Solar Filaments: सौर मंडल के 'मुखिया' के मुंह से निकली भयंकर ज्वाला! 'रिंग' से घिर गए शनि
सौर मंडल में solar filaments इससे पहले भी देखे गए है। लेकिन ये पहला मौका है जब इसे शनि ग्रह के चारों ओर एक रिंग बनाते पाया गया।

सूर्य को सौर मंडल का प्रमुख ग्रह माना जा जाता है।, जो लगभग 4.5 अरब वर्ष पुराना तारा है। सौर मंडल के केंद्र में स्थित हाइड्रोजन और हीलियम गैसों का भंडार है। ये एक चमकता हुआ ग्रह है, जो कि पूरे ब्रह्मंड में प्रकाश का एक मात्र स्रोत है। लेकिन हाल में इस सूर्य ने निकली एक फिलामेंट शनि के चारों ओर फैली वलय (रिंग) जैसी दिखाई दी । नासा के टेलीस्कोप जेम्स वेब ये तस्वीरे भेजी हैं।
दुर्लभ तस्वीर से साइंटिस्ट्स भी चकित
नासा द्वारा जारी की गई तस्वीरों में सूर्य के उत्तरी ध्रुव के एक बड़े हिस्से को अलग होते हुए देखा जा सकता है। स्पेस की ये ताजा तस्वीरें नासा के जेम्स वेब टेलीस्कोप ने भेजी हैं। अंतरिक्ष मौसम विशेषक्ष डॉ.टमेटा स्कोव ने ये तस्वीरें ट्वीटर साझा की हैं।
शनि के चारों ओर गैसों का फिलामेंट
नासा द्वारा साझा किए गए तस्वीरों में एक विशाल ध्रुवीय भंवर की घटना का दिखी। जिसके बाद एक फिलामेंट को को शनि के चारों ओर फैलते हुए देखा गया, जो एक रिंग बना रही थी। ये एक दुर्लभ तस्वीर थी। हालांकि इस तरह की खगोलीय घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, लेकिन फिलामेंट पहली बार देखे गए।
साइंटिस्ट्स ने क्या कहा?
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह सूर्य के चुंबकीय क्षेत्र के उत्क्रमण से संबंधित हो सकता है। इसके पीछे तथ्य यह है कि ऐसी घटनाओं कई अजीब संरचानाएं देखी जा सकती हैं। ऐसा तब होता है जब सूर्य हर 11 साल के सौर चक्र में 55 डिग्री अक्षांश पर पहुंचता है। खगोलविदों ने हाल ही में 31.2 प्रकाश वर्ष दूर सिग्नस तारामंडल में एक तारे की परिक्रमा करने वाले संभावित रहने योग्य एक्सोप्लैनेट की खोज की है।
लाल बौना तारा घटना की वजह
लाल बौने तारे वुल्फ 1069 सूर्य की परिक्रमा करता है। इसका आकार सूर्य के आकार के पांचवें भाग के बराबर है। इसकी सतह पर तरल पानी और एक वातावरण भी हो सकता है। यह एक्सोप्लैनेट शिकारी द्वारा अब तक खोजा गया छठा-निकटतम पृथ्वी जैसा ग्रह है।
स्पेस में रिंग जैसी विचित्र तस्वीर
खगोलविदों ने ताजा शोध में पाया कि क्वाओर के चारों ओर एक वलय है, जो कुइपर में प्लूटो के आधे आकार के बराबर है। शोधकर्ताओं ने दावा किया कि उन्होंने एक वलय (रिंग) का पता लगाया है कि जो शनि ग्रह के चारों ओर है। हालांकि इस तरह के छल्ले जैसी आकृति कहां बनती है इसको लेकर साइंटिस्ट्स अभी भी आश्वस्त नहीं है। इससे पहले 2002 में खोजा गया क्वाओर को एक छोटे ग्रह के रूप में माना गया।
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