चीन में और गहराया आर्थिक संकट, कर्मचारियों की सैलरी में 25% की कटौती, वापस लिए जा रहे हैं बोनस
विश्लेषकों का कहना है कि, चीन अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर बहुत हद तक झूठ बोलता रहा है और अगर चीन में आर्थिक संकट की रिपोर्ट आई है, तो इसका मतलब यही है, कि स्थिति गंभीर हो चुकी है।
बीजिंग, जनवरी 29: चीन में आर्थिक संकट और गहरा गया है और एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में खराब वित्तीय स्थिति की वजह से लाखों चीनी कर्मचारियों की सैलरी में 25 प्रतिशत की कटौती करने का फैसला लिया गया है, जिसके बाद देश के सभी सरकारी कर्मचारी और अधिकारी परेशान हैं, लेकिन चूंकी चीन में कम्युनिस्ट सरकार के खिलाफ एक शब्द भी बोलना मना है, लिहाजा सरकारी कर्मचारी और अधकिरियों ने अपना मुंह बंद कर रखा है।

कर्मचारियों की सैलरी काटी गई
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन के लाखों शिक्षकों और अधिकारियों को कहा गया है कि, उन्हें पिछले साल जो बोनस दिया गया था, उसे वो कम्युनिस्ट पार्टी को वापस करें, क्योंकि देश की आर्थिक स्थिति सही नहीं है। हांगकांग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, समूचे चीन में स्थानीय सरकारों ने हेनान, जियांग्शी और ग्वांगडोंग प्रांतों में सार्वजनिक संस्थानों के सिविल सेवकों और शिक्षकों से 2021 की पहली तिमाही के लिए 20,000 युआन का बोनस भुगतान किया था, लेकिन अब सरकार की तरफ से कहा गया है कि, उस बोनस को सस्पेंड कर दिया गया है और सभी कर्मचारियों और अधिकारियों को आदेश दिया जाता है, कि वो सरकार को बोनस का पैसा फौरन वापस करें।

10 दिनों में बोनस वापस करें कर्मचारी
द हॉन्ग कॉन्ग पोस्ट के अनुसार, शंघाई, जियांग्शी, हेनान, शेडोंग, चोंगकिंग, हुबेई और ग्वांगडोंग में सिविल सेवकों के बोनस को निलंबित कर दिया गया है। वहीं, रिपोर्ट में कहा गया है कि, चीन के पूर्वी प्रांत जियांग्शी और नानचांग जल संसाधन ब्यूरो ने जून 2021 में अपने कर्मचारियों को दिए गये बोनस को 10 दिनों के भीतर चुकाने का आदेश दिया है। वहीं, डेक्सिंग शहर के अधिकारियों ने शिक्षकों को आदेश दिया है, कि जो बोनस उन्हें मिला था, उसे फौरन वापस करे। द हॉन्ग कॉन्ग पोस्ट के अनुसार, हाल ही में, चीन में कई विभागों के सरकारी कर्मचारियों की सैलरी में 20 से 25 फीसदी तक की कटौती की गई है।

राज्य सरकारों की भी वित्तीय स्थिति खराब
हांगकांग पोस्ट ने यह भी बताया है कि, चीन में स्थानीय सरकारों की वित्तीय स्थिति काफी बिगड़ चुकी है। खासकर 2020 की पहली छमाही के बाद से राज्य सरकारें आर्थिक कमी का सामना कर रही हैं। शंघाई को छोड़कर सभी प्रांतों ने राजकोषीय घाटे की सूचना दी है, जिसका अर्थ ये है, कि उन्होंने अपनी कमाई से ज्यादा खर्च किया है। चीन सरकार के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, 2020 की पहली छमाही में प्रांतीय सरकारों का घाटा 30 प्रतिशत बढ़कर 3.4 ट्रिलियन युआन हो गया था। वहीं, हेनान, सिचुआन और युन्नान जैसे प्रांतों ने 250 अरब युआन से अधिक के राजकोषीय घाटे की सूचना दी थी।

चीन सरकार पर भयंकर कर्ज
जबकि चीन सरकार की कुल कर्ज की स्थिति चिंता का विषय है।
द हॉन्ग कॉन्ग पोस्ट के अनुसार, चीन का गैर-वित्तीय-क्षेत्र ऋण (सरकार, कॉर्पोरेट और घरेलू क्षेत्रों द्वारा किया गया) 2020 में चीन के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 272 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। एचके पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, 2021 की तीसरी तिमाही में, यह संख्या मामूली रूप से बढ़कर 265 प्रतिशत हो गई थी, लेकिन इससे देश के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है।

ज़ीरो कोविड पॉलिसी से बढ़ा संकट
विश्लेषकों का कहना है कि, चीन अपनी आर्थिक स्थिति को लेकर बहुत हद तक झूठ बोलता रहा है और अगर चीन में आर्थिक संकट की रिपोर्ट आई है, तो इसका मतलब यही है, कि स्थिति गंभीर हो चुकी है। वहीं, एक्सपर्ट्स का कहना है कि, चीन में ज़ीरो कोविड पॉलिसी की वजह से काफी ज्यादा सख्ती बरती जा रही है और देश के ज्यादातर हिस्सों में बार लॉकडाउन लगाना पड़ता है। इनके अलावा चीन में रीयल एस्टेट का व्यापार बुरी तरह से गिरा है और चीन की रीयल एस्टेट उद्योग की सबसे बड़ी कंपनी डूबने के कगार पर है और चीन की अर्थव्यवस्था पर आए संकट के पीछे ये भी एक वजह हो सकती है।












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