शुरू होने वाला है रूस-यूक्रेन में महायुद्ध? अमेरिका ने भेजने शुरू किए विध्वंसक हथियार, अलर्ट पर दुनिया
यूक्रेन के रक्षा मंत्री ओलेक्सी रेजनिकोव ने रविवार को पुष्टि की है, कि यूक्रेन को कुल 200 मिलियन डॉलर की रक्षात्मक सहायता के हिस्से के रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका से हथियारों की दूसरी खेप मिली है।
मॉस्को/कीव, जनवरी 24: ऐसी आशंका जताई जा रही है कि, यूक्रेन पर रूस कभी भी हमला शुरू कर सकता है और अगर रूस के सैनिक यूक्रेन की सीमा के अंदर कदम रखते हैं, तो एक पल में पूरी दुनिया महायुद्ध की आग में जलने लगेगी। यूक्रेन और रूस के बीच समझौता हो जाए, इसके लिए अमेरिका ने ताबड़तोड़ बैठकें कीं, रूसी विदेश मंत्री के साथ बैठक की गई, रूस और अमेरिका के राष्ट्रपतियों के बीच फोन पर बात हुई, धमकियां दी गईं, लेकिन तमाम बैठकें बेनतीजा साबित हुई हैं और अब अमेरिका ने विध्वंसक हथियारों की खेप यूक्रेन तक पहुंचानी शुरू कर दी है। वहीं, समाचार एजेंसी एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, नाटो सहयोगियों ने भी अब रूस यूक्रेन की मदद के लिए युद्धक विमान और जहाजों को रवाना कर दिया है।

अमेरिका ने भेजा हथियारों की दूसरी खेप
यूक्रेन के रक्षा मंत्री ओलेक्सी रेजनिकोव ने रविवार को पुष्टि की है, कि यूक्रेन को कुल 200 मिलियन डॉलर की रक्षात्मक सहायता के हिस्से के रूप में संयुक्त राज्य अमेरिका से हथियारों की दूसरी खेप मिली है। वाशिंगटन ने कहा है कि, वह कीव (यूक्रेन की राजधानी) और उसके पश्चिमी सहयोगियों के बीच उसकी सीमा पर दसियों हज़ार रूसी सैनिकों को लेकर चिंताओं के बीच यूक्रेन का समर्थन करना जारी रखेगा। हालांकि, अभी तक रूस ने सैन्य हमले की योजना से इनकार किया है। यूक्रेन के रक्षा मंत्री ओलेक्सी रेजनिकोव ने ट्वीटर पर लिखा है कि, यूक्रेन को सहयोगी देश अमेरिका से करीब 80 टन से ज्यादा विनाशक हथियार मिले हैं और हथियारों की ये दूसरी खेप है, जो अमेरिका ने यूक्रेन की रक्षा के लिए भेजे हैं। इससे पहले पिछले महीने दिसंबर में अमेरिका ने गोला-बारूद समेत करीब 90 टन घातक हथियार और सुरक्षा सामग्री यूक्रेन भेजी थी।
दूतावास के सदस्यों को वापस बुलाया
रूस और यूक्रेन के बीच स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है और महायुद्ध का खतरा कितना ज्यादा हो चुका है, इसका अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं, कि अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने यूक्रेन स्थिति अपने दूतावास के कर्मचारियों के परिवार को वापस अमेरिका बुला लिया है। अमेरिका ने कर्मचारियों के परिवार से फौरन यूक्रेन खाली करने के लिए कहा है। अमेरिकी विदेश विभाग ने कीव में अमेरिकी दूतावास में कर्मचारियों के परिजनों से कहा कि, उन्हें फौरन यूक्रेन से बाहर निकल जाना चाहिए। इसके साथ ही अमेरिकी विदेश विभाग ने गैर-जरूरी कर्मचारियों को भी फौरन यूक्रेन छोड़ने के लिए कहा है। यूक्रेन सीमा पर रूस के सैन्य निर्माण के बारे में बढ़ते तनाव के बीच यह कदम उठाया गया है, जिसे शुक्रवार को जिनेवा में विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के बीच वार्ता के दौरान भी कम नहीं किया जा सका है।

