china taiwan tensions: ताइवान चुनाव से पहले कुछ खतरनाक करने जा रहा चीन, 8 चीनी लड़ाकू विमानों ने पार की सीमा
ताइवान में चुनाव से पहले चीन ने जल ओर वायु क्षेत्र में अपनी सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी हैं। चीनी युद्धक विमानों ने ताइवान जलडमरूमध्य की मध्य रेखा को पार किया है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने रविवार को कहा कि 24 घंटे के अंदर 8 चीनी लड़ाकू विमानों ने उसके जल क्षेत्र में घुसपैठ की है।
ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि चीन के J-10, J-11 और J-16 लड़ाकू विमानों ने जलडमरूमध्य के उत्तर और केंद्र में मध्य रेखा को पार कर लिया है। रक्षा मंत्रालय के दावे के अनुसार, ताइवान जलडमरूमध्य की मीडियन लाइन को एक चीनी गुब्बारे ने भी पार किया है। मंत्रालय ने कहा कि गुब्बारा पूर्व की ओर गया और लगभग एक घंटे बाद गायब हो गया।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक विवाद से पहले मीडियन लाइन दोनों पक्षों के बीच एक अनौपचारिक बैरियर के रूप में काम करती थी, लेकिन अब चीनी विमान नियमित रूप से इसके ऊपर से उड़ान भरते हैं। मंत्रालय ने कहा है कि ताइवान ने अपनी निगरानी के लिए सेनाएं भेजीं हैं।
आपको बता दें कि चीन ताइवान को अपना ही हिस्सा मानता है। जबकि ताइवान खुद को एक स्वतंत्र देश मानता है। चीन इसलिए ताइवान पर कब्जा करना चाहता है। ऐसा करके चीन पश्चिमी प्रशांत महासागर इलाके में अपना दबदबा दिखाने के लिए आजाद हो जाएगा। इससे गुआम और हवाई जैसे अमेरिकी मिलिट्री बेस के लिए खतरा पैदा हो जाएगा।
बता दें कि ताइवान में 13 जनवरी को होने वाले राष्ट्रपति और संसदीय चुनावों के लिए प्रचार अभियान चल रहा है। इन चुनावों में चीन के साथ संबंध और सीमा विवाद का एक प्रमुख मुद्दा है।
ओपिनियन पोल के मुताबिक, सत्तारूढ़ डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी(DPP) की लाइ चिंग-टे ताइवान के अगले राष्ट्रपति बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं, जबकि ताइवान की मुख्य विपक्षी पार्टी कुओमितांग पारंपरिक रूप से बीजिंग के प्रति नरम रुख रखने के लिए जानी जाती है।
माई फॉर्मोसा पोर्टल पर राष्ट्रपति पद की दौड़ में नवीनतम सर्वेक्षणों में DPP नेता विलियम लाई को 35.2 प्रतिशत वोट मिले हैं। वहीं, चीन समर्थक कुओमितांग (KMT) पार्टी होउ यू-इह 30.6 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर है। हालांकि बीजिंग की ओर झुकाव रखने वाले यूनाइटेड डेली न्यूज ने दोनों उम्मीदवारों को 31 फीसदी वोट दिया है।
कुओमितांग (KMT) पार्टी के नेताओं का कहना है कि अगर वह चुनाव जीतते हैं तो वह चीन के साथ फिर से वार्ता शुरू करेंगे, लेकिन ताइवान के लोग ही अपने भविष्य का फैसला करने का अधिकार है।












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