बखमुत पर कब्जे के लिए रूस-यूक्रेन में भीषण लड़ाई, जानिए क्यों छोटे से शहर के लिए पुतिन ने झोंकी ताकत?
यूक्रेन के खिलाफ रूस ने पिछले साल 24 फरवरी को 'सैन्य अभियान' का ऐलान किया था और पिछले एक साल से ज्यादा वक्त से ये लड़ाई चल रही है, फिर भी रूस को जंग में जीत नहीं मिल पाई है।

Bakhmut Fighting: यूक्रेन के एक अदना से शहर बखमुत पर कब्जा करने के लिए रूस ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है और नमक के लिए प्रसिद्ध बखमुत शहर में खून की नदियां बह रही हैं। रूस और यूक्रेन, दोनों ने ही इस बात को स्वीकार किया है, कि उन्हें बखमुत की लड़ाई में भारी नुकसान हुआ है और भारी संख्या में सैनिक मारे गये हैं। फिर भी, बखमुत शहर से कदम पीछे खींचने को कोई तैयार नहीं है और भीषण जंग जारी है। लिहाजा, जानना जरूरी हो जाता है, कि आखिर बखमुत शहर, दोनों देशों के लिए नाक का सवाल क्यों बन गया है और आखिर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, हर हाल में बखमुत पर क्यों कब्जा करना चाहते हैं?
बखमुत शहर में भीषण जंग
रूस के भीषण हमलों में यूक्रेन का बखमुत शहर अब करीब करीब बर्बाद और निर्जन हो चुका है। ब्रिटिश खुफिया एजेंसी ने जानकारी दी है, कि रूस के वैगनर समूह ने बखमुत शहर के पूर्वी हिस्से के अधिकांश हिस्से को नियंत्रण में ले लिया है, और बखमुटका नदी क्षेत्र पर अब रूस के वैगनर ग्रुप का कब्जा हो गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने दावा किया है, कि पिछले कुछ दिनों में 1,100 से ज्यादा रूसी सैनिक फ्रंट लाइन के बखमुत सेक्शन में लड़ते हुए मारे गए हैं। हालांकि, उनके दावे की स्वतंत्र सूत्रों से पुष्टि नहीं हो पाई है। ज़ेलेंस्की ने अपने वीडियो संबोधन में दावा किया है, कि "एक हफ्ते से भी कम समय में हम बखमुत सेक्टर में 1,100 से ज्यादा दुश्मन सैनिकों को मारने में कामयाब रहे, और रूस को अपरिवर्तनीय नुकसान उठाना पड़ा है।" उन्होंने दावा किया, कि करीब 1,500 रूसी सैनिक इतनी बुरी तरह से घायल हो गए हैं, कि वे लड़ाई जारी रखने में सक्षम नहीं हैं। जबकि, रूसी रक्षा मंत्रालय ने कहा है, कि उसके सैनिक पूर्वी डोनेट्स्क क्षेत्र में सैन्य अभियान चला रहे हैं, जो पड़ोसी लुहांस्क के साथ मिलकर औद्योगिक डोनबास क्षेत्र का निर्माण करता है।

बखमुत को लेकर रूस का दावा क्या है?
रूसी रक्षा मंत्रालय ने दावा किया है, कि रूसी सेना ने पिछले 24 घंटों में 220 से ज्यादा यूक्रेनी सेवा सदस्यों को मार डाला है। मंत्रालय ने कहा, "डोनेत्स्क शहर की दिशा में ... 220 से ज्यादा यूक्रेनी सैनिक, एक पैदल सेना से लड़ने वाला वाहन, तीन बख्तरबंद लड़ाकू वाहन, सात वाहन, साथ ही एक डी-30 हॉवित्जर को नष्ट कर दिया गया।" दोनों पक्षों ने पिछले कुछ महीनों में बखमुत शहर में भारी नुकसान उठाना स्वीकार किया है, हालांकि हताहतों की सही संख्या को स्वतंत्र रूप से सत्यापित करना मुश्किल है। हमारे लिए यूक्रेन और रूस, दोनों के दावों की पुष्टि करना संभव नहीं है। वहीं, यूक्रेन ने बार-बार कहा है, कि बखमुत की रक्षा के लिए वो अपना संघर्ष जारी रखेगा और यूक्रेन के शीर्ष कमांडरों ने कहा है, कि बखमुत की लड़ाई से उन्हें व्यापक पलटवार की तैयारी करने के लिए आवश्यक समय मिलेगा। रूस दावा करता है, कि बखमुत शहर पर कब्जा करने से यूक्रेन का डिफेंस सिस्टम हिल जाएगा, लिहाजा बखमुत शहर मॉस्को का प्रमुख लक्ष्य है और इस शहर पर कब्जा हासिल होने के बाद डोनबास को पूरी तरह से जब्त करने की दिशा में बहुत बड़ी कामयाबी हासिल होगी।
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'नमक का शहर' है बखमुत
अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, बख्तमुत पर कब्जा करने के लिए भी जोदरार संघर्ष चल रहा है और अलजजीरा के रिपोर्टर चार्ल्स स्ट्राफोर्ड ने जनवरी महीने में अपनी एक रिपोर्ट में कहा था, कि रूसी सेना बख्तमुत शहर में भारी बमबारी कर रही है और तोप से गोले दागे जा रहे हैं। वहीं, यूक्रेनी सैनिकों का कहना है, कि रूसी सैनिक सोलेदार पर इसलिए कब्जा करना चाहते हैं, क्योंकि वो शहर नमक का केन्द्र है और रूस नमक के खदानों पर नियंत्रण करना चाहता है। इसके साथ ही, बखमुत शहर में जिप्सम की खदाने भी हैं, लिहाजा बखमुत शहर पर कब्जा कर रूस की कोशिश खनिजों पर नियंत्रण स्थापित करने की है। वैगनर समूह पहले ही कह चुका है, कि वो इन खनिजों पर कब्जा कर, उसे जो नुकसान हुआ है, उसकी भरपाई करेगा। खनिज बेचकर, उसके जो सैनिक मारे गये हैं, या घायल हुए हैं, उन्हें हुए नुकसान की भरपाई की जाएगी। लिहाजा, बखमुत शहर में फिलहाल भीषण जंग जारी रहने की पूरी संभावना है।












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