ब्रिटेन की चेतावनी
एक तरफ अमेरिका ने हथियारों की तैनाती शुरू कर दी है और दूतावास को खाली करना शुरू कर दिया है, तो दूसरी तरफ ब्रिटेन की तरफ से रूस को आखिरी चेतावनी दी गई है। ब्रिटेन के एक वरिष्ठ मंत्री ने रविवार को रूस को चेतावनी देते हुए कहा है कि, अगर रूस के एक भी सैनिक यूक्रेन की जमीन पर कदम रखते हैं, तो फिर रूस को काफी खतरनाक अंजाम चुकानी पड़ेगी। आपको बता दें कि, ब्रिटेन की तरफ से आरोप लगाए गये हैं कि, रूस यूक्रेन की सत्ता पलटना चाहता है और किसी कठपुतली सरकार का निर्माम करना चाहता है, जिसको लेकर ब्रिटेन ने शनिवार को देर से आरोप लगाया है। वहीं, यह भी पता चला है कि, पूर्वी यूक्रेन के कुछ अधिकारी रूसी खुफिया एजेंसी के संपर्क में हैं, जिसके बाद यूक्रेन में भी अफरातफरी मच गई है और राष्ट्रपति कार्यालय के यूक्रेन के सलाहकार मायखाइलो पोदोल्याक ने कहा कि आरोपों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

'भुगतने होंगे गंभीर परिणाम'
ब्रिटेन के उप-प्रधानमंत्री डॉमिनिक रैब ने रविवार को स्काई न्यूज को बताया कि, "अगर रूस ने आक्रमण करने की कोशिश की, या फिर कठपुतली शासन स्थापित करने के लिए कदम उठाया, तो इसके बहुत गंभीर परिणाम होंगे।" ब्रिटेन के विदेश मंत्री भी ऐसा ही आरोप रूस को लेकर लगा चुके हैं, जबकि इन आरोपों के बीच अभी भी एक लाख से ज्यादा रूसी सैनिक यूक्रेन की सीमा पर 'ऑर्डर' का इंतजार कर रहे हैं। रूस के हजारों टैंक, मिसाइल समेत फाइटर जेट भी यूक्रेन की सीमा के पास मौजूद हैं। हालांकि, मॉस्को ने जोर देकर कहा है कि, उसकी यूक्रेन पर आक्रमण करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। वहीं, ब्रिटिश विदेश मंत्रालय ने कहा कि, उसे जानकारी है कि रूसी सरकार यूक्रेन के पूर्व सांसद येवेन मुरायेव को रूस समर्थक नेतृत्व के लिए संभावित उम्मीदवार के रूप में मान रही है। मुरायेव ने उन विचारों को बढ़ावा दिया है, जो यूक्रेन पर रूसी विचारों के साथ निकटता से मेल खाते हैं।

कई सालों से चलता रूस-यूक्रेन में संघर्ष
यूक्रेन की सेना पिछले 7 सालों से रूस के साथ दो मोर्चों पर संघर्ष कर रही है। एक तरह यूक्रेन की सीमा पर रूस के एक लाख से ज्यादा सैनिक मौजूद हैं, तो एक सीमा पर रूस समर्थक विद्रोही भी यूक्रेन की नाक में दम किए हुए हैं। आपको बता दें कि, यूक्रेन और रूस समर्थक अलगाववादियों के बीच संघर्ष में अब तक 14 हजार से ज्यादा लोग मारे जा चुके है, जिनमें संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, 3 हजार 393 आम नागरिकों की मौत हुई है। इस बीच, यूक्रेन के लिए एक और सीमा मुद्दा है। हजारों प्रवासी जो महीनों से बेलारूस से यूरोपीय संघ में जाने की कोशिश कर रहे हैं, वे भी यूक्रेन के लिए एक समस्या बन गए हैं। यूक्रेन ने बेलरून में बड़े पैमाने पर एकत्र हुए प्रवासियों को अपने क्षेत्र में नहीं जाने की चेतावनी देते हुए कहा है कि उन्हें किसी भी हालत में यूक्रेन में नहीं आने दिया जाएगा।

क्या है क्रीमिया को लेकर संघर्ष?
यूक्रेन के पूर्वी हिस्से को क्रीमिया कहा जाता है और ये यूक्रेन का हिस्सा था। लेकिन 2014 में रूस ने क्रीमिया पर कब्जा कर लिया था। इस संघर्ष में इस दौरान 14 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो गई थी जिनमें काफी ज्यादा संख्या में यूक्रेन के निवासी थी। इसके साथ ही रूस ने क्रीमिया में अब भी करीब 28 हजार से ज्यादा हथियारबंद को तैनात कर रखा है। ये लोग अलगाववादी हैं, जो रूस का समर्थन करते हैं और जिन्हें रूस का समर्थन हासिल हैं। इन अलगाववादियों को डॉनबास के नाम से जाना जाता है। इन लोगों ने 2015 में यूक्रेन की सरकार के खिलाफ हथियारबंद विद्रोह का ऐलान कर दिया था और इनकी लड़ाई अब भी जारी है।












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