बांग्लादेश में 'बांग्ला स्प्रिंग' की साजिश नाकाम, जानिए देश ने कैसे इस्लामी हिंसा का डटकर किया मुकाबला?
Bangladesh News: 18 जुलाई 2024 से बांग्लादेश बाकी दुनिया से कट गया है, क्योंकि इस्लामवादियों और उग्रवादियों के खतरनाक गठजोड़ ने प्रधानमंत्री शेख हसीना को हटाने और शरिया शासन स्थापित करने के कुख्यात लक्ष्य के साथ देश भर में जिहादी उत्पात मचाना शुरू कर दिया, जिससे देश एक नव-तालिबान राज्य में बदल गया।
इस्लामवादियों और उग्रवादियों ने बांग्लादेश टेलीविजन जैसे प्रमुख प्रतिष्ठानों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर उत्पात मचाया, मेट्रो स्टेशनों में तोड़फोड़ की, रेलवे स्टेशनों पर उत्पात मचाया, आगजनी की, एलिवेटेड एक्सप्रेसवे के टोल-प्लाजा को नुकसान पहुंचाया, पुलिस स्टेशनों को तोड़े, सरकारी कार्यालयों में आगजनी की, और पूरे देश में अराजक माहौल कायम कर दिया।

उत्पात मचाते हुए इन लोगों ने राष्ट्रीय डेटा सेंटर को तोड़ डाला, जिसकी वजह से पूरे बांग्लादेश में इंटरनेट सर्विस ठप पड़ गई है।
इस कुख्यात प्रदर्शन में अरबों डॉलर की सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को तहस-नहस कर दिया गया और आग लगा दी गई, जबकि 18 जुलाई को शुरू हुई तबाही के दौरान, बीएनपी-जमात गठजोड़, साथ ही इसके इस्लामवादी और जिहादी साथियों ने बांग्लादेश पुलिस के साथ-साथ रैपिड एक्शन बटालियन (आरएबी) के कई सदस्यों की बेरहमी से हत्या कर दी।
बांग्लादेश में आतंक कायम करना था मकसद
बांग्लादेश के प्रसिद्ध पत्रकार सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने यूरेशियन टाइम्स में इन हालातों का विस्तार से वर्णन किया है और लिखा है, कि उनकी क्रूरता इतनी तीव्र थी, कि ढाका के साथ-साथ देश के अन्य हिस्सों में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सदस्यों के शवों को फ्लाईओवर पर लटका दिया गया। यह इतनी भयावह स्थिति थी, कि इसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।
इस बीच, इस्लामवादियों और आतंकवादियों ने देश के पूर्वी हिस्से में स्थित नरसिंगडी जेल पर हमला किया, जेल के गार्डों को मार डाला, हथियार और गोला-बारूद लूट लिया और 834 सजायाफ्ता कैदियों को रिहा कर दिया, जिनमें अलकायदा की स्थानीय फ्रेंचाइजी अंसार अल इस्लाम के 6 सदस्य भी शामिल थे।
सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने आधिकारिक सूत्रों के हवाले से लिखा है, कि हमलावरों ने 56 चीनी राइफलें, 19 शॉटगन और 8,500 से अधिक गोला-बारूद लूट लिया। अब तक, अंसार अल इस्लाम के 7 सदस्यों और जमातुल मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) के 2 सदस्यों सहित 770 से ज्यादा सजायाफ्ता कैदी फरार हैं।
यह अनुमान लगाया जा रहा है, कि ये जिहादी सीमा पार करके भारत में घुसने की कोशिश कर सकते हैं, क्योंकि अंसार अल इस्लाम के पश्चिम बंगाल में कई गुप्त शिविर और ठिकाने हैं। उन्होंने लिखा है, कि इनका संबंध अलकायदा और इस्लामिक स्टेट जैसे आतंकी संगठनों से हैं।

बांग्लादेशी जेलों में कुख्यात आतंकियों का नेटवर्क
बांग्लादेशी पत्रकार के मुताबिक, बांग्लादेश की अन्य जेलों में, अंसार अल इस्लाम, जमातुल मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) और हरकत-उल-जिहाद (हूजी) सहित विभिन्न आतंकवादी संगठन महीनों से इस भीषण आतंकवादी कृत्य की तैयारी कर रहे थे, जबकि मीडिया में रिपोर्ट प्रकाशित होने के बावजूद, जेल अधिकारियों ने ऐसी खतरनाक गतिविधियों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया।
इंटरनेट आउटेज का फायदा उठाते हुए, अलकायदा से जुड़ी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी), जमात-ए-इस्लामी (जेईआई), हिज्बुत तहरीर और संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्रिटेन, यूरोपीय संघ के देशों, मलेशिया और मध्य पूर्व सहित कई देशों में जिहादी ताकतों के सदस्यों और कार्यकर्ताओं ने बांग्लादेशी प्रवासियों के साथ-साथ अंतर्राष्ट्रीय समुदायों को गुमराह करने के गुप्त मकसद से सोशल मीडिया पर गलत सूचना फैलाना शुरू कर दिया।
इस तरह के भयानक दुष्प्रचार और गलत सूचना अभियान को विश्वसनीयता प्रदान करने के लिए, अपराधियों ने स्थानीय दैनिक समाचार पत्रों के पहले पन्नों की फोटोशॉप या छेड़छाड़ की गई तस्वीरों को मनगढ़ंत जानकारी के साथ प्रसारित किया, जिससे बांग्लादेशी प्रवासियों और अन्य लोगों के बीच भ्रम और भय पैदा हुआ।

