भारत, पाकिस्तान, अमेरिका, रूस... दुनिया के 78 देशों में 2024 में होंगे चुनाव, सवा 4 अरब लोग चुनेंगे नई सरकार

Election Year 2024: साल 2023 अब विदा होने वाला है और दुनिया अगले साल के स्वागत के लिए पूरी तरह से तैयार हो चुकी है। अगले साल कई वैश्विक घटनाएं होने वाली हैं और अगला साल पूरी दुनिया के लिए चुनावी साल साबित होने वाला है और दुनिया भर में 4 अरब 20 करोड़ से ज्यादा लोग, जो दुनिया की आधी से ज्यादा आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं, वो 2024 में चुनावों में भाग लेंगे।

वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक अटलांटिक काउंसिल के मुताबिक, अगले साल 78 देशों में 83 राष्ट्रीय स्तर के कार्यकारी या विधायी चुनाव होंगे और हम 2048 तक, एक साल में इतने सारे चुनाव फिर से नहीं देखेंगे।

साल 2024, अभी तक इतिहास में सबसे बड़ा चुनावी वर्ष साबित होने वाला है और इससे पहले आज तक ऐसा नहीं हुआ है, जब एक साल के अंदर इतने ज्यादा देशों में चुनाव हो, जो दुनिया भर में लोकतांत्रिक सिद्धांतों की स्थायी शक्ति का प्रदर्शन करता है।

Election Year 2024

ये चुनाव, लगभग हर महाद्वीप को छूते हुए - जनवरी के पहले सप्ताह से शुरू होने वाले हैं। एशियाई महाद्वीप में सबसे ज्यादा संख्या में मतदाता आत्मनिर्णय के अधिकार का प्रयोग करेंगे।

द इकोनॉमिस्ट के अनुसार, ब्राजील और तुर्की जैसे कुछ स्थानों पर आम चुनाव नहीं होंगे, बल्कि स्थानीय या नगरपालिका चुनाव होंगे, जिसमें पूरा देश भाग लेगा। इसी तरह, यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देश, ब्लॉक की अगली संसद का भी चुनाव करेंगे।

जिन देशों में चुनाव होने जा रहे हैं, उनमें से कई देश G20 और G7 जैसे दुनिया के कुछ शक्तिशाली समूहों का हिस्सा हैं, जिसका मतलब है, कि कई देशों में होने वाले चुनाव का भारी भू-राजनीतिक प्रभाव हो सकते हैं, और अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य भी प्रभावित होने की संभावना है।

हालांकि, कुछ देशों में चुनाव महज़ चुनावी औपचारिकताएं होंगी, जो मौजूदा सत्ता संरचनाओं पर - जैसे कि रूस - बहुत कम या कोई प्रभाव नहीं डालेंगी। संयुक्त राज्य अमेरिका सहित - अन्य देशों में राष्ट्रीय नीतियों और नेतृत्व को आकार देने के लिए चुनाव काफी महत्वपूर्ण होंगे।

बांग्लादेश से शुरू होगा चुनावों का सिलसिला

बांग्लादेश में जनवरी में होने वाले चुनावों के साथ 'नया साल' शुरू होगा और विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के विरोध के बावजूद, प्रधान मंत्री शेख हसीना सत्ता में अपने 15 साल पूरे करने के लिए तैयार हैं। हालांकि, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने चुनाव का बहिष्कार कर रखा है, लिहाजा शेख हसीना का चुनाव जीतना तय माना जा रहा है।

इसके बाद फरवरी में, हम दो मुस्लिम आबादी वाले देशों - पाकिस्तान और इंडोनेशिया - में लगभग एक सप्ताह के अंतर पर चुनाव होते देखेंगे। पाकिस्तान में, यह स्पष्ट नहीं है कि कौन सरकार बना सकता है, लेकिन अमेरिकी पत्रकार डेविड ए एंडेलमैन के अनुसार, इंडोनेशिया के मतदाताओं को "धनी व्यापार और सैन्य अभिजात वर्ग की शक्ति पर पकड़ ढीली होने की संभावना नहीं है"। इंडोनेशिया में प्रधानमंत्री जोको विडोडो का सत्ता में लौटना करीब करीब तय है।

वहीं, मई में, अफ़्रीका के सबसे ज्यादा औद्योगिक देश - दक्षिण अफ़्रीका - में चुनाव होंगे, जिन्हें 1994 में रंगभेद की समाप्ति के बाद से सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अन्य देश जो अपने भाग्य का फैसला करेंगे, उनमें अल्जीरिया, बोत्सवाना, चाड, कोमोरोस, घाना, मॉरिटानिया, मॉरीशस, मोज़ाम्बिक, नामीबिया, रवांडा, सेनेगल, सोमालीलैंड, दक्षिण सूडान, ट्यूनीशिया और टोगो शामिल हैं।

2024 में इस महाद्वीप में सबसे ज्यादा चुनाव होंगे।

आगामी चुनावों में, सत्तारूढ़ अफ़्रीकी नेशनल कांग्रेस (एएनसी) को एक कठिन चुनौती का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि यह आशंका बढ़ गई है, कि वह सत्ता बरकरार रखने के लिए आवश्यक 50% वोट हासिल नहीं कर पाएगी।

