अरूणाचल के आखिरी भारतीय गांव से 600 बौद्ध नेताओं ने चीन को हड़काया, ड्रैगन का तिलमिलाना तय
चीन ने पिछले महीने अरूणाचल प्रदेश के 11 जगहों के नाम बदलकर, उनके नये नाम मंदारिन भाषा में रख दिए हैं। अब तक चीन अरूणाचल प्रदेश के 33 जगहों के नाम बदल चुका है।

India-China News: अरूणाचल प्रदेश के 11 जगहों के नाम बदलने की कोशिश करने वाले चीन को हिमालयन बौद्ध नेताओं ने कड़ी चेतावनी भेजी है।
चीन को कड़ा संदेश देते हुए, शीर्ष हिमालयी बौद्ध नेताओं के एक समूह ने सोमवार को अरूणाचल प्रदेश का दौरा किया और एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया। सोमवार को अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले के गोरसम स्तूप, जेमिथांग में नालंदा बौद्ध परंपरा को लेकर इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया था।
शीर्ष हिमालयी बौद्ध नेताओं का सीमावर्ती राज्य में इतनी बड़ी संख्या में एक साथ आना दुर्लभ बात है और सोमवार को हुई बैठक को, चीन के नाम बदलने के प्रयास के बाद शी जिनपिंग को एक स्पष्ट संदेश के रूप में इसे देखा जा रहा है।
इस कार्यक्रम में 600 से ज्यादा हिमालयन बौद्ध नेताओं और उनके प्रतिनिधियों ने भाग लिया और भारत के पक्ष में इसे एक जोरदार समर्थन माना जा रहा है।

अरूणाचल प्रदेश में बौद्ध नेताओं का जमावड़ा
जिस जगह पर बौद्ध नेताओं का जमावड़ा लगा था, वो जगह अरुणाचल में जेमिथांग में भारत-चीन सीमा पर भारत का आखिरी गांव है।
दिसंबर 2022 में, अरुणाचल प्रदेश के तवांग सेक्टर में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर चीनी पीएलए सैनिकों की भारतीय सेना के साथ झड़प हुई थी और उसी तवांग जिले में बौद्ध नेताओं ने कार्यक्रम भारत के साथ एकजुटता दिखाई है, लिहाजा चीन का तिलमिलाना तय माना जा रहा है।
तवांग सेक्टर में हुए झड़प के बाद, भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बयान जारी कर कहा था, कि चीनी सैनिकों ने एलएसी पर यथास्थिति को एकतरफा बदलने की कोशिश की और भारतीय बलों द्वारा इस प्रयास को सफलतापूर्वक नाकाम कर दिया गया है।

इस सम्मेलन में श्रद्धेय रिनपोछे, गेहेस, खेनपोस के प्रतिनिधियों और सभी हिमालयी राज्यों हिमाचल प्रदेश, लद्दाख (केंद्र शासित प्रदेश), उत्तराखंड, जम्मू और कश्मीर (पद्दार-पांगी), सिक्किम, उत्तर बंगाल (दार्जिलिंग, डोर, जयगांव और कलिम्पोंग), डेंसा दक्षिण भारत मठ और अरुणाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों जैसे तूतिंग, मेचुका, ताकसिंग और अनिनी के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया है।
वहीं, कार्यक्रम में अरूणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने कहा, कि प्रत्येक प्राणी के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर फलने-फूलने वाली बौद्ध संस्कृति को न केवल संरक्षित किया जाना चाहिए बल्कि इसका प्रचार भी किया जाना चाहिए।
खांडू ने कहा कि राज्य में बौद्ध आबादी का एक बड़ा हिस्सा है और "सौभाग्य से उन्होंने धार्मिक उत्साह के साथ अपनी संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखा है।"

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मुख्यमंत्री ने किया बौद्ध नेताओं का स्वागत
प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश मिश्रित धार्मिक अनुयायियों का घर है।
पेमा खांडू ने कहा, कि "अरुणाचल प्रदेश केवल बौद्ध धर्म का ही घर नहीं है, बल्कि कई धर्मों का भी घर है, जिनमें वे भी शामिल हैं, जो अपनी स्वदेशी आस्था का पालन करते हैं। मेरा मानना है कि हर धर्म और आस्था को फलना-फूलना चाहिए और शांति से रहना चाहिए। मुझे गर्व है कि हम अरुणाचली ऐसा ही कर रहे हैं।"
खांडू ने कहा, "जेमीथांग, जैसा कि आप सभी जानते होंगे, अंतिम भारतीय सीमा है, जिसके माध्यम से परम पावन 14वें दलाई लामा ने 1959 में भारत में प्रवेश किया था। इसलिए, यहां इस सम्मेलन का आयोजन महत्वपूर्ण है।"












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