• search
क्विक अलर्ट के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  
For Daily Alerts
Oneindia App Download

पनामा से पाकिस्तान तक... दुनिया के वो 10 देश, जिनका हाल कभी भी श्रीलंका जैसा हो सकता है

दुनिया भर में अस्थिरता के दौर के बीच श्रीलंका की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं और देश के 60 लाख से ज्यादा लोगों के सामने खाद्य संकट मंडरा रहा है। वहीं, यूक्रेन में युद्ध और इसके नतीजों का भी व्यापक प्रभाव पड़ा है।
Google Oneindia News

नई दिल्ली, जुलाई 19: श्रीलंका के गोटाबाया राजपक्षे देश छोड़कर भाग गए हैं और देश के बिगड़ते आर्थिक संकट के बीच राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर हो गए। लेकिन द्वीप राष्ट्र की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। श्रीलंका, ईंधन, दवा और भोजन की भारी कमी का सामना कर रहा है। इन जरूरी चीजों को खरीदने के लिए पैसे खत्म हो गए हैं। सार्वजनिक परिवहन प्रभावित हुआ है और स्कूलों को बार-बार बंद करने के लिए मजबूर किया जाता है। श्रीलंका में आर्थिक संकट का उसके वित्त के कुप्रबंधन से बहुत कुछ लेना-देना है। 2019 ईस्टर बम विस्फोट और COVID-19 महामारी, जिसने देश की पर्यटन अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है और अब देश दिवालिया हो चुका है। लेकिन, दुनिया में सिर्फ श्रीलंका ही एकमात्र ऐसा देश नहीं है, जो दिवालिया हो चुका है, बल्कि कई और देश अगले कुछ महीने में दिवालिया हो सकते हैं।

कई देशों की बिगड़ी स्थिति

कई देशों की बिगड़ी स्थिति

दुनिया भर में अस्थिरता के दौर के बीच श्रीलंका की मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं और देश के 60 लाख से ज्यादा लोगों के सामने खाद्य संकट मंडरा रहा है। वहीं, यूक्रेन में युद्ध और इसके नतीजों का भी व्यापक प्रभाव पड़ा है। लेकिन, छोटा सा दक्षिण एशियाई राष्ट्र अकेला पीड़ित नहीं है। कई विकासशील और अविकसित राष्ट्र आर्थिक संकट के कगार पर हैं, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कई देशों की मुद्राएं बुरी तरह से गिर चुकी है और डॉलर के काफी ज्यादा ताकतवर होने से कई देशों की विदेशी मुद्रा भंडार में भारी कमी आई है। आइये, हम उन देशों पर एक नज़र डालते हैं जो श्रीलंका के रास्ते पर जा सकते हैं।

पहले नंबर पर पाकिस्तान

पहले नंबर पर पाकिस्तान

पड़ोसी देश पाकिस्तान में सब कुछ ठीक नहीं है। पिछले हफ्ते, पाकिस्तान ने अपने ऋण कार्यक्रम को फिर से शुरू करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ एक समझौता किया है। पाकिस्तान पिछले साल से गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। श्रीलंका की तरह पाकिस्तान भी चीन से भारी कर्ज और निवेश का कर्जदार है। जबकि श्रीलंका पुनर्भुगतान में फेल हो चुका है और पहले से ही कर्ज के जाल में बुरी तरह से फंसा हुआ है। वहीं, चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के तहत पाकिस्तान में भारी निवेश कर चुका है और चीनी कर्ज लेने में पाकिस्तान दूसरे स्थान पर है। पाकिस्तान ने अपनी कुछ बड़ी औद्योगिक परियोजनाओं को चीनी फर्मों को पट्टे पर दिया है, जिसके कारण उन्हें और ज्यादा कर्ज लेना पड़ा है। यह वही दुष्चक्र है जिसमें लंका फंसी थी और फिर उसका बचना नामुमकिन हो गया था। ऊर्जा आयात की लागत में वृद्धि का मतलब है कि देश भुगतान संकट के संतुलन का सामना कर सकता है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार घटकर केवल करीब 8 अरब डॉलर रह गया है, जिससे पाकिस्तान सिर्फ अगले पांच हफ्ते तक ही जरूरी सामान खरीद सकता है। वहीं, पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं और भीषण बिजली संकट से जूझ रहा है।

