बुरी तरह से डीजल-पेट्रोल संकट से घिर गया है भारत का ये पड़ोसी देश, मांगा 500 मिलियन डॉलर का लोन

भारत का ये पड़ोसी देश ईंधन संकट से बुरी तरह से जूझ रहा है, जिसके बाद भारत से 37 अरब रुपये का लोन मांगा गया है।

कोलंबो, अक्टूबर 18: भारत का पड़ोसी देश श्रीलंका दो बहुत बड़ी समस्याओं से जूझ रहा है। श्रीलंका में पेट्रोल की किल्लत भयानक स्तर पर है तो दूसरी तरफ श्रीलंका का विदेशी मुद्रा भंडार भी बुरी तरह से प्रभावित हुआ है, लिहाजा इस बुरे हालात में श्रीलंका ने भारत से फौरन मदद की मांग की है। श्रीलंका की सरकार ने फौरन देश में पेट्रोल किल्लत को कम करने के लिए भारत से 500 मिलिनय डॉलर यानि 50 करोड़ डॉलर की मदद मांगी है।

भारत से मांगी मदद

भारत से मांगी मदद

श्रीलंका की सरकार ने भारत से 'आपातकालीन' कर्ज उस वक्त मांगी है, जब देश के ऊर्जा मंत्री उदय गम्मनपिला ने कुछ दिन पहले देश में चेतावनी जारी करते हुए कहा था कि, देश में ईंधन की मौजूदा उपलब्धता सिर्फ जनवरी तक हगी है और उसके बाद देश में ईंधन पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। श्रीलंका सरकार द्वारा संचालित देश की सीलोन पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (CPC) पर दो प्रमुख सरकारी बैंकों, बैंक ऑफ़ सीलोन और पीपुल्स बैंक का लगभग 3.3 अरब अमरीकी डालर का बकाया है। श्रीलंका के तेल डिस्ट्रीब्यूटर्स मध्य पूर्व देशों से कच्चे तेल और सिंगापुर सहित अन्य क्षेत्रों से रिफाइंड तेल का आयात करते हैं।

भारत-श्रीलंका में आर्थिक साझेदारी

भारत-श्रीलंका में आर्थिक साझेदारी

श्रीलंका सरकार की सीलोन पेट्रोलियम कॉरपोरेशन यानि सीपीसी के चेयरमैन सुमित विजेसिंघे ने श्रीलंका के एक स्थानीय समाचार वेबसाइट Newsfirst.lk के हवाले से कहा कि, "हम वर्तमान में भारत-श्रीलंका आर्थिक साझेदारी व्यवस्था के तहत 500 मिलियन अमरीकी डालर क्रेडिट लाइन प्राप्त करने के लिए श्रीलंका में मौजूद भारतीय उच्चायोग के साथ बात कर रहे हैं।" उन्होंने कहा कि, इस सुविधा का उपयोग पेट्रोल और डीजल आवश्यकताओं की खरीद के लिए किया जाएगा। भारत और श्रीलंका दोनों के ऊर्जा सचिवों के जल्द ही ऋण के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर करने की उम्मीद है। इस रिपोर्ट में श्रीलंका के वित्त सचिव एसआर एटिगॉल के हवाले से इसकी जानकारी दी गई है।

श्रीलंका में पेट्रोलियम किल्लत

श्रीलंका में पेट्रोलियम किल्लत

श्रीलंका सरकार ने रसोई गैस और अन्य आवश्यक वस्तुओं में पिछले हफ्ते की वृद्धि के बावजूद ईंधन की खुदरा कीमतों में वृद्धि पर रोक लगा दी है। लेकिन, वैश्विक स्तर पर पिछले कुछ महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी इजाफा हुआ है, जिसका प्रभाव श्रीलंका पर काफी ज्यादा पड़ा है और श्रीलंका को इस साल तेल खरीदने के लिए काफी ज्यादा पैसे खर्च करने पड़े हैं, जिसकी वजह से श्रीलंका सरकार की विदेशी मुद्रा भंडार में कमी आई है। पिछले साल की तुलना में इस साल के पहले सात महीनों में श्रीलंका का तेल बिल 41.5 फीसदी बढ़कर 2 अरब डॉलर हो गया है।

श्रीलंका की कमाई पर गंभीर असर

श्रीलंका की कमाई पर गंभीर असर

श्रीलंका के वित्तमंत्री तुलसी राजपक्षे ने पिछले महीने कहा था कि, महामारी के कारण पर्यटन और कई दूसरे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में होने वाली कमाई बुरी तरह से प्रभावित हुई है, जिससे देश की कमाई पर सीधाअसर पड़ा है और श्रीलंका एक गंभीर विदेशी मुद्रा संकट का सामना कर रहा है। 2020 में श्रीलंका की जीडीपी में रिकॉर्ड 3.6 प्रतिशत की गिरावट आई और जुलाई से एक साल में इसका विदेशी मुद्रा भंडार आधे से अधिक गिरकर केवल 2.8 बिलियन अमरीकी डालर हो गया है। इससे पिछले एक साल में डॉलर के मुकाबले श्रीलंकाई रुपये में 9 प्रतिशत की गिरावट आई है, जिससे आयात अधिक महंगा हो गया है।

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