अस्करी के बेटे हसन अस्करी को पाकिस्तान दंड संहिता की धारा 131 के तहत जनरल कमर जावेद बाजवा को लेकर लिखी गई चिट्ठी के लिए दोषी ठहराया गया था। और उन्हें गुजरांवाला कैंट में फील्ड जनरल कोर्ट मार्शल द्वारा सजा सुनाई गई थी।
हसन अस्करी पर आरोप लगाया गया था, कि उन्होंने तत्कालीन आर्म चीफ जनरल बाजवा को लेकर चिट्ठी इसलिए लिखी थी, ताकि बाहरी दुश्मनों के इशारे पर सेना में अराजकता फैलाई जा सके।
पाकिस्तानी पीनल कोड के तहत धारा 131 ऐसे आरोपियों के खिलाफ मुकदमा चलाया जाता है।
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कितना खतरनाक है पाकिस्तानी सेना का आर्मी एक्ट?
पाकिस्तानी सेना का आर्मी एक्ट कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं, कि 1971 में पाकिस्तान ने बांग्लादेश आंदोलन के दौरान सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को इस कानून के तहत फांसी की सजा दे दी थी। इस कानून को अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने पिछले साल 'नरसंहार' कहा था। और पाकिस्तानी सेना की कार्रवाई को 'मानवता के खिलाफ अपराध' करार दिया था।
फांसी की सजा मिले, तो हैरानी नहीं
पाकिस्तान अपने प्रधानमंत्रियों की हत्या करने या फिर उन्हें जेल में बंद रखने के लिए कुख्यात रहा है। कई पाकिस्तानी पत्रकार तो यहां तक कहते हैं, कि पाकिस्तान का प्रधाननमंत्री सत्ता से हटने के बाद जेल में रहता है।
पूर्व पाकिस्तानी प्रधानमंत्री जुल्फीकार अली भुट्टो भी अपने समय में पाकिस्तान में कम प्रसिद्ध नहीं थे, लेकिन तमाम देशों की अपील के बाद भी उन्हें फांसी पर लटका दिया गया था। जुल्फीकार अली भुट्टो की फांसी रोकने की कोशिश पूरी दुनिया की तरफ से की गई थी, लेकिन पाकिस्तानी आर्मी ने किसी की भी बात नहीं सुनी थी।
पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जनरल परवेज मुसर्रफ को भी पाकिस्तान की एक अदालत में फांसी की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, वो देश से फरार होने में कामयाब रहे। बताया जाता है, कि चूंकी वो सेना के पूर्व जनरल रह चुके थे और अगर उन्हें फांसी मिलती, तो सेना कमजोर दिखती, इसीलिए सेना ने ही उन्हें देश से भागने में मदद की थी, अन्यथा उन्हें भी फांसी से लटका दिया जाता।
और अब इमरान खान...। पाकिस्तानी सेना के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनीर ने संकेत दिए हैं, कि इमरान खान और उनके समर्थकों के खिलाफ आर्मी एक्ट के तहत मुकदमा चलाया जा सकता है, लिहाजा इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है, कि उन्हें उम्र कैद या फांसी की सजा नहीं मिल सकती है।
क्योंकि, इमरान खान ने अकेले ही पाकिस्तानी सेना को जितना नुकसान पहुंचाया है, और जिस तरह से देश की एक बड़ी आबादी को सेना के खिलाफ खड़ा कर दिया है, उसे सेना अपने खिलाफ जंग के तौर पर देख रही है और पाकिस्तानी सेना, अपने लोगों के खिलाफ जंग कभी नहीं हारी है, ये इतिहास गवाह रहा है।












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