ICHRRF ने कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार को माना 'नरसंहार', कहा- जल्द दोषियों को मिले सजा
वॉशिंगटन, मार्च 28। 'द कश्मीर फाइल्स' फिल्म के आने के बाद से 1990 में कश्मीरी पंडितों के साथ घाटी में हुई ज्यादती की हर तरफ चर्चा है। फिल्म में कश्मीरी पंडितों की हत्या को नरसंहार बताया है, जिसको लेकर एक तबका सवाल खड़े कर रहा है। इस फिल्म के आने के बाद से यह सवाल लगातार बना हुआ है कि क्या कश्मीरी पंडितों के साथ जो हुआ वो नरसंहार था या नहीं? ऐसे में अमेरिका स्थित मानवाधिकार और धार्मिक स्वतंत्रता के लिए अंतर्राष्ट्रीय आयोग (ICHRRF) ने कश्मीरी पंडितों पर हुए अत्याचार को 'नरसंहार' करार दिया है।

'कश्मीरी पंडितों के साथ हो इंसाफ'
आयोग ने 1989 से लेकर 1991 तक कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के साथ हुई बर्बरता को नरसंहार बताया है। साथ ही आयोग ने अन्य मानवाधिकार संगठनों, अंतरराष्ट्रीय निकायों और भारत सरकार से ये आह्वान किया है कि इस घटना को नरसंहार ही स्वीकार किया जाए और पीड़ित लोगों के साथ इंसाफ किया जाए।
'दोषियों को दी जाए सख्त से सख्त सजा'
आयोग ने कहा है कि कश्मीरी पंडितों की आपबीती को पूरी दुनिया तक पहुंचना जरूरी है, उनकी पिछली चुप्पी और राजनीतिक औचित्य से निष्क्रियता के प्रभाव पर गंभीरता से आत्मनिरीक्षण करना चाहिए और उचित मान्यता देनी चाहिए। आयोग ने कहा है कि कश्मीरी पंडितों का नरसंहार करने वाले लोगों को सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए। आयोग ने माना है कि यह जातीय और सांस्कृतिक नरसंहार था।
27 मार्च को आयोग ने की थी अहम सुनवाई
आपको बता दें कि ICHRRF एक अमेरिका आधारित गैर-लाभकारी संस्था है जो निरंतर निगरानी, नीति हस्तक्षेप और सहयोग के माध्यम से मानव अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता को बनाए रखने पर केंद्रित है। ICHRRF ने 27 मार्च, 2022 को कश्मीरी हिंदू नरसंहार (1989-1991) के मुद्दे पर एक विशेष जन सुनवाई की, जिसके दौरान जातीय और सांस्कृतिक सफाई के कई पीड़ितों और बचे लोगों ने शपथ के तहत गवाही दी और साक्ष्य प्रस्तुत किए।












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