नेपाल की भी स्थिति खराब

नेपाल की भी स्थिति खराब

नेपाल भी बुरी तरह से आर्थिक संकट में फंस गया है और नेपाल के पास भी विदेशी मुद्रा भंडार खत्म होने वाला है और नेपाल भी विदेशी कर्ज का भुगतान करने में फेल हो सकता है। नेपाल में जरूरी सामानों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है और खाद्य पदार्थ और ईंधन की कीमतों में इजाफा होने से नेपाल की वार्षिक खुदरा मुद्रास्फीति जून में बढ़कर 8.56 प्रतिशत हो गई, जो पिछले छह साल में सबसे ज्यादा है। पिछले कुछ महीनों में आयात में वृद्धि ने नेपाल के विदेशी मुद्रा भंडार को खत्म कर दिया है। नेपाल के सीमा शुल्क विभाग के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के पहले 11 महीनों में देश का कुल आयात बिल बढ़कर 1.76 ट्रिलियन रुपये हो गया। काठमांडू पोस्ट की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह आंकड़ा पिछले वित्तीय वर्ष के मुकाबले 27.5 प्रतिशत ज्यादा है। वहीं, नेपाल तरलता संकट का भी सामना कर रहा है और इसके परिणामस्वरूप, बैंक और अन्य वित्तीय संस्थान कृषि, पर्यटन, विनिर्माण और ऊर्जा क्षेत्रों जैसे उत्पादक क्षेत्रों को ऋण देने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

संकट में फंसा हुआ है इजिप्ट

संकट में फंसा हुआ है इजिप्ट

जेपी मॉर्गन के अनुसार, मिस्र की कुल जीडीपी का 95 प्रतिशत हिस्सा कर्ज का हो गया है और मिस्र के बाजार से इस साल 11 अरब डॉलर की राशि देश से बाहर निकली है। वहीं, रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, फंड मैनेजमेंट कंपनी एफआईएम पार्टनर्स के अनुसार, मिस्र को अगले पांच वर्षों में कठिन मुद्रा ऋण में $ 100 बिलियन का भुगतान करने की उम्मीद है, जिसमें 2024 में $ 3.3 बिलियन का एक बड़ा बांड शामिल है। रविवार को, मिस्र सरकार ने उन अफवाहों का खंडन किया है, कि देश में चल रहे वैश्विक खाद्य संकट के कारण खाद्य वस्तुओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, मिस्र पहले ही आईएमएफ से अपने कर्ज का कोटा पार कर लिया है। वहीं, रिपोर्ट के मुताबिक, नेपास आईएमएफ से और कर्ज के लिए बात कर रहा है, जो उसे मई 2022 में 20 20 अरब डॉलर पहले ही दे चुका है।

अर्जेंटीना का भी बुरा हाल

अर्जेंटीना का भी बुरा हाल

वैश्विक मुद्रास्फीति बढ़ने और मंदी की आशंका के साथ अर्जेंटीना की अर्थव्यवस्था भी संकट की तरफ बढ़ रही है। इस साल मई महीने में अर्जेंटीना में महंगाई दर 58 फीसदी पर थी। यहां तक कि, जब पूरी दुनिया में महंगाई बढ़ रही है, उस वक्त अर्जेंटीना की स्थिति और भी ज्यादा खराब हो चुकी है और साल के अंत तक घरेलू महंगाई दर बढ़कर 70 फीसदी होने की आशंका जताई गई है, जिसका मतबल ये हुआ, कि अर्जेंटीना की अर्थव्यवस्था कभी भी ढहाकर गिर सकती है। वहीं, अर्जेंटीना, जो सोयाबीन, मक्का और गेहूं का एक महत्वपूर्ण वैश्विक आपूर्तिकर्ता है, लेकिन साल की दूसरी छमाही में अनाज के निर्यात में गिरावट आ रही है। इससे देश के लिए आईएमएफ के साथ सहमत 44 अरब डॉलर के सौदे से जुड़े लक्ष्यों को पूरा करना मुश्किल हो जाएगा। इसके साथ ही देश में आर्थिक संकट के साथ राजनीतिक संकट भी छाया हुआ है औऱ सत्तारूढ़ पेरोनिस्ट गठबंधन में टूट-फूट हो जाने के बाद देश के वित्तमंत्री मार्टिम गुजमैन को अप्रैल महीने में अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था। वहीं, गुज़मैन की जगह लेने वाली सिल्विना बटाकिस ने आईएमएफ से किए गए वादों पर टिके रहने की कसम खाई है। हालांकि, द फाइनेंशियल टाइम्स के अनुसार, सरपट मुद्रास्फीति और खराब सार्वजनिक वित्त के बीच निवेशक एक और संप्रभु ऋण डिफ़ॉल्ट के बारे में चिंतित हैं। प्रदेश में महंगाई, गरीबी और बेरोजगारी को लेकर सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं।

