US Election 2024: कितने अहम हैं हिन्दू वोट? मुसलमानों की नाराजगी के बाद बाइडेन के लिए बन सकते हैं मसीहा
US Presidential Election 2024: अमेरिका में इसी साल 5 नवंबर को राष्ट्रपति चुनाव होगा। बीते बुधवार को डोनाल्ड ट्रंप आयोवा कॉकस जीत चुके हैं और अगले सप्ताह होने वाले न्यू हैंपशायर प्राइमरी चुनाव जीतने की तैयारी में भिड़ गए हैं। इसमें उनका साथ हाल ही में चुनावी दौड़ से हटे भारतवंशी विवेक रामास्वामी दे रहे हैं।
अमेरिका का चुनाव, जियो पॉलिटिक्स के लिए नये रास्ते बनाता है और ग्लोबल वर्ल्ड ऑर्डर में सबसे ज्यादा महत्व रखता है, इसीलिए यहां के चुनाव पर पूरी दुनिया की नजर होती है। लिहाजा हम अमेरिका की चुनाव को लेकर अपने पाठकों के लिए स्पेशल सीरिज शुरू कर चुके हैं। इसमें हम अमेरिकी चुनाव से संबंधित महत्वपूर्ण बातें आपसे शेयर कर रहे हैं।

आज इस सीरिज का तीसरा भाग हम प्रकाशित कर रहे हैं। हमें उम्मीद है, कि हमारी ये सीरिज आपको काफी पसंद आ रही होगी। आपको इस सीरीज के अन्य हिस्से इसी स्टोरी में मिल जाएंगे।
7 अक्टूबर को इजराइल और हमास के बीच जंग शुरू हो गया। इस दौरान बाइडेन सरकार ने इजराइल को गाजा और वेस्ट बैंक में ऑपरेशन चलाने में काफी मदद की। अमेरिका ने इसके लिए नेतन्याहू सरकार को फंड और हथियार उपलब्ध कराए। इससे अमेरिका के मुस्लिम नेता भड़के हुए हैं।
बाइडेन से नाराज मुस्लिम मतदाता
मुस्लिम लीडर्स ने वादा किया है कि जिन भी उम्मीदवारों ने फिलिस्तीनियों के खिलाफ जाकर इजराइली हमले का समर्थन किया है, उसे कोई भी मुस्लिम, अरब या उनके सहयोगी मतदाता वोट नहीं देंगे। अमेरिका में करीब 40 लाख मुस्लिम रहते हैं। इसका थोड़ा सा हिस्सा भी अगर डेमोक्रेटिक पार्टी से छिकटता है तो इससे बाइडेन को काफी नुकसान होगा।
अमेरिकी में मुस्लिम मतदाताओं की नाराजगी को देखते हुए भारतीय मूल के अमेरिकी हिन्दू नागरिक नया राष्ट्रपति चुनने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। अमरीका में भारतीय मूल के करीब 45 लाख लोग रहते है। इसमें से 20 लाख से अधिक मतदाता हैं।
डेमोक्रेटिक पार्टी की एंटी हिन्दू छवि
यूं तो भारतीय अमरीकी ऐतिहासिक रूप से डेमोक्रेट्स को पसंद करते रहे हैं लेकिन हाल के कुछ समय में इस पार्टी की धारणा एंटी हिन्दू की बन गई है। इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप की भारत समर्थक छवि और विवेक रामास्वामी, निक्की हेली जैसे भारतवंशी नेताओं की वजह से रिपब्लिकन पार्टी में हिन्दू-अमेरिकी मतदाताओं का रुझान बढ़ रहा है।
फंडिंग की वजह से बढ़ा प्रभाव
अमेरिका में हिन्दू वोटर 1 फीसदी के लगभग हैं मगर वे 6 फीसदी टैक्स चुकाते हैं और ये आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। भारतवंशी अमेरिका का सबसे धनाढ्य प्रवासी समुदाय हैं और उनकी पोलिटिकल-फंडिंग मायने रखती है। हिन्दुओं के फंडिग की बढ़ती ताकत के कारण अमेरिका में भारतवंशियों का प्रभाव बढ़ता जा रहा है।
अमेरिका में चुनाव लड़ना बेहद महंगा
