Aditya-L1: पहले चंद्रयान और अब सूर्ययान... जानिए स्पेस मिशन से कैसे दुनिया में बढ़ रहा है भारत का रसूख?

Aditya-L1: चंद्रमा पर अपनी सफल मानवरहित लैंडिंग के एक सप्ताह से कुछ ही दिनों के बाद भारत ने सूर्य का अध्ययन करने के लिए भी एक रॉकेट लॉन्च कर दिया है। और इसके साथ ही, भारत ने दुनिया को संदेश दे दिया है, कि आने वाला वक्त भारत का है।

सूर्य की सबसे बाहरी परतों का निरीक्षण करने के लिए वैज्ञानिक उपकरण ले जाने वाला आदित्य-एल1 रॉकेट अपनी चार महीने की यात्रा के लिए शनिवार को सुबह 11:50 बजे श्रीहरिकोटा से रवाना हुआ। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की वेबसाइट पर सूर्ययान यानि आदित्य एल-1 मिशन का लाइव प्रसारण किया और करीब एक घंटे के बाद इसरो के वैज्ञानिकों ने कहा, कि मिशन कामयाब रहा है।

Aditya-L1

Aditya-L1 मिशन... एक बड़ी उपलब्धि

भारत ने पिछले महीने चंद्रयान-3 को कामयाबी के साथ चंद्रमा के दक्षिणी ध्रूव के करीब उतारकर पूरी दुनिया में अपनी साख बढ़ा ली है और अब सूर्ययान की सफल लॉन्चिंग ने बता दिया है, कि इसरो, दुनिया के स्पेस प्रोग्राम के लिए एक भरोसमंद नाम बन चुका है।

सूर्ययान और चंद्रयान मिशनों की सफलता ने, न केवल भारत को अंतरिक्ष की दौड़ में बड़ी प्रगति करने में मदद की, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी एक बड़ा बढ़ावा साबित हो सकता है।

दुनिया ने पहले ही पिछले अंतरिक्ष कार्यक्रमों से रोजमर्रा के लाभ देखे हैं, जैसे अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर जल पुनर्चक्रण के साथ स्वच्छ पेयजल की पहुंच, शिक्षा के लिए स्टारलिंक द्वारा प्रदान की गई वैश्विक इंटरनेट पहुंच, सौर ऊर्जा उत्पादन और स्वास्थ्य प्रौद्योगिकियों में प्रगति, हम अंतरिक्ष मिशनों से होने वाले लाभों से हर दिन बावस्ता होते रहते हैं।

सैटेलाइट इमेजिंग, पोजिशनिंग और नेविगेशन के वैश्विक डेटा की बढ़ती मांग के साथ, कई रिपोर्टों से संकेत मिलता है, कि दुनिया पहले से ही अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के तेजी से विकास के चरण में है। डेलॉइट की एक रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डाला गया है, कि कैसे 2013 के बाद से 1,791 कंपनियों में निजी इक्विटी द्वारा 272 अरब अमेरिकी डॉलर से ज्यादा राशि जुटाई गई है।

रसूख बढ़ने से इसरो को फायदे ही फायदे

स्पेस फाउंडेशन ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है, कि वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 2023 की दूसरी तिमाही में पहले ही $546 बिलियन अमेरिकी डॉलर के मूल्य तक पहुंच गई है। यह पिछले दशक में मूल्य में 91 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

कई देशों के लिए, नवजात अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में भाग लेने से उनकी अपनी अर्थव्यवस्थाओं के लिए बड़े पैमाने पर लाभ होने की संभावना है, साथ ही उनके नागरिकों को नए अंतरिक्ष युग में शामिल होने के लिए प्रेरणा भी मिलती है।

भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था 2025 तक 13 अरब अमेरिकी डॉलर की होने की उम्मीद है।

अगर भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी से ऑस्ट्रेलिया की सिविल स्पेस स्ट्रैटजी की तुलना की जाए, तो ऑस्ट्रेलियाई स्पेस एजेंसी का लक्ष्य 2019-2028 तक देश की जीडीपी में अपने योगदान को बढ़ाकर तीन गुना, यानि 12 अरब डॉलर करना है और 2030 तक अतिरिक्त 20,000 नौकरियां पैदा करना है।

लिहाजा, आने वाले वक्त में चंद्रयान और सूर्ययान की सफलता, भारतीय अंतरिक्ष सेक्टर को एक नई ऊंचाई तक ले जाने वाली है।

कूटनीति में जबरदस्त फायदा

सूर्ययान और चंद्रयान-3 की सफलता का महत्व वैज्ञानिक उपलब्धि के दायरे से कहीं ज्यादा है। इन अभियानों में सॉफ्ट कूटनीति की शक्ति है, जो भारत को वैश्विक मंच पर एक उज्ज्वल रोशनी प्रदान करती है।

चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव को छूने वाला पहला देश बनकर, भारत अपनी तकनीकी कौशल और अन्वेषण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रदर्शन कर रहा है।

वहीं, सूर्य पर रिसर्च करने के लिए आदित्य एल1 भेजना, विशिष्ट अंतरिक्ष यात्रा वाले देशों के बीच भारत की जगह को मजबूत करता है, जो महत्वाकांक्षी दृष्टि को मूर्त वास्तविकताओं में बदलने की उसकी क्षमता का प्रदर्शन करता है।

इस सफलता का प्रभाव विज्ञान और प्रौद्योगिकी से परे तक फैला हुआ है। चंद्रयान-3 की सफल लैंडिंग 2030 तक वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में 9% की पैठ हासिल करने के भारत के लक्ष्य को उत्साहजनक बढ़ावा देगी। यह मिशन वैश्विक अंतरिक्ष मानचित्र पर भारत की क्षमताओं में नए सिरे से विश्वास की भावना पैदा करेगा।

जबकि, सूर्य मिशन, भारत की अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी का लोहा पूरी दुनिया को मनवाने के लिए मजबूर करता है। भारत में अगले हफ्ते जी20 शिखर सम्मेलन होने वाला है और उससे पहले ये दोनों अभियान, इस वैश्विक मंच पर, ग्लोबल साउथ की आवाज बनने की दिशा में भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।

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