आर्थिक संकट में फंसा है नाइजीरिया

आर्थिक संकट में फंसा है नाइजीरिया

विश्व बैंक ने हाल ही में नाइजीरिया को 2021 के आंकड़ों के आधार पर सबसे खराब मुद्रास्फीति दर के साथ दुनिया के शीर्ष 10 देशों में सूचीबद्ध किया है। यह 16.95 प्रतिशत की वार्षिक मुद्रास्फीति दर के साथ सूची में आठवें स्थान पर है। आईएमएफ की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि मुद्रास्फीति, कर्ज और खाद्य संकट नाइजीरियाई अर्थव्यवस्था को पतन के कगार पर धकेल रहे हैं। किराने का सामान, पेय पदार्थ और प्रावधानों की कीमतें पिछले साल से दोगुने से अधिक हो गई हैं। देश के ऋण प्रबंधन कार्यालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, 31 मार्च तक अफ्रीका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देश पर कुल 100 अरब डॉलर का बकाया कर्ज था। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, नाइजीरिया के ऊपर रियायती और वाणिज्यिक ऋण करीब 40 अरब डॉलर और बाकी 60 अरब डॉलर का कर्ज घरेलू जारीकर्ताओं पर बकाया था। माना जा रहा है, कि नाइजीरिया की स्थिति श्रीलंका से भी ज्यादा खतरनाक हो सकती है।

केन्या में भी हालात काफी खराब

केन्या में भी हालात काफी खराब

मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, एक और अफ्रीकी देश केन्या भी किसी भी वक्त आर्थिक संकट में फंस सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि, केन्या की करेंसी काफी ज्यादा गिर चुकी है और देश के पास विदेशी मुद्रा भंडार भी खत्म होने वाला है। मूडीज के उपाध्यक्ष और वरिष्ठ विश्लेषक डेविड रोगोविच के अनुसार, विदेशी मुद्रा भंडार की तुलना में देश में काफी ज्यादा कर्ज ले रखा है और खराब वित्त प्रबंधन की वजह से केन्या कभी भी खतरनाक हालात में फंस सकता है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, केन्या को अपनी आय का लगभग 30 प्रतिशत ब्याज भुगतान ही करना पड़ा है। वहीं, वैश्विक वित्तपोषण बाजारों जर केन्या की पहुंच अब बंद हो गई है और 2024 तक केन्या को विदेशी कर्ज चुकाना है, लेकिन पूरी संभावना है कि, केन्या अपने कर्ज को नहीं चुका पाएगा।

इथियोपिया पर तीन गुना से ज्यादा कर्ज

इथियोपिया पर तीन गुना से ज्यादा कर्ज

यूके स्थित डेट जस्टिस की एक रिपोर्ट के अनुसार, अफ्रीकी सरकारें पश्चिम में निजी लेनदारों से तीन गुना अधिक कर्ज लेती हैं, जितना कि वे चीन को देते हैं। इथियोपिया को भुगतान करने और अपनी अर्थव्यवस्था को अपने पूर्व-कोविड जीडीपी विकास स्तरों पर वापस करने के दोहरे बोझ का सामना करना पड़ रहा है। इथियोपिया ने जो अपना ताजा बजट पेश किया है, उससे पता चलता है कि, सरकार ने कर्ज में कमी करना अपना प्राथमिक लक्ष्य रखा है और टाइग्रे संघर्ष से भी बाहर निकलना सरकार का प्रुमख लक्ष्य है। नवंबर 2020 में गृहयुद्ध छिड़ने के बाद इथियोपियों की अरबों डॉलर का नुकसान हुआ है और देश की सड़कें, कारखाने और हवाई अड्डे ध्वस्त हो चुके हैं। एफटी में एक रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी दानदाताओं ने वित्तीय सहायता वापस देनी शुरू कर दी है और वाशिंगटन ने अमेरिकी बाजार में इथियोपिया की टैरिफ मुक्त पहुंच को समाप्त कर दिया, जिससे देश में लोगं की नौकरी पर भारी खतरा मंडराने लगा है।

