श्रीलंका संकट के बीच IMF बॉस ने कर्ज में डूबे देशों को दी गंभीर चेतावनी, वक्त रहते भारत होगा सतर्क?

श्रीलंका पर कुल करीब 51 अरब डॉलर का कर्ज है, जिसमें से उसे साल 2027 तक 28 अरब डॉलर का भुगतान करना है, लेकिन श्रीलंका के पास विदेशी मुद्रा भंडार ही खत्म हो चुका है।

वॉशिंगटन, जुलाई 11: पिछले कई महीनों से श्रीलंका बहुत बुरे आर्थिक संकट से गुजर रहा है और पिछले दो दिनों से श्रीलंका से जो तस्वीरें आई हैं, वो काफी अराजक हैं। देश के राष्ट्रपति को प्रदर्शनकारियों ने उनके सरकारी आवास से भागने पर मजबूर कर दिया, प्रधानमंत्री का घर जला दिया और अभी भी प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति भवन में ही मौजूद हैं। श्रीलंका से आ रही रिपोर्ट्स बताती हैं, कि कर्ज लेकर विकास की योजनाएं चलाना हमेशा बुद्धिमत्तापूर्ण नहीं होती हैं और एक बहुत पुरानी भारतीय कहावत को भी चरितार्थ करती है, कि ऋण लेकर घी नहीं पीना चाहिए और इसी बाबत इंटरनेशनल मॉनेट्री फंड ने दुनिया के उन सभी देशों को गंभीर चेतावनी दी है, जो कर्ज में डूबे हुए हैं।

श्रीलंका के भविष्य पर बने हुए हैं सवाल

श्रीलंका के भविष्य पर बने हुए हैं सवाल

श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, कि वो 13 जुलाई को राष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे देंगे। वहीं, श्रीलंका के पीएम रानिल विक्रमसिंघे ने भी अपने पद छोड़ने के फैसले की घोषणा कर दी है। लेकिन, सात दशकों के इतिहास में अब तक के सबसे खराब आर्थिक संकट से निपटने के लिए 2 करोड़ 20 लाख की आबादी वाले इस द्वीप देश के भविष्य पर सवाल बने हुए हैं। श्रीलंका की सभी राजनीतिक पार्टियों ने एकजुट होकर सरकार बनाने का फैसला किया है और वो फैसला कितना कारगर होता है, वो आने वाला वक्त ही बताएगा। लेकिन, फिलहाल, श्रीलंका इस संकट से कैसे बाहर आएगा, ये एक बड़ा और कठिन सवाल है।

आईएमएफ बॉस की कड़ी प्रतिक्रिया

आईएमएफ बॉस की कड़ी प्रतिक्रिया

श्रीलंका से आ रही अराजकता भरी तस्वीरों ने पूरी दुनिया को कर्ज लेकर विकास करने की नीति पर फिर से सोचने पर मजबूर कर दिया है और आईएमएफ के बॉस ने वैश्विक कर्ज को लेकर जी20 देशों को कड़ी प्रतिक्रिया दी है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आईएमएफ के मैनेजिंग डायरेक्टर क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, "यह एक ऐसा विषय है जिस पर हम संतुष्ट नहीं हो सकते हैं। यदि विश्वास इस हद तक टूट जाता है, तो फिर नीचे ही गिरा जाता है और फिर आप नहीं जानते हैं, कि यह कहां जाकर खत्म होगा। G20 नेता ऐसी स्थिति में नहीं फंसना चाहते हैं, जहां ये मुद्दे बातचीत पर हावी हों और हम कोई प्रगति नहीं कर रहे हों'। आईएमएफ बॉस की प्रतिक्रिया इसलिए भी एक बड़ी चेतावनी है, क्योकि कई एक्सपर्ट वैश्विक मंदी की आशंका जता चुके हैं और ऐसे में दुनिया के विकासशील देशों के लिए आगे का रास्ता आसान नहीं होने वाला है।

श्रीलंका पर कितना है कर्ज

श्रीलंका पर कितना है कर्ज

अलग अलग रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रीलंका पर कुल करीब 51 अरब डॉलर का कर्ज है, जिसमें से उसे साल 2027 तक 28 अरब डॉलर का भुगतान करना है, लेकिन श्रीलंका के पास विदेशी मुद्रा भंडार ही खत्म हो चुका है, लिहाजा अब श्रीलंका के पास ना तो कर्ज चुकाने के लिए पैसे हैं और ना ही विदेशों से सामान खरीदने के लिए ही पैसे हैं। इसीलिए श्रीलंका पेट्रोल और गैस नहीं खरीद पा रहा है और स्थिति बेकाबू हो जा रही है। लिहाजा, रविवार को श्रीलंका में विपक्षी पार्टियों के बीच बैठक की गई है, जिसमें नई सामूहिक सरकार के गठन का फैसला लिया गया है। श्रीलंका के कर्ज का एक बड़ा हिस्सा चीन का है, जो पहले ही श्रीलंका से हंबनटोटा बंदरगाह छीन चुका है और इस बार भी चीन ने श्रीलंका को कर्ज रीपेमेंट रीस्ट्रक्चर में किसी भी तरह का बदलाव कर छूट देने से इनकार कर दिया था, जिसकी गुजारिश खुद राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने की थी। लिहाजा, श्रीलंका पर प्रेशर और बन गया और अब श्रीलंका ने खुद को दिवालिया घोषित कर दिया है।

