Ebrahim Raisi: इस्लामिक क्रांति ने कैसे इब्राहिम को ईरान का मुखिया बना दिया? एक कट्टरपंथी नेता का सफरनामा
इब्राहिम रायसी किसी महान करिश्मे के लिए प्रसिद्ध नहीं है, लेकिन न्यायपालिका के प्रमुख के रूप में, भ्रष्ट अधिकारियों पर मुकदमा चलाने के लिए चलाए गये अपने लोकप्रिय अभियान की वजह से प्रसिद्ध हैं।
तेहरान, जून 19: काली पगड़ी और मौलवी का कोट पहने, ईरान के कट्टरपंथी नेता, इब्राहिम रायसी खुद को एक गंभीर, पवित्र व्यक्ति और गरीबों के लिए भ्रष्टाचार से लड़ने वाले चैंपियन के रूप में देखते हैं। शनिवार को 60 साल के इब्राहिम रायसी को इस्लामिक गणराज्य ईरान के अगले राष्ट्रपति के तौर पर विजेता घोषित किया गया है। हालांकि, चुनावी पर्यवक्षकों का आरोप है कि ईरान में सुधारवादी और उदारवादी नेताओं को इस बार चुनाव लड़ने ही नहीं दिया गया। लिहाजा, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के करीबी और कट्टर समर्थक शिया मौलवी और सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख इब्राहिम रईसी को जिताया गया है। आपको बता दें कि ईरान में राष्ट्रपति से भी ऊपर सर्वोच्च नेता होते हैं, लेकिन शासन का अधिकार राष्ट्रपति के हाथ में होता है। ईरान की आंतरिक और विदेश नीति राष्ट्रपति तय करता है लेकिन सर्वोच्च नेता का फैसला ही आखिरी फैसला होता है।
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कौन हैं इब्राहिम रायसी ?
इब्राहिम रायसी किसी महान करिश्मे के लिए प्रसिद्ध नहीं है, लेकिन न्यायपालिका के प्रमुख के रूप में, भ्रष्ट अधिकारियों पर मुकदमा चलाने के लिए उन्होंने एक लोकप्रिय अभियान जरूर चलाया था। चुनाव अभियान में उन्होंने भ्रष्टाचार पर लड़ाई जारी रखने, कम आय वाले परिवारों के लिए 40 लाख नए घरों का निर्माण करने और "एक मजबूत ईरान के लिए लोगों की सरकार" बनाने की कसम खाई थी। कई ईरानी मीडिया आउटलेट उन्हें सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के संभावित उत्तराधिकारी के रूप में भी देखते हैं, जो अगले महीने 82 साल के हो जाएंगे।

'होजातोलेस्लैम' की उपाधि
इब्राहिम रायसी, जिनकी काली पगड़ी को इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद के सीधे वंशज होने का प्रतीक माना जाता है, उन्हें "होजातोलेस्लैम" की उपाधि प्राप्त है, जिसका मतलब होता है, "इस्लाम का प्रमाण"। शिया लिपिक अनुक्रम में अयातुल्ला से एक रैंक नीचे। 2015 के अमेरिका से परमाणु समझौते के बाद तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और उदारवादी रूहानी खेमे के बीच किए गये समझौते की उन्होंने जमकर आलोचना की थी। हालांकि, रायसी सुधारवादी कार्यक्रमों में भी यकीन रखने वाले नेता माने जाते हैं, खासकर उन समझौतों में, जिससे ईरान की खराब हो चुकी आर्थित व्यवस्था को फायदा हो।

