ताइवान के पास कितनी है सैन्य ताकत, अगर चीन ने हमला किया, तो कितनी देर टिकेगा ट्वीप देश?
यूक्रेन पर रूस ने जब हमला किया था, उस वक्त यही कहा गया था, कि ये लड़ाई महज एक हफ्ते तक चल सकती है, लेकिन अब ये लड़ाई छठवें महीने में प्रवेश करने वाली है। लिहाजा, युद्ध के अंजाम को लेकर कुछ नहीं कहा जा सकता है।
ताइपे, अगस्त 02: यूएस हाउस की स्पीकर नैन्सी पेलोसी की संभावित ताइवान यात्रा को लेकर अमेरिका और चीन आमने-सामने हैं और चीन ने साफ तौर पर कहा है, कि अगर पेलोसी का विमान ताइवान में उतरता है, तो फिर जो अंजाम होगा, उसके लिए अमेरिका जिम्मेदार होगा। वहीं, चीन के सरकारी अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है, कि अपनी संप्रभुता और अखंडता के लिए चीन की सेना पीएलए युद्ध से पीछे नहीं हटेगी। लिहाजा, एशिया में दो सुपरपॉवर्स एक दूसरे के सामने हैं और जंग की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में जानना जरूरी है, कि अगर ताइवान पर चीन हमला करता है, तो ताइवान कितनी देर टिक सकता है?

कितना शक्तिशाली है ताइवान?
ताइवान एक छोटा देश है, लिहाजा उसके पास सैन्य शक्ति तो कम है ही, बल्कि चीन के मुकाबले कुछ भी नहीं है, लेकिन ताइवान को अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन का मजबूती से समर्थन मिला हुआ है। ताइवान की रक्षा के लिए हमेशा अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर साउथ चायना सी में रहते हैं और इस वक्त अमेरिका के साथ साथ जापान और ब्रिटेन के एयरक्राफ्ट कैरियर भी भारी हथियारों के साथ साउथ चायना सी में मौजूद हैं। ताइवान के राष्ट्रपति ये भी मानती हैं कि ताइवान जितनी ज्यादा दूसरे देशों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करता है, चीन उतना ज्यादा प्रेशर बनाता है। इसी साल जनवरी महीने में ताइवान की राष्ट्रपति त्साई के संबोधन के बाद, ताइवान के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने मिसाइल लांचर और बख्तरबंद वाहनों सहित हथियारों की एक श्रृंखला दिखाई खी। वहीं, ताइवान की सेना ने लड़ाकू जेट और हेलीकॉप्टर्स का भी प्रदर्शन किया था।

कैसे हुआ ताइवान का निर्माण
आपको बता दें कि, जब माओ के नेतृत्व में कम्यूनिस्ट पार्टी ने चीन की लोकतांत्रिक पार्टी के नेताओं की हत्या करनी शुरू कर दी थी, तो लोकतांत्रिक नेता अपनी जान बचाकर ताइवान भागने लगे थे। 1911 में डॉ. सन-यात सेन के नेतृत्व में लोकतांत्रिक राष्ट्रवादी पार्टी ने चीन में क्रांति लाने की कोशिश की थी और 2 हजार 136 सालों से चीन में चली आ रही राजशाही सत्ता को उखाड़ फेंका था और फिर चीन में रिपब्लिकन युग की शुरूआत की थी। लेकिन चीन में माओ जेदांग ने 1949 में पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चायना की स्थापना की और डॉ. सन-यात सेन को अपने समर्थकों के साथ चीन छोड़कर भागना पड़ा। कम्यूनिस्ट माओ पर आरोप है, कि उन्होंने लाखों लोगों को मरवा दिया था। चीन से भागने के बाद डॉ.सन-यात सेन ने 1949 में एक स्वतंत्र देश ताइवान की स्थापना की, जो पहले चीन का ही एक द्वीप था,जिसपर एक बार फिर से चीन कब्जा करने की कोशिश कर रहा है।