घाना पर भी आर्थिक खतरा बढ़ा

घाना पर भी आर्थिक खतरा बढ़ा

घाना की वार्षिक मुद्रास्फीति जून 2022 में 18 वर्षों में पहली बार बढ़कर 29.82 प्रतिशत हो गई है। परिवहन से लेकर बिजली, गैस और पानी जैसी जरूरी सामग्रियों का अकाल पड़ने लगा है और सभी आवश्यक वस्तुओं की कीमतें इस पश्चिम अफ्रीकी देश में काफी बढ़ गई हैं। वहीं, देश की वित्तीय स्थिति, जो कोविड महामारी से पहसे से ही प्रभावित थी, रूस-यूक्रेन युद्ध से उसकी स्थिति और भी खराब हो गई है। पिछले दिसंबर में, घाना में बेरोजगारी 13.4 प्रतिशत थी, जो दस साल पहले की तुलना में तीन गुना ज्यादा है। अत्यधिक उधारी के कारण अर्थव्यवस्था ऋण संकट का सामना कर रही है। रहने की बढ़ती लागत के खिलाफ घाना के लोगों ने जून में कई दिनों तक विरोध प्रदर्शन भी किया है। वहीं, घाना सरकार आईएमएफ बेलआउट पैकेज के लिए बातचीत करने पर विचार कर रही है।

आर्थिक संकट में फंस सकता है पनामा

आर्थिक संकट में फंस सकता है पनामा

पनामा में पिछले साल के मुकाबले मुद्रास्फीति मई महीने में 4.2 प्रतिशत बढ़ गई है साथ ही जनवरी से लगभग 10 प्रतिशत की बेरोजगारी दर और ईंधन की कीमतों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, अपनी डॉलर की अर्थव्यवस्था और उच्च विकास के आंकड़ों के बावजूद, देश में सामाजिक असमानता काफी ज्यादा बढ़ गई है। आर्थिक संकट के कारण देश के कुछ हिस्सों में ईंधन की कमी हो गई है, और राजधानी के खाद्य बाजारों में स्टालों पर बेचने के लिए उत्पादों की कमी हो गई है। हजारों लोग पिछले दो हफ्तों से सड़कों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और उनकी एक मांग है, कि सरकार को बुनियादी खाद्य पदार्थों की कीमतें नियंत्रित करनी चाहिए। विरोध प्रदर्शनों के कारण पब्लिक स्कूलों को बंद कर दिया गया है, परिवहन को निलंबित कर दिया गया है और हड़ताल का आह्वान किया गया है।

अल्बानिया पर संकट गहराया

अल्बानिया पर संकट गहराया

अल्बानियाई लोगों ने राजधानी शहर तिराना में मार्च किया और लोग सरकार से काफी ज्यादा नाराज है, जिसके पीछे की सबसे बड़़ी वजह सरकार पर लगे भारी भ्रष्टाचार के आरोप हैं। लोगों की मांग है, कि सरकार कथित भ्रष्टाचार और उपभोक्ता कीमतों में भारी वृद्धि के कारण इस्तीफा दे। फोर्ब्स की रिपोर्ट के अनुसार, अल्बानियाई केंद्रीय बैंक ने ब्याज दर में 1.25 प्रतिशत की वृद्धि की घोषणा की, जबकि आधिकारिक जून मुद्रास्फीति 6.7 प्रतिशत थी।

चीन के लिए बल्लेबाजी करती इलेक्ट्रॉनिक कंपनियां, ड्रैगन ने कैसे खत्म कर दिया भारत का इलेक्ट्रॉनिक मार्केट?चीन के लिए बल्लेबाजी करती इलेक्ट्रॉनिक कंपनियां, ड्रैगन ने कैसे खत्म कर दिया भारत का इलेक्ट्रॉनिक मार्केट?

Comments
English summary
Those 10 countries of the world, where the economy can collapse at any time.
देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
For Daily Alerts
तुरंत पाएं न्यूज अपडेट
Enable
x
Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X