भारत निर्मित कोविशील्ड को मान्यता न देने पर घाना के राष्ट्रपति ने की यूरोपीय देशों की आलोचना
अक्करा, 23 सितंबर। भारत में कोरोना वायरस के खिलाफ भारी संख्या में इस्तेमाल की जाने वाली वैक्सीन कोविशील्ड को लेकर कई यूरोपीय देशों ने आशंका जताई है। इस बीच भारत की जवाबी कार्रवाई की चेतावनी के बाद ब्रिटेन ने कोविशील्ड टीके को मान्यता तो दे दी लेकिन क्वारंटाइन के नियमों को जारी रखा है। कोविशील्ड को लेकर विवाद में अब पश्चिमी अफ्रीका में देश घाना के राष्ट्रपति ने यूरोपीय देशों की खिंचाई की है। घाना ने भारत निर्मित कोविशील्ड को मंजूरी नहीं देने के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।

गौरतलब है कि ब्रिटेन ने कुछ दिन पहले यात्रा गाइडलाइन जारी करते हुए कहा था कि कोविशील्ड की दोनों डोज ले चुके भारतीयों को लंदन आने पर 14 दिन क्वारंटाइन में रहना होगा। कोविशील्ड को इंग्लैंड में मंजूरी नहीं दी गई। वहीं भारत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी तो ब्रिटेन सरकार ने वैक्सीन को मान्यता तो दी लेकिन क्वारंटाइन की अनिवार्यता जारी रखी। घाना के राष्ट्रपति नाना अडो डंकवा अकुफो-अडो ने यूरोपीय देशों के इस रवैये की आलोचना की है।
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बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 76वें सत्र की आम बहस को संबोधित करते हुए घाना के राष्ट्रपति ने कहा, 'यूरोप के कुछ देशों में एंट्री पर हाल के नियमों में एक दुर्भाग्यपूर्ण प्रोग्रेस प्रतीत होता है, जो बताता है कि भारत में निर्मित ऑक्सफोर्डएस्ट्राजेनेका वैक्सीन कोविशील्ड को इन देशों द्वारा मान्यता प्राप्त नहीं है। दिलचस्प बात यह है कि यह वैक्सीन अफ्रीकी देशों को COVAX सुविधा के माध्यम से दान किया गया था। आव्रजन नियंत्रण के लिए एक उपकरण के रूप में टीकों का उपयोग वास्तव में एक प्रतिगामी कदम होगा।' बता दें कि घाना को मेड-इन-इंडिया COVID-19 टीकों की कुल 6.52 लाख खुराक मिली थी, जिसमें COVAX के माध्यम से छह लाख और अनुदान के माध्यम से 50,000 खुराक शामिल हैं।












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