आतंकवाद से नहीं अपनी ही बंदूकों से मर रहे हैं अमेरिकी
वाशिंगटन। सोमवार को अमेरिका के मिसौरी राज्य के फर्गुसन में माइकल ब्राउन की हत्या को एक वर्ष पूरा हो गया। इस मौके पर वहां जारी विरोध प्रदर्शन के दौरान काफी फायरिंग हुई। दो कारों में आए लोगों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी और इसके जवाब में पुलिस को भी फायरिंग करनी पड़ी है।

पिछले वर्ष इस घटना के बाद से अमेरिका में कई वर्षों बाद दंगे हुए थे। फायरिंग की घटना में हालांकि अभी तक किसी के मरने की खबर नहीं हैं लेकिन इस घटना के बाद से फिर अमेरिका में गन वॉयलेंस पर बहस शुरू हो गई है। अमेरिका में 9/11 के बाद से आतंकवाद से जुड़ी घटनाओं में उतने लोग नहीं मारे गए थे जितने कि यहां पर अपने ही नागरिकों पर हुई फायरिंग में मारे गए।
आतंकवाद नहीं बंदूक ले रही है जान
एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में 9/11 के बाद से 100 लोगों की मौत आतंकवादी घटनाओं में हुई है तो वहीं गन वॉयलेंस की वजह से हुई मौतों को आंकड़ा इससे करीब पांच गुना ज्यादा है। कुछ हफ्तों पहले राष्ट्रपति बराक ओबामा ने एक इंटरव्यू में कहा था अमेरिका में गन लॉ यानी बंदूक रखने के नियम में बदलाव की सख्त जरूरत है। अमेरिका में सेल्फ डिफेंस के लिए कुछ नियमों के तहत बंदूक रखनी अनिवार्य है।
वर्ष 2010 के आंकड़ों के मुताबिक दुनिया भर में जहां 13,186 लोगों की जान आतंकवाद से जुड़ी घटनाओं में हुई तो वहीं अमेरिका में गन वॉयलेंस या फिर अचानक फायरिंग में 31,672 लोग मारे जा चुके थे।
अमेरिका में बढ़ती चिंता
अमेरिका में आए दिन होने वाली घटनाओं पर विशेषज्ञों ने गहरी चिंता जाहिर की है। रक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों की मानें तो 9/11 के बाद जहां अमेरिका में अरबों डॉलर होमलैंड सिक्योरिटी पर खर्च किए गए तो गन लॉ के लिए कुछ किया ही नहीं गया है। फिलहाल फर्गुसन के हालातों ने एक बार फिर से इस पर चिंता बढ़ा दी है।












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