सैन्य ताकत, चीन बनाम ताइवान
चीन के सामने ताइवान की सैन्य ताकत ना के बराबर है और बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ स्ट्रेटेजिक स्टडीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, कि चीन के पास हर तरह के सैनिकों को मिलाने के बाद करीब 20 लाख 35 हजार एक्टिव सैनिक हो जाते हैं। जबकि, ताइवान के पास सिर्फ 1.63 लाख ही सक्रिय सैनिक हैं। यानि, ताइवान के मुकाबले चीन के पास करीब 12 गुना ज्यादा सैनिक हैं। वहीं, बात अगर थल सेना की करें, तो चीन के पास 9.65 लाख पैदल सैनिक हैं, जबकि ताइवान के पास सिर्फ 88 हजार ही पैदल सैनिक हैं। वहीं, चीन की नौसेना में 2 लाख 60 हजार एक्टिव सैनिक हैं, जबकि ताइवान की नौसेना के पास सिर्फ 40 हजार सैनिक ही हैं। वहीं, बात अगर ताइवान की वायुसेना की करें, तो ताइवान के पास 35 हजार जवान हैं, जबकि चीन की वायुसेना में 4 लाख 15 हजार सैनिक हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है, कि पूरी ताकत लगाने के बाद ताइवान सिर्फ चीन के हमले को थोड़ा धीमा कर सकता है, उसके अलावा ताइवान के पास ज्यादा कुछ करने के लिए नहीं होगा।

क्या चीन के लिए हमला करना होगा आसान?
यूक्रेन पर रूस ने जब हमला किया था, उस वक्त यही कहा गया था, कि ये लड़ाई महज एक हफ्ते तक चल सकती है, लेकिन अब ये लड़ाई छठवें महीने में प्रवेश करने वाली है। लिहाजा, युद्ध के अंजाम को लेकर कुछ नहीं कहा जा सकता है और चीन के लिए ये लड़ाई उतना आसान भी नहीं होगा। विशालकाय जहाजों और अन्य छोटे चीनी लैंडिंग जहाजों के बावजूद चीन, ताइवान पर सफलतापूर्वक आक्रमण करने के लिए आवश्यक सामग्री और सैनिकों को लाने और ले जाने के लिए अपर्याप्त हैं। पिछले साल द जेम्सटाउन फाउंडेशन के लिए हाल के एक लेख में यूएस नेवल वॉर कॉलेज के चाइना मैरीटाइम स्टडीज इंस्टीट्यूट के ट्रेनर कॉनर कैनेडी ने कहा कि "एक कामयाब क्रॉस-स्ट्रेट लैंडिंग के लिए कई महत्वपूर्ण बातों को ध्यान में रखने की आवश्यकता होती है। और अगर हमला करने वाला देश फॉलो-अप का विकल्प नहीं बनाता है, तो उसे भयानक नुकसान उठाना पड़ सकता है और परिणामस्वरूप उसकी हार भी हो सकती है।

'आखिरी दम तक लड़ेगा ताइवान'
ताइवान के विदेश मंत्री ने पिछले साल अप्रैल में कहा था कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है तो पूरा ताइवान लड़ाई लड़ेगा और आखिरी सांस तक लड़ेगा। ताइवान के विदेश मंत्री जोसेफ वू ने चीन को आंख में आंख दिखाते हुए कहा था कि 'मैं साफ तौर पर ये कहना चाहता हूं कि ताइवान की सुरक्षा करना हमारा कर्तव्य और हमारी जिम्मेदारी है। और अगर हम अपनी सुरक्षा करने में नाकामयाब रहते हैं तो हमें किसी और देश को ताइवान की सुरक्षा करने के लिए सेक्रिफाइस करने को कहने का हक नहीं बनता है, इसीलिए हम अपनी सुरक्षा को लेकर काफी सतर्क हैं।' ताइवान के विदेश मंत्री ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ताइवान के इलाके में चीन के बढ़ते प्रभाव पर चिंता जताई थी और आखिरी दम तक चीन का मुकाबला करने की बात कही थी।












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