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ESA ने सफलतापूर्वक लॉन्च किया ज्यूपिटर जूस मिशन, क्या बृहस्पति के तीन चंद्रमाओं पर पनप सकता है जीवन?

जूस बृहस्पति ग्रह के साथ-साथ इसके उपग्रहों, कैलिस्टो, गेनीमेड और यूरोपा का भी अवलोकन करेगा। जूस बाहरी सौरमंडल में चंद्रमा की परिक्रमा करने वाला पहला अंतरिक्ष यान होगा।

Esa successfully launches Jupiter juice

यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) ने अपना 'जूस' यानी कि ज्यूपिटर आइसी मून्स एक्सप्लोरर नाम का मिशन लॉन्च कर दिया है। मिशन के साथ इस अंतरिक्ष यान का नाम भी जूस (Jupiter Icy Moons Explorer-Juice) है। जूस मिशन के लिए ESA ने एयरिन 5 रॉकेट टेक को लांच किया।

इस मिशन में बृहस्पति के चंद्रमाओं, कैलिस्टो, गेनीमेड और यूरोपा पर जीवन की संभावना की भी जांच होगी। इस मिशन को 60 करोड़ किलोमीटर से अधिक दूर बृहस्पति पर ले जाने के लिए, ESA ने कम से कम 13 यूरोपीय देशों, अमेरिका, जापान और इजरायल को साथ लिया है।

इस प्रोजेक्ट की लागत 14,270 करोड़ रुपये है। यह अंतरिक्ष यान बृहस्पति ग्रह के चंद्रमाओं पर जीवन की तलाश के लिए आठ साल की लंबी यात्रा करेगा। पहले इस मिशन को 13 अप्रैल 2023 को कौरौ, फ्रेंच गयाना लॉन्च किया जाना था, लेकिन खराब मौसम के कारण इसकी लॉन्चिंग टाल दी गई थी।

रिपोर्ट के मुताबिक लॉन्चिंग के 28 मिनट बाद 6,200 किलोग्राम वजन वाला जूस अंतरिक्ष यान के एरियन 5 लॉन्चर से अलग होने है। अलग होने के लगभग 9 मिनट बाद यह पृथ्वी को अपना पहला संकेत भेजेगा। इसके बाद अगले 17 दिनों में अंतरिक्ष यान अपने एंटीना आदि को तैनात करेगा। इसके बाद 3 महीने तक परीक्षण करने के साथ उपकरण आदि तैयार करेगा।

जूस 6.6 अरब किमी की यात्रा करके साल 2031 में बृहस्पति की कक्षा में प्रवेश करेगा। दिलचस्प बात ये भी है कि जूस अंतरिक्ष यान के बृहस्पति ग्रह पर पहुंचने से पहले अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का यूरोपा क्लिपर अंतरिक्ष यान वहां पहुंच जाएगा।

नासा का यूरोपा क्लिपर अंतरिक्ष यान एक साल पहले अप्रैल 2030 में बृहस्पति ग्रह की कक्षा में पहुंचेगा। यूरोपा क्लिपर, जूस की तुलना में छोटे रास्ते से होकर जाएगा। यूरोपा क्लिपर धरती और मंगल ग्रह के चक्कर लगायेगा और बृहस्पति की कक्षा में पहुंचेगा। जबकि जूस पृथ्वी और शुक्र ग्रह के चक्कर लगाकर बृहस्पति की कक्षा में प्रवेश करेगा।

जूस को जुलाई, 2031 में बृहस्पति की कक्षा में प्रवेश करने के लिए शुक्र, मंगल और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण की सहायता पर निर्भर रहना होगा। ESA के कॉस्मिक विजन प्रोग्राम के हिस्से के रूप में ज्यूस एक अरब यूरो से अधिक की राशि हासिल करने वाला पहला मिशन है।

जूस मिशन के चार मुख्य उद्देश्य हैं।

1. ग्रह कैसे बनते हैं और जीवन कैसे प्रकट होता है?
2. सौर मंडल कैसे काम करता है?
3. ब्रह्मांड में भौतिकी के मूलभूत नियम क्या हैं?
4. वर्तमान ब्रह्मांड कैसे अस्तित्व में आया और यह किससे बना है?

बृहस्पति ग्रह, पृथ्वी की तुलना में सूर्य से पांच गुना दूरी पर है। पृथ्वी के चारों ओर की तुलना में 25 गुना कम सौर ऊर्जा प्राप्त करेगा। अंतरिक्ष यान में रेडियोधर्मी बैटरी नहीं है क्योंकि अमेरिका, रूस और चीन के विपरीत यूरोप अभी तक उन्हें औद्योगिक रूप से उत्पादन करने में सक्षम नहीं है।

जूस बाहरी सौरमांडल में चंद्रमा की परिक्रमा करने वाला पहला अंतरिक्ष यान होगा। ESA द्वारा प्रदान की गई आधिकारिक समयसीमा के अनुसार, जूस मिशन सितंबर, 2035 में समाप्त हो सकता है। जूस सौरमंडल के सबसे बड़े चंद्रमा गेनीमेड का अध्ययन करेगा। यह एकमात्र ज्ञात चंद्रमा है, जिसका अपना चुंबकीय क्षेत्र है।

आपको बता दें कि बृहस्पति सौरमंडल का सबसे बड़ा ग्रह है और इसके पास सबसे अधिक चंद्रमा भी हैं। इसके उपग्रहों के बारे में कहा जाता है कि ये 82 से 95 के बीच हैं। दिलचस्प बात ये है कि बृहस्पति के अधिकांश उपग्रह पिछले दो दशकों में खोजे गए हैं।

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