G7: भारत क्यों नहीं है दुनिया की 7 बड़ी इकोनॉमी वाले देशों के ग्रुप का हिस्सा? इटली ने अतिथि बनाकर बुलाया
G7 India: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को अपने इतालवी समकक्ष जियोर्जिया मेलोनी से टेलीफोन पर बात की और इटली के 'मुक्ति दिवस' की 79वीं वर्षगांठ के अवसर पर उन्हें शुभकामनाएं दीं। इस बातचीत को लेकर भारत सरकार की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, कि इटली ने जून में होने वाले जी7 की बैठक के लिए भारत को आमंत्रित किया है।
आधिकारिक बयान के मुताबिक, भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी को जी7 की बैठक में भारत को आमंत्रित करने के लिए धन्यवाद दिया है। इसके अलावा, दोनों नेताओं ने भारत में हुए जी20 शिखर सम्मेलन के महत्वपूर्ण परिणामों को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा की है।

लेकिन, सवाल ये उठता है, कि आखिर ये G-7 ग्रुप क्या है और आखिर भारत, जो दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, वो अभी तक इसका हिस्सा क्यों नहीं बन पाया है?
G7 ग्रुप क्या है?
दुनिया के सात सबसे शक्तिशाली लोकतांत्रिक देशों ने मिलकर जी-7 का गठन किया है, जिसकी हर साल बैठक होती है, जिसमें सातों देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होते हैं और आर्थिक मुद्दों पर बात करते हैं। भारत को हर साल बतौर अतिथि देश के तौर पर जी7 की बैठक में आमंत्रित किया जाता है, लेकिन अभी तक भारत इसका स्थायी सदस्य नहीं बन पाया है।
जी-7 में अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और ब्रिटेन शामिल हैं और इस बार जी-7 की मेजबानी इटली करने वाला है, जबकि पिछले साल इसकी मेजबानी जापान ने की थी और उससे पहले जर्मनी इसका होस्ट देश था।
भारत इस संगठन का हिस्सा नहीं है, लेकिन पिछले कई सालों से बतौर मेहमान जी-7 में भाग लेता रहा है। पीएम मोदी से पहले पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी जी-7 की बैठकों में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होते थे।
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत को जी7 देशों के इस ग्रुप में शामिल करने की मांग कर चुके हैं और यही मांग ब्रिटेन के पूर्व प्रधाननमंत्री बोरिस जॉनसन भी कर चुके हैं। जबकि, फ्रांस, जापान और इटली से भी भारत के काफी मजबूत संबंध हैं, फिर भी भारत इस ग्रुप का हिस्सा क्यों नहीं बना है, आईये समझने की कोशिश करते हैं।
भारत क्यों नहीं है जी-7 का सदस्य?
साल 2020 अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जी7 समूह को 'पुराना समूह' बताते हुए इसमें भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया को शामिल करने की मांग की थी। हालांकि, कोविड महामारी की वजह से जी-7 का 46वें शिखर सम्मेलन स्थगित हो गया था, लेकिन उस समय डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था, कि G7 समूह पुराना हो चुका है, और अपने वर्तमान प्रारूप में यह वैश्विक घटनाओं का सही तरीके से प्रतिनिधित्व करने में सक्षम नहीं है।
2019 में 45वें जी7 शिखर सम्मेलन का आयोजन फ्रांस में किया गया था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को विशेष अतिथि के तौर पर आमंत्रित गया था। उस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था, कि अब वक्त आ गया है, जब जी7 ग्रुप को जी10 या फिर जी11 बना दिया जाए। ट्रंप ने जी7 ग्रुप में भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के अलावा रूस को भी शामिल करने की मांग की थी।
हालांकि, उसके बाद भी भारत इस समूह का हिस्सा नहीं बन पाया, जबकि इस समूह को लेकर भारत का रवैया हमेशा से सकारात्मक रहा है।

भारत और G7 के बीच कैसा रहा है रिश्ता?
इंटरनेशनल एक्सपर्ट्स का हमेशा से कहना रहा है, कि जी-7 से भारत और ब्राजील जैसी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं को दूर रखना, इसकी सबसे बड़ी नाकामी है, जिसे जल्द से जल्द दूर करना चाहिए।
आलोचकों का कहना है, कि जी7 कुल मिलाकर पश्चिमी देशों के वर्चस्व से भरा हुआ एक संगठन है, और पश्चिमी देशों के मन में अभी भी अपने आप को सर्वोच्च मानने की गलतफहमी बनी हुई है और इसी वजह से अभी तक भारत को इसमें शामिल नहीं किया गया है।
इसका नतीजा ये हुआ, कि पिछले कुछ सालों में भारत, ब्राजील और चीन जैसे देशों के आर्थिक उदय ने जी7 के महत्व को कम कर दिया है और वैश्विक जीडीपी में जी7 की भागीदारी लगातार कम होती जा रही है। लिहाजा, इस समूह के अस्तित्व पर ही अब संकट छाने लगा है। खासकर, यूक्रेन युद्ध ने जिस तरह से यूरोप को प्रभावित किया है, उससे निपटने में जी7 अभी तक कारगार उपाय नहीं कर पाया है।
ऐसा अनुमान है, कि अगले 3 सालों में भारत की अर्थव्यवस्था 5 ट्रिलियन डॉलर को पार कर जाएगी। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। जबकि, भारत की अर्थव्यवस्था का आकार इस वक्त करीब साढ़े 3 ट्रिलियन डॉलर के आसपास आ चुका है।
लिहाजा, 5 ट्रिलियन डॉलर के लक्ष्य को और जल्द हासिल करने के लिए भारत भी जी7 ग्रुप में शामिल होना चाहता रहा है, ताकि भारतीय उद्योगों को यूरोपीय बाजार में रियायत के साथ ही आधुनिक टेक्नोलॉजी मिल सके। ऐसे में अगर भारत जी7 ग्रुप का हिस्सा बनता है, तो निश्चित तौर पर उसे वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान बनाने में कामयाबी हासिल होगी।
वर्तमान जियो-पॉलिटिक्स में भारत की मजबूत दावेदारी को पूरी दुनिया मान चुकी है और तमाम देशों ने अब कहना शुरू कर दिया है, कि आने वाला दशक भारत का है। वहीं, अगले कुछ सालों में भारत, दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा और दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश भारत पहले ही बन चुका है, ऐसे में भारत, विकास की रफ्तार को और तेज करने के लिए इस ग्रुप को काफी अहमियत भी देता है।
बावजूद जी7 का सदस्य अभी तक नहीं बन पाना, एक आश्चर्य ही है।
ग्लोबल साउथ में चीन और जापान के बाद भारत सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। वहीं, माना जा रहा है, कि इस साल भी ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, भारत, इंडोनेशिया, दक्षिण कोरिया और वियतनाम के नेता इटली में होने वाले शिखर सम्मेलन में मौजूद होंगे।
एक्सपर्ट्स का मानना है, कि जिस तरह से चीन ब्रिक्स का विस्तार कर रहा है, जी-7 को भी अपना विस्तार करना चाहिए, नहीं तो आने वाले वक्त में ये अपना अस्तित्व ही खो सकता है।
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