चीन की तबाही शुरू, बिकने जा रही बड़ी रियल स्टेट कंपनी, दुनिया के मंदी की चपेट में आने का खतरा तेज हुआ
हॉन्गकॉन्ग की एक अदालत ने चीन की बड़ी प्रॉपर्टी कंपनी एवरग्रांड को लिक्विडेट करने का आदेश दिया है। इसे आसान भाषा में कहें तो अदालत ने इस कंपनी को बेचकर कर्ज वसूली का आदेश दिया है। एवरग्रांड को दुनिया की बड़ी रियल स्टेट कंपनियों में गिना जाता है।
अदालत की ओर से ये आदेश तब आया है जब एवरग्रांड लगातार अपने कर्ज को पुनर्गठित करने के लिए किसी तरह की योजना पेश करने में विफल रही है। बीबीसी के मुताबिक एवरग्रांड को चीन के रियल इस्टेट संकट के 'पोस्टर चाइल्ड' के रूप में देखा जाता है। इस कंपनी पर तीन सौ अरब डॉलर से अधिक का कर्ज है।

अब से दो साल पहले जब एवरग्रांड के दिवालिया होने से जुड़ी खबर फैली थी तो दुनिया भर के वैश्विक बाजारों पर इसका नकारात्मक असर देखा गया था। तब कंपनी का कहना था कि उसके पास इस भारी-भरकम कर्ज को चुकाने के लिए पैसे नहीं हैं। इसके बाद ग्लोबल मार्केट को बड़ा धक्का लगा।
आपको बता दें कि एवरग्रांड 1996 में शुरू हुई थी और जल्द ही ये चीन की बड़ी रियल स्टेट कंपनी बन गई। इस कंपनी के चीन के करीब 200 शहरों में 1300 से भी ज्यादा प्रोजेक्ट हैं। कंपनी का रियल एस्टेट के अलावा इलेक्ट्रिक व्हीकल, थीम पार्क, फूड एंड बेवरेज, टूरिज्म और पैकेज्ड वाटर बोटल का भी कारोबार है, जिनमें 2 लाख से भी ज्यादा लोगों को रोजगार मिला हुआ है।
अप्रत्यक्ष रूप से चीन में ये कंपनी हर साल 38-40 लाख रोजगार पैदा करती है। इतना ही नहीं एवरग्रांड कंपनी की खुद की एक फुटबॉल टीम भी है। कंपनी के मालिक झू जिआयिन एक वक्त चीन के सबसे अमीर शख्स की लिस्ट में शामिल थे।
कैसे डुबी एवरग्रांड?
जब चीन का रियल एस्टेट मार्केट अपने बूम पर था, तब कंपनी ने एक के बाद एक नए प्रोजेक्ट की शुरुआत की, जिसके लिए कर्ज लिए गए। लेकिन चीन की सरकार ने रियल एस्टेट मार्केट के लिए सख्त नियम बना दिए। इसके बाद से ही कंपनी को घाटा होने लगा और कर्ज बढ़ने लगा।
कंपनी के कर्ज के भुगतान नहीं करने से अन्य बिल्डरों पर भी इसका प्रभाव पड़ा और लोन नहीं चुकाने की एक सीरीज की शुरुआत हो गई। प्रमुख डेवलपर्स रेसिडेंशियल प्रोजेक्ट को पूरा करने में असफल रहे। इसकी वजह से घर खरीदारों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
चीन की सरकार ने सख्त नियम क्यों बनाए?
बीते कुछ दशकों में चीन में रियल एस्टेट एक बड़ा बाजार बनकर उभरा। मध्यम वर्ग की आय बढ़ने पर लोगों का पलायन शहरों की ओर हुआ। इसका फायदा रियल स्टेट सेक्टर को हुआ। प्रॉपर्टी की डिमांड भी बढ़ी इसके कीमतें भी।
इसका फायदा थोड़े संपन्न लोगों ने उठाया और प्रॉपर्टी गैंबलिंग का खेल शुरू कर दिया। यानी सस्ते दामों में प्रॉपर्टी खरीदना और महंगे दामों में बेचना। चीन में इस तरह की कई बिल्डिंग हो गईं जिन्हें लोगों ने खरीद-खरीद कर खाली छोड़ दिया। इन बिल्डिंग्स में कोई रहता नहीं था। जब प्रॉपर्टी मार्केट में ज्यादा गड़बड़ी दिखाई देनी लगी तो चीनी सरकार ने रियल एस्टेट कंपनियों के लिए नियम कड़े कर दिए, जिसका असर एवरग्राउंड पर हुआ।
चीन के फाइनेंसियल मार्केट में भी हलचल होने की संभावनाएं हैं। चीन दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है जिसमें चीन के संपत्ति बाज़ार की हिस्सेदारी लगभग एक चौथाई है। अदालत के फैसले के बाद हॉन्गकॉन्ग में एवरग्रांड के शेयर मूल्यों में बीस फीसदी की कमी दर्ज की गई है।












Click it and Unblock the Notifications