अमेरिका में दुनिया के सबसे महंगा चुनाव लड़ा जाता है। यहां पर प्रति उम्मीदवार औसतन 1 अरब डॉलर से अधिक का खर्चा होता है। ऐसे में पैसे की अमहियत समझी जा सकती है। यही वजह है कि जिस अमेरिका में एक दशक पहले के चुनाव तक हिन्दू वोटों की कोई खास पूछ नहीं थी, अब उनका समर्थन हासिल करने के लिए दोनों ही प्रमुख पार्टियां एड़ी-चोटी का जोर लगा रही हैं।
पहली बार ट्रंप ने हिन्दुओं को लुभाया
वो डोनाल्ड ट्रंप थे जिन्होंने पहली बार हिन्दू मतों की अहमियत को समझा था। 2016 में ट्रंप ने पहली बार इस मतदाता वर्ग तक पहुंच बनाई थी। इस साल ट्रंप ने न्यू जर्सी में न सिर्फ हिंदुओं की रैली को संबोधित किया, बल्कि उनका परिवार वर्जीनिया और फ्लोरिडा जैसे स्विंग स्टेट्स में हिंदू मंदिर भी गए थे।
हिन्दुओं को लुभाने के लिए कैंपेन
पिछली बार 2020 में हुए चुनाव में तो ट्रंप कैंप ने 'हिंदू वॉयस फॉर ट्रंप' अभियान की शुरुआत कर दी थी। रिपब्लिकन पार्टी को ऐसा करते देख भला डेमोक्रेट्स कैसे पीछे रहते। ऐसे में बाइडन कैंप की तरफ से 'हिंदू अमेरिकंस फॉर बाइडन' कैंपेन चलाया गया था। इस दोनों कैंपन में जबरदस्त संघर्ष देखने को मिला था।
ट्रंप को हिन्दू मतदाताओं का समर्थन बढ़ा
रिपोर्ट के मुताबिक 2016 के चुनावों में 84 फीसदी भारतीय मतदाताओं ने हिलेरी क्लिंटन को वोट दिया था जबकि अगले चुनाव 2020 के चुनावों में 74 फीसदी लोगों ने जो बाइडेन को वोट दिया। यानी कि 2016 में सिर्फ 16 फीसदी हिन्दू-अमेरिकी वोट पाने वाले ट्रंप को 4 साल बाद ही 26 फीसदी भारतवंशी मतदाताओं का समर्थन मिलने लगा। महज 4 वर्षों में आया ये एक बड़ा बदलाव था।
सीरीज-1
हिन्दू वोट छिटक रहे हैं, ये आभास सत्ताधारी पार्टी को भी है। यही वजह है कि जो बाइडेन की डेमोक्रेटिक पार्टी ने हिंदू वोटर्स को ठोस वोटबैंक के रूप एकजुट करने के लिए हिंदू डेमोक्रेटिक गठबंधन (ADC) लॉन्च किया है। इसका मकसद हिंदू हितों की रक्षा करना और समुदाय को पार्टी के साथ जोड़ना है।
स्विंग स्टेट में भारतीय आबादी अधिक
यूं तो अमेरिका में भारतीय मूल के वोटर काफी कम हैं लेकिन स्विंग स्टेट्स में भारवंशी मतदाताओं की आबादी का अनुपात अधिक है। 'स्विंग स्टेट्स' वैसे राज्य होते हैं, जहां का वोटर किसी के भी पक्ष में मतदान कर सकता है। यही वजह है कि इन राज्यों में डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन पार्टी के बीच कांटे की टक्कर होती है।
बाइडेन सरकार की संकट
इस लिहाज से फ्लोरिडा, वर्जीनिया, पेन्सिलनाविया, मिशिगन और विस्किंसन जैसे स्विंग स्टेट्स में हिंदू अमेरिकी वोट काफी निर्णायक साबित होते हैं। कहा जाता है कि ओबामा के कार्यकाल के दौरान मुस्लिम अमेरिकी मतदाताओं को खुश करने के लिए डेमोक्रेटिक पार्टी ने हिंदू अमेरिकी मतदाताओं को नाराज किया था, अब इजराइल-हमास जंग की वजह से मुस्लिम मतदाता बाइडेन सरकार से खुश नहीं हैं। ऐसे में बाइडेन सरकार के सामने दोतरफा संकट दिखाई दे रहा है...
सीरीज-2












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