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पृथ्वी को मिलेगा '30 मिनट' का समय! घातक सौर तूफान की भविष्यवाणी कर सकता है NASA

सूर्य की गतिविधियां बढ़ रही हैं। सौर तूफान की संख्या और आशंका दोनों में बढ़ोतरी हो रही है। इसका समय पर भविष्यवाणी करने के लिए नासा एक मॉडल तैयार कर रहा है।

solar storm

सूर्य की सतह पर विस्फोट की वजह से जब बहुत अधिक मात्रा में ऊर्जा, ऊष्मा, प्रकाश और प्लाज्मा कणों के रूप में निकलती है, तो उसकी वजह से पैदा हुआ सौर तूफान पृथ्वी से भी टकरा सकता है। सौर तूफान के लिए आवश्यक नहीं है कि वह धरती की ओर ही बढ़े। वह अंतरिक्ष में किसी भी ओर बढ़ सकता है।

पृथ्वी को मिलेगा '30 मिनट' का समय!
लेकिन, जब सौर तूफान पृथ्वी की ओर बढ़ेगा तब क्या होगा? वैज्ञानिक इसी का पूर्वानुमान लगाने पर लंबे समय से काम कर रहे हैं। साइंस अलर्ट डॉट कॉम के मुताबिक अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ऐसे उन्नत कंप्युटर मॉडल विकसित कर रहा, जो सैटेलाइट डेटा का इस्तेमाल कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए इसके पृथ्वी से टकराने से 30 मिनट पहले इसकी भविष्यवाणी कर सकता है।

अर्ली वार्निंग सिस्टम की तरह करेगा काम
नासा वैज्ञानिकों के मुताबिक वे जो अर्ली वार्निंग सिस्टम तैयार कर रहे हैं, उसकी मदद से अगर कोई खतरनाक सौर तूफान विश्व के किसी भी हिस्से से टकराने वाला होगा तो उससे 30 मिनट पहले पता चल सकता है।

150 वर्ष पहले क्या हुआ था?
तथ्य यह कि सौर विस्फोट के दौरान जो प्रकाश निकलता है, वह वहां से निकले बाकी सौर पदार्थों (प्लाज्मा कणों) की तुलना में ज्यादा तेजी से धरती को काफी प्रभावित कर सकता है। क्योंकि इतिहास में ऐसी कुछ बहुत बड़ी घटनाएं हो चुकी हैं, जो आज के आधुनिक युग में हो तो भारी संकट आ सकता है। मसलन 150 वर्ष से पहले जो कैरिंगटन की घटना हुई थी, वह आज की तारीख में विद्युत और संचार उपकरणों को बुरी तरह से तबाह कर सकता है

सौर तूफान क्या है और यह कब होता ?
सौर तूफान तब उठता है जब सूर्य से बड़ी मात्रा में ऊर्जा का विस्फोट होता है, जिसके चलते सोलर फ्लेयर (सौर चमक) और कोरोनल मास इजेक्शन का उत्सर्जन होने लगता है। इस प्राकृतिक घटनाक्रम के दौरान विद्युत आवेशों और चुंबकीय क्षेत्रों की बहुत ही शक्तिशाली धारा पृथ्वी की ओर बढ़ सकती है, जिसकी रफ्तार करीब 30 लाख मील प्रति घंटे होती है।

'भूचुंबकीय तूफान' कैसे पैदा होता है?
जब सूर्य से आने वाली सामग्री अंतरिक्ष में पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से टकराती है तो उसकी वजह से 'भूचुंबकीय तूफान' पैदा होते हैं। इस चुंबकीय तूफान का प्रभाव हल्का भी हो सकता और भयानक भी हो सकता है। लेकिन, टेक्नोलॉजी की दुनिया में जब हम उसपर काफी हद तक निर्भर हो चुके हैं, ऐसी ब्रह्मांडीय घटनाओं का परिणाम बहुत ही घातक होने की आशंका बनी रहती है।

'सौर अधिकतम ' की ओर बढ़ रहा है सूर्य
नासा की ओर से पहले बताया गया था कि शोधकर्ताओं को इस बात की चिंता लगी हुई है कि हम 'सौर अधिकतम '(solar maximum) के चरम की ओर बढ़ रहे हैं। यह 11 साल के सौर गतिविधि चक्र का चरम है, जिसके 2025 के आसपास होने की संभावना है।

पिछले वर्षों में बढ़ गई है सूर्य की गतिविधियां
यही वजह है कि पिछले वर्षों में हम लगातार सौर तूफान, भू-चुंबकीय तूफान, सोलर फ्लेयर, कोरोनल मास इजेक्शन जैसे शब्दों को सुनने लगे हैं। जैसे-जैसे सौर गतिविधि चक्र अपने चरम बिंदु की ओर बढ़ रहा है, सौर ज्वाला से होने वाले खतरे की आशंका भी बढ़ती जा रही है।

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