भारतीय नौसेना ने खारिज किया चीनी मीडिया का दावा, पूर्वी हिंद महासागर में नहीं दिखे चीनी जंगी जहाज

रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि नौसैनिक बेड़ा कहां और कितने समय के लिए तैनात किया जाएगा।

नई दिल्ली। चीन ने पूर्वी हिंद महासागर में 11 युद्धपोतों को भेजा है। चीन ने यह कदम ऐसे वक्त में उठाया है, मालदीव में संवैधानिक संकट जारी है और वहां आपातकाल लागू है। मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन चीन समर्थक हैं, जबकि विपक्षी नेताओं ने संकट को लेकर भारत से हस्तक्षेप की गुहार लगाई है। चीनी न्यूज वेबसाइट Sina.com.cn के मुताबिक 11 युद्धपोतों का दस्ता हिंद महासागर में दाखिल हो चुका है। दस्ते में एक 30,000 टन वाला एम्फिबियस ट्रांसपोर्ट डॉक है और तीन सपोर्ट टैंकर शामिल हैं। हालांकि भारतीय नौसेना ने पूर्वी हिंद महासागर में चीनी युद्धपोत भेजे जाने की खबर को खारिज कर दिया है। गौरतलब है कि मालदीव के सुप्रीम कोर्ट ने एक फरवरी को पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद नशीद के खिलाफ मुकदमे पर रोक लगा दी थी और नौ विपक्षी सांसदों की बहाली का आदेश दिया था, जिसके बाद सरकार ने संसद भंग कर दी थी। इसके बाद से मालदीव में आपातकाल लगा हुआ है।

सोशल मीडिया साइट वीबो पर पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी की तस्वीरें पोस्ट की गईं

सोशल मीडिया साइट वीबो पर पीपुल्स लिब्रेशन आर्मी की तस्वीरें पोस्ट की गईं

रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया है कि नौसैनिक बेड़ा कहां और कितने समय के लिए तैनात किया जाएगा। रिपोर्ट में कहा गया है 'अगर आप युद्धपोतों और अन्य उपकरणों को देखेंगे तो भारतीय और चीनी नौसेना के बीच अंतर बहुत बड़ा नहीं है।' युद्धपोतों की तैनाती को लेकर जब समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने चीनी रक्षा मंत्रालय से संपर्क किया तो कोई प्रतिक्रिया नहीं दी गई। लेकिन बीते शुक्रवार को चीन की सोशल मीडिया साइट वीबो पर चीनी आर्मी की तस्वीरें पोस्ट की गईं। तस्वीरों के साथ एक रिपोर्ट भी थी, जिसमें कहा गया कि पूर्वी हिंद महासागर में सेना रेस्क्यू ट्रेनिंग एक्सरसाइज कर रही है।

मालदीव में प्रभाव को लेकर भारत और चीन के बीच प्रतिद्वंद्विता पुरानी है

मालदीव में प्रभाव को लेकर भारत और चीन के बीच प्रतिद्वंद्विता पुरानी है

हिंद महासागर के द्वीप देश मालदीव का राजनैतिक संकट इस वक्त भारत और चीन को आपस में उलझा रहा है। मालदीव के राष्ट्रपति अब्दुल्ला यामीन ने बीजिंग के वन बेल्ट, वन रोड प्रोजेक्ट में शामिल होने के लिए दस्तखत कर चुके हैं। भारत को यह बात परेशान करती है। मालदीव में प्रभाव को लेकर भारत और चीन के बीच प्रतिद्वंद्विता पुरानी है। यामीन ने चीन के साथ बेल्ट एंड रोड परियोजना के लिए समझौता कर चीन का प्रभाव बढ़ने का संकेत दिया। भारत का मालदीव के साथ लंबा राजनीतिक और सुरक्षा संबंध रहा है। भारत मालदीव में चीन की मौजूदगी का विरोध करता है। चीन बेल्ट एंड रोड पहल को लेकर एशिया और अफ्रीका के देशों के साथ समझौते कर रहा है।

चीन अपना वर्चस्व साबित करना चाहता है

चीन अपना वर्चस्व साबित करना चाहता है

एशिया में चीन को अपना प्रमुख भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मानने वाला भारत पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अमेरिका और जापान के सहयोग से क्षेत्रीय स्तर पर अपना वर्चस्व साबित करना चाहता है। हालांकि इस बीच चीन ने भी दक्षिण और दक्षिण पूर्व एशिया में अपना वर्चस्व बढ़ाने के प्रयास किए हैं। श्रीलंका और पाकिस्तान में बंदरगाह बनाने से लेकर अफ्रीकी देश जिबूती में मिलिट्री बेस बनाने जैसे कदम उठाए हैं।

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