कट्टरपंथियों ने मचाया कोहराम तो इमरान ने दिखाया भारत का डर, भारतीय मीडिया पर निकाली भड़ास
इमरान खान ने पाकिस्तान में कट्टरपंथियों को भारत का नाम पर लेकर डराने की कोशिश की है वहीं भारतीय मीडिया पर अपनी खीझ निकाली है।
इस्लामाबाद, अप्रैल 20: पाकिस्तान में हर गली, हर नुक्कड़ और हर चौराहे पर आपको कोई ना कोई कट्टरपंथी दिख जाएगा। और ये कट्टरपंथी अकसर पाकिस्तान में फसाद करते रहते हैं। इस वक्त कट्टरपंथी और मजहब के नाम पर लोगों को भड़काने वाला संगठन तहरीक-ए-लब्बैक का पूरे पाकिस्तान में उपद्रव जारी है और पाकिस्तान में गृहयुद्ध जैसे हालात हैं और इमरान खान सरकार इन कट्टरपंथियों के आगे नतमस्तक हो चुकी है। जब इमरान खान पाकिस्तानी कट्टरपंथियों को काबू नहीं कर पाए तो उन्होंने भारत के नाम का सहारा लेना शुरू किया है। इमरान खान ने कहा है कि पाकिस्तान में जो कट्टरपंथी आग लगाए हुए हैं, उससे दुश्मन देश को फायदा होगा।

कट्टरपंथियों को भारत का डर
Photo Credit: Bobek
पाकिस्तान के करीब करीब हर बड़े शहर में इस वक्त फ्रांस के नाम पर प्रदर्शन हो रहा है। तहरीक-ए-लब्बैक के कार्यकर्ता इमरान खान सरकार से फ्रांस से हर रिश्ते को खत्म करने और फ्रांस के राजदूत को पाकिस्तान से निकालने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में कट्टरपंथियों को समझाने के लिए इमरान खान ने पाकिस्तानी अवाम को संबोधित करना शुरू किया लेकिन उन्होंने अपनी सरकार की नाकामी का ठीकरा हमेशा की तरफ भारत पर फोड़ दिया। इमरान खान ने कहा कि अपने उलेमाओं से मैं खासतौर पर कहना चाहता हूं कि आपको मेरे साथ मिलकर हमारी मदद करनी चाहिए। ये जो हो रहा है इससे पाकिस्तान को नुकसान पहुंच रहा है। हमारे 800 से ज्यादा पुलिसवाले घायल हैं और अस्पताल में भर्ती हैं और ये जो हो रहा है इससे किसको फायदा पहुंच रहा है।

भारत पर फोड़ा नाकानी का ठीकरा
पाकिस्तान में अगर एक ईंट भी इधर से उधर होता है तो उसके लिए वहां के नेता भारत को जिम्मेदार ठहरा देते हैं और भारत का डर लोगों को दिखाकर वहां के नेता बच भी जाते हैं और पाकिस्तानी जनता उन्हें माफ भी कर देती है। इसीलिए पाकिस्तान की स्थिति ये है कि मजहब के नाम पर कौन किसका कब गला उतार दे, नहीं कहा जा सकता है। ईशनिंदा कानून के नाम पर ही अभी पाकिस्तान में आग लगी हुई है। फ्रांस ने कट्टरपंथियों के खिलाफ आवाज बुलंद की और दुनिया के 52 मुस्लिम मुल्क ने निंदा कर बात खत्म कर दिया लेकिन पाकिस्तान के कट्टरपंथी पाकिस्तान को जलाने में लगे हुए है। इमरान खान की पार्टी ने ही अपनी राजनीतिक फायदा के लिए तहरीक-ए-लब्बैक को पाला पोसा और उनकी कट्टरता के फावड़े से अपनी सियासी खेती की लेकिन अब जब तहरीक-ए-लब्बैक इमरान खान के लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन चुकी है तो बचने के लिए इमरान खान बार बार भारत की तरफ इशारे कर रहे हैं। इससे भारत को तो रत्ती भर फर्क नहीं पड़ेगा, हां पाकिस्तान जहन्नुम में जरूर जाएगा।

भारतीय वेबसाइट्स पर निशाना
इमरान खान सरकार नाकाम है और पाकिस्तान में कट्टरपंथी सड़कों को तोड़ रहे हैं, बिजली के खंबों को गिरा रहे हैं, डीएसपी का माथा फोड़ रहे हैं, पुलिसवालों को बीच रास्ते पर पीट रहे हैं, पाकिस्तान की आर्मी जिहादी नारे लगा रही है, इसकी कवरेज पूरी दुनिया में हो रहा है। पूरी दुनिया की मीडिया पाकिस्तान की जहालत पर हंस रही है और पाकिस्तान को जाहिलों और मुर्खों का मुल्क कह रही है लेकिन इमरान खान को भारतीय मीडिया और वेबसाइट्स से समस्या है। इमरान खान ने कहा कि पाकिस्तान में जो कुछ हो रहा है उसमें हिंदुस्तान की वेबसाइट्स कूद पड़ी हैं। इससे दुश्मनों को फायदा हुआ है। हमारी कौम को नुकसान हुआ है। हम अपने मकसद पर ऐसे प्रदर्शन से तो नहीं पहुंच पाएंगे। इमरान खान ने कहा है कट्टरपंथी जो कर रहे हैं इससे विदेश देशों को कोई फर्क नहीं पड़ेगा, भले ही हम अपना कितना भी नुकसान कर लें।

कट्टरपंथी और इमरान का मकसद एक
तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान में शरीयत कानून लागू करना चाहती है। हालांकि, पाकिस्तान एक मुस्लिम देश है और पाकिस्तानी संसद द्वारा बनाए गये कानूनों पर वहां के मुल्ला-मौलाना नजर रखते हैं लेकिन तहरीक-ए-लब्बैक चाहती है कि पाकिस्तान में पूरी तरह से शरीयत कानून लागू हो और सभी फैसले शरीयत के हिसाब से हो। तहरीक-ए-लब्बैक किसी और मजहब को मान्यता नहीं देती है, खासकर हिन्दुओं से इन्हें भयानक चिढ़ है। पाकिस्तान में जिन हिन्दू लड़कियों को अगवा कर धर्म परिवर्तन करवाया जाता है, उन घटनाओं में तहरीक-ए-लब्बैक का बड़ा हाथ है। और अवाम को संबोधित करते हुए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा कि तहरीक-ए-लब्बैक का जो मकसद है, वही मकसद उनका भी है, बस तरीका अलग अलग है। यानि, इमरान खान को लिबरल बताने वाले दुनियाभर के वामपंथी पत्रकारों के मुंह पर ये एक तमाचा है। दरअसल, इमरान खान ने कल अपनी तकरीर में साफ कर दी है कि उनके लिए बस एक मजहब मायने रखता है और कुछ नहीं। और इमरान खान को लिबरल बताना सिर्फ और सिर्फ एक प्रोपेगेंडा है।












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