'बांग्ला स्प्रिंग' की साजिश नाकाम
इस बीच, कई विश्वसनीय स्रोतों के मुताबिक, ईद उल अजहा की छुट्टियों के दौरान कम से कम 350 प्रशिक्षित आतंकवादी बांग्लादेश में घुस आए थे, जिनका लक्ष्य पूरे बांग्लादेश में विध्वंसक और आतंकवादी गतिविधियों में शामिल होना था, जिसे उन्होंने 'बांग्ला स्प्रिंग' नाम दिया था।
इन आतंकवादियों को पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी इंटर-सर्विस इंटेलिजेंस (ISI) द्वारा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) में विभिन्न प्रशिक्षण शिविरों में गुप्त रूप से प्रशिक्षित किया गया था। इन प्रशिक्षित आतंकवादियों का एक बड़ा हिस्सा बांग्लादेश में फंसे पाकिस्तानी-बिहारियों का है, जिन्हें बीएनपी और जमात की देखरेख में प्रशिक्षण के लिए पाकिस्तान भेजा गया था।
उन्होंने सूत्रों के हवाले से बताया है, कि इनमें से कुछ आतंकवादियों को विशेष कमांडो प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि कुछ विस्फोटक बनाने में भी माहिर हैं।
सूत्र ने बताया, कि बांग्लादेश में फंसे कम से कम एक दर्जन पाकिस्तानी आत्मघाती हमलावर हैं।
एक अन्य सूत्र ने कहा है, कि जून के पहले हफ्ते से अलकायदा से जुड़ी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के कार्यवाहक अध्यक्ष और दोषी ठहराए गए आतंकवादी के सीधे निर्देश पर इस पार्टी के नेताओं, जिसमें इसकी कार्यकारिणी और सलाहकार समिति के सदस्य भी शामिल हैं, उसने "सरकार विरोधी आंदोलन को चलाने" और "प्रधानमंत्री शेख हसीना को सत्ता से हटाने" के लिए "स्पेशल फंड" में 1.5 मिलियन से 50 मिलियन बांग्लादेशी रुपये जमा किए।
बीएनपी की जेल में बंद अध्यक्ष खालिदा जिया के पूर्व प्रेस सचिव इस स्पेशल फंड के कॉर्डिनेटर के रूप में काम कर रहे हैं, जबकि जमा किए हुए धन को एक निजी टेलीविजन चैनल के मालिक और बीएनपी नेता को सौंपा गया।
सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने सूत्रों के हवाले से लिखा है, कि "बीएनपी और जमात के साथ-साथ, प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन हिज्ब-उत-तहरीर के प्रशिक्षित सशस्त्र कैडरों ने 17 जुलाई से पूरे देश में विध्वंसकारी और आतंकवादी गतिविधियों में भाग लिया, जबकि इसके सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, खासकर फेसबुक और 'एक्स' के माध्यम से बड़े पैमाने पर प्रोपेगेंडा फैलाना शुरू किया।
लेकिन, बांग्लादेश ने बांग्लादेशी सेना के साथ-साथ कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सदस्यों की सक्रिय भागीदारी के साथ देश को एक नव-तालिबान राज्य में बदलने के इस इस्लामवादी खाके का डटकर मुकाबला किया और इस साजिश को नाकाम कर दिया। लेकिन, डायरेक्ट लड़ाई में हार चुके इस इस्लामवादी गठजोड़ ने, अब बड़ी संख्या में साइबर आतंकवादियों को जुटाया है, जिनमें डेविड बर्गमैन, शाहिदुल आलम, तस्नीम खलील, लेफ्टिनेंट कर्नल (बर्खास्त) शाहिद उद्दीन खान, पिनाकी भट्टाचार्य, जुल्करनैन सैर खान सामी जैसे नाम शामिल हैं, जिनका काम फर्जी खबरें और प्रोपेगेंडा फैलाकर इंटरनेशनल मीडिया को गुमराह करना है।












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