भारत के लिए भी सतर्क होने का समय

भारत के लिए भी सतर्क होने का समय

ताजा आंकड़ों से पता चला है कि, भारत का व्यापार घाटा सिर्फ जून महीने में बढ़कर रिकॉर्ड 25.63 अरब डॉलर हो गया है, जो भारत सरकार के लिए बड़ा टेंशन है, क्योंकि भारत सरकार की कोशिश लगातार व्यापार घाटे को पाटने की रही है, ताकि देश का निर्यात बढ़ाने के साथ साथ विदेशी मुद्रा भंडार को बढ़ाया जाए, लेकिन इस पहल में सरकार को बड़ा झटका लगा है। रिकॉर्ड व्यापार घाटे के पीछे की सबसे बड़ी वजह पेट्रोलियम, कोयले और सोने के आयात में भारी बढ़ोतरी को बताया जा रहा है, वहीं जून महीने में भारत के निर्यात में भारी गिरावट भी दर्ज की गई है, जिससे रुपये में और गिरावट आई है और बड़े करेंट अकाउंट डेफिसिट (सीएडी) के बारे में चिंता बढ़ गई है। सोमवार को जारी भारत सरकार के आधिकारिक आंकड़ों से पता चला है कि, जून में भारत का व्यापारिक निर्यात 16.8% बढ़कर 37.9 अरब डॉलर हो गया है, जो मई के मुकाबले 20.5% से कम था, जबकि भारत के आयात में 51% का उछाल आया है और जून महीने में भारत का आयात बढ़कर 63.58 अरब डॉलर हो गया है। वहीं, पिछले साल से तुलना करें, तो साल 2021 के जून महीने में भारत का व्यापार घाटा 9.61 अरब डॉलर था।

घट रहा है भारत का विदेशी मुद्रा भंडार

घट रहा है भारत का विदेशी मुद्रा भंडार

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि, 1 जुलाई को भारतीय विदेशी मुद्रा भंडार 588.314 अरब डॉलर था। इसमें से विदेशी मुद्रा संपत्ति 524.745 अरब डॉलर थी, जबकि सोने में रखे गए भंडार का मूल्य 40.422 अरब डॉलर था। शेष राशि को अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास स्पेशल ड्रॉविंग राइट्स और रिजर्व के रूप में रखा जाता है। भारतीय विदेशी मुद्रा भंडार में पिछले साल 3 सितंबर के बाद से लगातार कमी हो रही है और 3 सितंबर 2021 को भारतीय विदेशी मुद्रा भंडार में 642.453 अरब डॉलर की राशि जमा थी, जिसमें अभी तक 55 अरब डॉलर की गिरावट आ चुकी है। वहीं, भारत के केंद्रीय बैंक ने फरवरी से अब तक मुद्रा की रक्षा के लिए 46 अरब डॉलर से अधिक खर्च किए हैं। लिहाजा, भारत को भी वक्त रहते सतर्क हो जाना चाहिए।

विदेशी कर्ज से बढ़ रही है परेशानी

विदेशी कर्ज से बढ़ रही है परेशानी

भारतीय रिजर्व बैंक के मुताबिक, पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले भारत पर विदेशी कर्ज में 47.1 अरब डॉलर का इजाफा हुआ है और इस वित्तीय वर्ष में भारत पर कुल विदेशी कर्ज बढ़कर 620.7 अरब डॉलर हो गया है। हालांकि, पिछले वित्तीय वर्ष से तुलना करें, तो विदेशी कर्ज हमारी कुल जीडीपी का 19.9 प्रतिशत रह गया था, जो उससे पिछले वित्त वर्ष यानि 2020-21 में 21.2 प्रतिशत था। भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के ऊपर दीर्घकालिक कर्ज (मूल परिपक्वता एक साल से ज्यादा) 499.1 अरब डॉलर हो गया है, जो मार्च 2021 की तुलना में 26.5 अरब डॉलर ज्यादा है। जबकि, इस वित्तीय वर्ष में भारत पर अल्पकालिक कर्ज में 19.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो एक साल पहले 17.6 प्रतिशत था। लेकिन, अल्पकालिक कर्ज ने ही भारत सरकार के लिए परेशानी खड़ी कर दी है, क्योंकि भारत को इस साल ही अल्पकालिक ऋण का भुगतान करना है।

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