रायसी का छात्र जीवन
1960 में उत्तरपूर्वी ईरान के पवित्र शहर मशहद में इब्राहिम रायसी का जन्म हुआ था और इसी शहर में वो पले बढ़े। सिर्फ 20 साल की उम्र में उन्होंने ईरान की इस्लामिक क्रांति में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और 1979 की इस्लामिक क्रांति में उन्होंने अमेरिका समर्थित राजशाही को गिरा दिया और फिर रायशी को प्रॉसिक्यूटर जनरल नामित किया गया था। लेकिन रायशी पर इस दौरान ईरान में बड़े पैमानों पर विरोधी नेताओं की हत्या करवाने का आरोप लगा था। 1988 में में जब वो तेहरान में रिवॉल्यूशनरी कोर्ट के डिप्टी प्रॉसीक्यूटर, उस वक्त उन्होंने बड़ी संख्या में वामपंथी और मार्क्सिस्ट नेताओं को मरवा दीजिए। हालांकि, 2018 में जब रायशी से विपक्षी नेताओं को फांसी की सजा देने में उनके योगदान के बारे में पूछा गया था, तो उन्होंने किसी भी तरह की भूमिका होने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था कि उन्हें इस्लामिक रिपब्लिक के संस्थापक अयातुल्ला रूहोल्लाह खुमैनी से फाइल मिला था, जिसके तहत शुद्धिकरण की प्रक्रिया की गई थी। लेकिन, उन्हीं आरोपों को लेकर 2019 में अमेरिका ने रायसी और कुछ दूसरे नेताओं पर प्रतिबंध लगा दिया था। अमेरिका ने रायसी पर मानवाधिकर उल्लंघन का भी आरोप लगाया था।

जज के तौर पर है सालों का अनुभव
इब्राहिम रायसी के पास दशकों का न्यायिक अनुभव है। उन्होंने 1989 से 1994 तक तेहरान के प्रॉसीक्यूटर जनरल के तौर पर काम किया और फिर 2004 से 2014 तक उन्होंने ज्यूडिशियल अथॉरिटी के लिए डिप्टी चीफ के पद पर काम किया। और फिर 2014 में वो ईरान नेशनल प्रॉसीक्यूटर जनरल बन गये। उन्होंने खमेनेई के तहत धर्मशास्त्र और इस्लामी न्यायशास्त्र की पढ़ाई की है। उनकी आधिकारिक जीवनी के मुताबिक, 2018 से वो मशहद में एक शिया मदरसा में पढ़ा भी रहे हैं। 2018 में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई ने रायशी को सुप्रीम कोर्ट का हेड नियुक्त कर दिया। इसके साथ ही रायशी उस कमेटी का भी सदस्य है, जो ईरान का सर्वोच्च नेता का चुनाव करता है। रायशी ने तेहरान के शाहिद-बेहेश्ती विश्वविद्यालय में साइंस लेक्चरर जमीलेह अलमोलहोदा से शादी की है। इनकी दो बेटियां हैं।

इब्राहिम रायसी को जिताया गया है ?
ईरान में फ्रांस की तरह की हर चार साल पर राष्ट्रपति का चुनाव होता है और इस बार राष्ट्रपति चुनाव में 592 उम्मीदवारों ने नामांकन किया था, लेकिन गार्डियन काउंसिल ने सात उम्मीदवारों को ही चुनावी मैदान में उतरने की इजाजत दी थी। राष्ट्रपति चुनाव में एक भी उदारवादी नेता को खड़ा होने की इजाजत नहीं दी गई। 2017 में इब्राहिम रायसी राष्ट्रपति चुनाव हार गये थे। वहीं, इस बार इब्राहिम रायसी, मोहसिन रेजाई, सईद जलीली, सुधारवादी नेता मोहसिन मेहरालिज़ादेह, अब्दुल नासिर हिम्मती, अली रज़ा जकानी और आमिर हुसैन काजीजादे हाशमी को राष्ट्रपति चुनाव में खड़ा होने की इजाजत दी गई थी। लेकिन चुनाव से ठीक एक दिन पहले तीन उम्मीदवारों ने अपना नामांकन वापस लेते हुए रायसी को समर्थन कर दिया और फिर चुनाव में रायसी को जीत हासिल हुई है।












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