अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा दरकिनार, फ्रांस ने मिलाया रूस से हाथ
मॉस्को। फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा होलांद ने गुरुवार को रूस के राष्ट्रपति ब्लादीमिर पुतिन से मुलाकात की है। मुलाकात के बाद उन्होंने कहा है कि रूस के राष्ट्रपति पुतिन के साथ बातचीत के बाद रूस और फ्रांस आईएसआईएस आतंकियों के खिलाफ हमले करने के लिए राजी हो गए हैं।

अमेरिका को बड़ा झटका
निश्चित तौर पर यह अमेरिका के लिए एक बड़ा झटका है क्योंकि अमेरिका अभी तक इस बात को स्वीकार नहीं कर पा रहा है कि सीरिया में रूस उसके रोकने के बाद भी हमला कर रहा है। फ्रांस, आईएसआईएस के खिलाफ पिछले वर्ष अगस्त से शुरू हुए अमेरिकी गठबंधन सेना का हिस्सा है।
पुतिन ने कहा कि मास्को ‘सकारात्मक' विपक्षी समूहों पर हमले करने से बच सकता है। होलांद ने गुरुवार को कहा है कि आईएसआईएस के खिलाफ हमले तेज किए जाएंगे और इन हमलों में तालमेल रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि इन हमलों में फोकस तेल के ट्रांसपोर्ट पर होगा।
रूस और फ्रांस को आईएसआईएस ने दिया दर्द
होलांद आईएसआईएस के खिलाफ एक बड़े गठबंधन के लिए समर्थन जुटाने के लिए कूटनीति अभियान के आखिरी चरण के तहत मॉस्को में थे। दोनों नेताओं ने एक साझा जमीन तलाशने की कोशिश की।
आईएसआईएस ने जहां पहले इजिप्ट के सिनाई प्रोविंस में रूस के पैसेंजर जेट को ब्लास्ट कर 250 से ज्यादा लोगों की जान ले ली। वहीं 13 नवंबर को पेरिस में आतंकी हमलों में करीब 132 लोगों की मौत हो गई थी।
पुतिन ने फ्रांस के साथ आने पर कहा कि आज हम आतंकवाद-रोधी रास्ते पर हमारे साझा कार्यों में तेजी लाने पर, आतंकवाद के खिलाफ लड़ने में सूचना के आदान-प्रदान को सुधारने पर, हमारे सैन्य विशेषज्ञों के बीच रचनात्मक काम करने पर सहमत हुए हैं।
पुतिन ने इस पर कहा है कि हम इस बात पर राजी हुए हैं कि इस बारे में जानकारी साझा होगी कि कौन से क्षेत्र आतंकियों के बजाय सकारात्मक विपक्ष के पास हैं। हम उन क्षेत्रों पर हवाई हमलों से बचा जाएगा।
अब क्या करेंगे ओबामा
पिछले दिनों टर्की ने जब रूस के एक फाइटर जेट को मार गिराया था। इस घटना के बाद एक बार फिर अमेरिका और रूस के बीच तनाव बढ़ गया है।
जहां अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने टर्की को समर्थन किया तो वहीं पुतिन ने इसे पीठ में छुरा भोंकने वाली घटना करार दिया।जब से रूस ने सीरिया में आईएसआईएस के खिलाफ हमले तेज किए हैं, अमेरिका उस पर आरोप लगाता रहा है।
अमेरिका और उसके साथी देश रूस पर आरोप लगाते रहे हैं कि वह असद और आईएसआईएस से लड़ रहे नरमपंथी समूहों पर हमले बोलकर सीरियाई राष्ट्रपति बशर अल-असद के शासन की मदद करने की कोशिश कर रहा है।












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