यूरोप में, हम सत्ता संघर्ष देख सकते हैं, क्योंकि राजनीतिक दल गठबंधन बनाने की कोशिश करेंगे। यूरोप में अगले 12 महीनों में 10 से ज्यादा संसदीय और राष्ट्रपति चुनाव होने वाले हैं। फ़िनलैंड, बेलारूस, पुर्तगाल, यूक्रेन, स्लोवाकिया, लिथुआनिया, आइसलैंड, बेल्जियम, यूरोपीय संसद, क्रोएशिया, ऑस्ट्रिया, जॉर्जिया, मोल्दोवा और रोमानिया यूरोप के सबसे बड़े चुनाव चक्र में मतदान करेंगे।

अगले वर्ष को दुनिया में होने वाले चुनावी बदलावों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन द इकोनॉमिस्ट के अनुसार, मतपेटी की ओर इस महान मार्च का मतलब जरूरी नहीं, कि लोकतंत्र का विस्फोट हो।

पाकिस्तान में फरवरी में चुनाव

मुस्लिम बहुल दक्षिण एशियाई राष्ट्र पाकिस्तान में 8 फरवरी 2024 को आम चुनाव होने हैं, जिसमें लगभग 10 करोड़ 60 लाख लोगों द्वारा अपने मताधिकार का प्रयोग करने की उम्मीद है।

चुनाव नेशनल असेंबली और चार प्रांतीय विधानसभाओं - बलूचिस्तान, खैबर पख्तूनख्वा, पंजाब और सिंध के लिए होंगे।

शीर्ष दो मुद्दे जिनसे आने वाली सरकार को निपटना होगा, वे हैं आर्थिक स्थिरीकरण और राजनीतिक अनिश्चितता। ये दोनों अप्रैल 2022 में पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ की सरकार के सत्ता से हटने के बाद से लगातार बने हुए हैं।

यह कहना अभी जल्दबाजी होगी, कि केंद्र में कौन सरकार बना सकता है, लेकिन कई राजनेताओं ने संकेत दिया है, कि एक गठबंधन सरकार देश पर शासन करेगा, क्योंकि वर्तमान में कोई भी बहुमत हासिल करने और अपना प्रधान मंत्री चुनने की स्थिति में नहीं है।

हालांकि, पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) सुप्रीमो नवाज शरीफ को अदालतों से राहत मिल गई है और ऐसा प्रतीत होता है, कि चुनाव से पहले उनकी सभी चिंताएं समाप्त हो रही हैं, पीटीआई के संस्थापक इमरान खान कैद में ही रहेंगे और अयोग्ता की वजह से चुनाव नहीं लड़ पाएंगे।

बहुत संभावना है, कि चुनाव के बाद नवाज़ शरीफ़ पाकिस्तान के प्रधामंत्री बन सकते हैं।

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अमेरिका में बाइडेन बनाम ट्रंप की 'लड़ाई'

अमेरिका, 2024 के राष्ट्रपति चुनाव के लिए एक 'जंगली लड़ाई' को देखने की उम्मीद कर रहा है। ऐसी उम्मीद है, कि डेमोक्रेट राष्ट्रपति जो बाइडेन नवंबर में, रिपब्लिकन पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ चुनावी मैदान उतरेंगे। उम्मीद है कि 16 करोड़ से ज्यादा लोग वोट देने के अपने अधिकार का उपयोग करेंगे और अमेरिका के भविष्य के लिए मतदान करेंगे।

डोनाल्ड ट्रम्प को इसी हफ्ते कोलोराडो सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति पद के प्राथमिक मतदान से अयोग्य घोषित कर दिया गया है, जो एक असाधारण फैसला है, जिसे नवंबर 2024 के अमेरिकी चुनाव से पहले अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किया जा सकता है।

पूरी संभावना है, कि अमेरिका में चुनाव बाइडेन बनाम ट्रंप होगा और बाइडेन की घटती रेटिंग की वजह से ऐसी संभावना है, कि डोनाल्ड ट्रंप फिर से अमेरिका के राष्ट्रपति बन सकते हैं, जो दुनिया के लिए सबसे बड़ी राजनीतिक घटना होगी और इसका प्रभाव पूरी दुनिया पर पड़ेगा। अमेरिका में अक्टूबर-नवंबर-दिसंबर में चुनाव होंगे और 2025 में 20 जनवरी को नये राष्ट्रपति का शपथ ग्रहण होगा।

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भारत में दुनिया का सबसे बड़ा चुनाव

भारत के 2024 के चुनावों का बहुत महत्व है, क्योंकि मई में 60 करोड़ से ज्यादा मतदाता देश की किस्मत का फैसला करेंगे। जनमत सर्वेक्षणों से पता चलता है, कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अभी भी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और उसके सहयोगियों से काफी आगे चल रही है।

इसी महीने बीजेपी ने चार में से तीन राज्यों के विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की है, जिसके बाद लोकसभा चुनाव के लिए मैदान सज चुका है। मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान भारत ने आक्रामक डिप्लोमेसी की शुरूआत की है और खुद को ग्लोबल साउथ के लीडर के तौर पर प्रोजेक्ट किया है, लिहाजा अगर मोदी फिर से प्रधानमंत्री बनते हैं, तो भारत वैश्विक राजनीति को और आक्रामक अंदाज में आगे बढ़ाएगा।

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