IMEC प्रोजेक्ट पर जल्द शुरू होगा काम, फ्रांस ने बातचीत में दिखाई तेजी, अगले 2 महीने में बैठक

भारत को यूरोप से जोड़ने वाले बुनियादी ढांचे के लिंक पर चर्चा करने के लिए फ्रांस ने प्रयास तेज कर दिए हैं। फ्रांस इस पर बातचीत की तैयारी में जुटा हुआ है। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक इस कड़ी में ये पहली बैठक होगी, जिसमें इसी तरह की चीनी पहल का मुकाबला करने की योजना है।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन ने परियोजना के लिए जमीनी कार्य शुरू करने के लिए फ्रांसीसी ऊर्जा उपयोगिता एंजी एसए के पूर्व मुख्य कार्यकारी जेरार्ड मेस्ट्रालेट को अपने दूत के रूप में नामित किया है। आईएमईसी नाम की इस परियोजना का उद्देश्य रेलवे, जहाज, गैस पाइपलाइन और इंटरनेट केबल का एक नेटवर्क बनाना है।

Emmanuel Macron Gerard Mestrallet

ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में इस प्रोजेक्ट के बारे में बात करते हुए जेरार्ड मेस्ट्रालेट ने कहा कि वह अगले दो महीनों में आईएमईसी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों को एक सभा में बुलाने की कोशिश कर रहे हैं। वह उनके साथ बैठक करेंगे लेकिन यह कहना जल्दबाजी होगी कि बैठक कहां या कैसे होगी।

मेस्ट्रालेट के अनुसार, यह योजना पिछले साल नई दिल्ली में जी-20 शिखर सम्मेलन के मौके पर शुरू की गई थी। इसे लागू करने में 10 साल से ज्यादा का समय लगेगा। इजराइल और हमास के बीच गाजा पट्टी में चल रहे युद्ध के कारण भी इस प्रोजेक्ट को झटका लगा है। लड़ाई से मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ गया है और संघर्ष लाल सागर शिपिंग लेन तक भी फैल गया है।

फ्रांस चीन के "बेल्ट एंड रोड" कार्यक्रम के जवाब में इस परियोजना को बहुत महत्व देता है। इसे रेलवे, शिपिंग लेन, गैस पाइपलाइन और दूरसंचार केबल के नेटवर्क के माध्यम से यूरोप और भारत के बीच संचार और माल की आवाजाही को आसान बनाने के लिए डिजाइन किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक दिग्गज फ्रांसीसी कंपनियों ने इस परियोजना में भाग लेने में रुचि व्यक्त की है, उनमें शिपिंग लाइन सीएमए सीजीएम, ऊर्जा कंपनी टोटल, इंजीनियरिंग कंपनी एल्सटॉम, केबल और ऑप्टिकल फाइबर कंपनी नेक्सन्स और निर्माण और लॉजिस्टिक्स कंपनियां शामिल हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पिछले साल सितंबर में जी20 शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सऊदी अरब के राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान और यूरोपीय आयोग के अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन की उपस्थिति में इस परियोजना की घोषणा की थी। उस समय भारत में प्रकाशित अनुमानों के अनुसार, इस परियोजना की लागत $20 बिलियन होगी।

आपको बता दें कि आईएमईसी को न सिर्फ बेल्ट एंड रोड प्रोजेक्ट का मुकाबला करना होगा बल्कि वह एक ऐसी ही रूसी पहले से भी प्रतिस्पर्धा करेगी। जुलाई 2022 में, रूस की RZD लॉजिस्टिक्स मॉस्को को ईरान के रास्ते मुंबई से जोड़ने वाले 7,200 किलोमीटर लंबे "इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर" का उपयोग करने वाली पहली कंपनी बन गई।

INSTC प्रोजेक्ट में अन्य सदस्य देश तुर्की, अजरबैजान, कजाकिस्तान, आर्मेनिया, बेलारूस, ताजिकिस्तान, किर्गिस्तान, ओमान, यूक्रेन और सीरिया हैं। फेडरेशन ऑफ फ्रेट फॉरवर्डर्स एसोसिएशन इन इंडिया के एक अध्ययन के अनुसार, INSTC रेल, सड़क और समुद्री मार्ग स्वेज नहर के माध्यम से रूस और भारत के बीच मार्ग की लागत का 30 फीसदी और 40 फीसदी समय बचाता है।

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